उस रात मैं सोया नहीं…, संजू सैमसन की जगह वैभव सूर्यवंशी को चुनने के फैसले पर गंभीर ने खोला पर्दा

वैभव सूर्यवंशी का सूर्योदय साल 2025 के आईपीएल से हुआ जब राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। उन्होंने आईपीएल के पहले ही सीजन में शतक लगातर पूरी दुनिया को अपनी अभूतपूर्व प्रतिभा का परिचय दिया।

इसके बाद सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में भी दमदार प्रदर्शन किया और प्लेयर ऑफ द सीरीज के साथ- साथ ओरेंज कैप भी जीती। इन तमाम उपलब्धियों और दमदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने भारतीय सीनियर टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। उन्हें आयरलैंड और इंग्लैडं के खिलाफ खेली जाने वाली टी-20 सीरीज के लिए चुना गया। भारत टी-20 वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मट में पहली बार मैदान में था। कप्तान सूर्यकुमार यादव जा चुके थे और श्रेयस अय्यर को कमान सौंपी जा चुकी थी। वैभव सूर्यवंशी के टीम में चयनित होने की वजह से गंभीर के साथ- साथ कप्तान अय्यर का भी सिरदर्द बढ़ा। दोनों इस दुविधा में रहे कि आखिर सूर्यवंशी को किसकी जगह खिलाया जाए।

इन सब सोच विचार के बाद आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की सीरीज के दौरान निर्णय लिया गया कि हम विश्व कप के दौरान जो ओपनर थे (संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा) उनके साथ ही जाएंगे। लिहाजा, इन दो मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को जगह नहीं मिली। फिर हुआ यूं कि इस सीरीज में संजू के बल्ले से रन नहीं निकले। उन्होंने दोनों मैचों में कुछ खास कमाल नहीं किया। और तो और वे इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच में रन बनाने में असफल रहे, इसके बाद वैभव सूर्यवंशी को मौका दे दिया गया। इंग्लैंड के खिलाफ सूर्यवंशी ने तीन मैच खेले और संजू को सिर्फ दो मुकाबले मिले। जब इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज चल रही थी उसी दौरान जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की टी-20 सीरीज के लिए भारतीय स्क्वॉड का ऐलान हुआ। इस टीम में सबसे आश्चर्य की बात थी कि संजू सैमसन को बाहर कर दिया गया था। इस घटना के बाद चारों तरफ चर्चा तेज हो गई कि संजू सैमसन का भी सूर्यकुमार यादव की तरह करियर समाप्त हो गया। अब गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को इंग्लैंड सीरीज के दौरान वैभव सूर्यवंशी के लिए ड्रॉफ करने पर चुप्पी तोड़ी है और कहा है कि यह फैसला इतना कठिन था कि मुझे रात भर नींद नहीं आई।

गंभीर ने बताया कैसी थी वह फैसला लेने वाली रात

गौतम गंभीर ने अब खुलासा किया है कि संजू और वैभव की दुविधा ने उन्हें कितना परेशान किया था। भारत के आगामी घरेलू सीजन से पहले जियोस्टार से बात करते हुए मुख्य कोच ने स्वीकार किया कि सैमसन को टीम से बाहर रखने का फैसला शायद उनके कार्यकाल का सबसे मुश्किल फैसला था। गंभीर ने कहा, “सच कहूं तो मेरे दो साल के सफर में शायद वह एकमात्र रात थी जब मुझे नींद नहीं आई।” उन्होंने आगे कहा, “और मैंने यह बात संजू को भी बताई थी। क्योंकि मुझे पता था कि टी20 प्रारूप में कोचिंग के दौरान यह शायद सबसे कठिन फैसला था।”

वैभव सूर्यवंशी को क्यों चुना गया, बताया वाजिब कारण

गंभीर की यह असुविधा समझ में आने वाली थी। सैमसन टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रह चुके थे और उन्होंने ऐसे प्रदर्शन किए थे जिनसे आम तौर पर खिलाड़ियों को बैकअप मिलता है, लेकिन कुछ कमतर प्रदर्शनों के साथ ही सूर्यवंशी ने ऐसी फॉर्म दिखाई जिससे चयन को लेकर बहस को टालना मुश्किल होता जा रहा था। गंभीर ने कहा, “जो खिलाड़ी टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी था, उसे तीन-चार मैचों के बाद टीम से बाहर करना पड़ा। शायद इसका कारण यह था कि वैभव भी उसी तरह की फॉर्म में थे और हमें सीरीज जीतनी थी।” गंभीर ने कहा कि सैमसन के साथ बातचीत सीधी थी, टालमटोल वाली नहीं। भारत को शीर्ष क्रम में अधिक गति की जरूरत थी और उस समय सूर्यवंशी इसे प्रदान करने में सक्षम प्रतीत हो रहे थे। गंभीर ने कहा, “मेरी उनसे बहुत ही स्पष्ट बातचीत हुई। वैभव उस तरह की फॉर्म में थे और हमें शीर्ष क्रम में रन बनाने के लिए किसी की जरूरत थी, हमें शीर्ष पर एक मजबूत आधार की भी जरूरत थी। और उन्हें इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।”

सूर्यवंशी को गौतम गंभीर ने क्या समझाया

हालांकि, जो तर्क कभी सूर्यवंशी के पक्ष में काम करता था, वही तर्क बाद में युवा खिलाड़ी को धैर्य रखने के लिए मजबूर कर रहा है। गंभीर का तर्क है कि तात्कालिक असाधारण प्रदर्शन उन खिलाड़ियों की प्रतिष्ठा को स्थायी रूप से कम नहीं कर सकता जिन्होंने लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया है। इसलिए, सैमसन और अभिषेक शर्मा को केवल इसलिए दरकिनार नहीं किया जा सकता क्योंकि कोई युवा खिलाड़ी कहीं और शानदार प्रदर्शन कर रहा है। गंभीर ने सूर्यवंशी के बारे में बात करते हुए कहा “मैंने उसे समझाया कि मुझे पता है कि तुम अच्छी फॉर्म में हो, लेकिन कभी-कभी, जो खिलाड़ी लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है।”

जनता का दबाव या बाहरी शोर प्लेइंग XI नहीं तय करता

गंभीर ने स्पष्ट किया कि जनता का उत्साह भारत की प्लेइंग इलेवन तय नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया या बाहरी शोर प्लेइंग इलेवन तय नहीं करता।” इस बात पर जोर देते हुए कि अंतिम निर्णय उस संयोजन पर निर्भर करता है जिसे कप्तान और कोच भारत को जीत का सबसे बेहतर मानते हैं। गंभीर ने कहा, “अगर वैभव आज खेलता है, तो मेरे और जिसे भी हम टीम से बाहर रखेंगे, चाहे वह अभिषेक हो या संजू, उनके बीच यह एक कठिन बातचीत होगी।” उन्होंने कहा, “मेरे लिए लोकप्रिय फैसले लेना बहुत आसान है, लेकिन सही फैसले लेना शायद मेरे लिए सबसे मुश्किल काम है। और हमने संजू और अभिषेक को टीम में बनाए रखने का सही फैसला लिया है।”

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