रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन क्या टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए पर्याप्त? घरेलू क्रिकेट के आंकड़े और चयन प्रक्रिया पर पूरा विश्लेषण

रणजी ट्रॉफी भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े घरेलू रेड बॉल टूर्नामेंट में से एक है। 1934-35 से इसकी शुरुआत हुई थी और लगातार हर साल इस टूर्नामेंट की अहमियत खिलाड़ियों के लिए अहम मानी जाती है।

भारतीय टीम में कई खिलाड़ियों ने पिछले कुछ सालों में इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन की बदौलत जगह बनाई है। मगर पिछले कुछ सालों में ऐसा भी देखने को मिला है कि कई खिलाड़ियों ने इस टूर्नामेंट में एक के बाद सीजन दर सीजन बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन भारतीय टीम में चयन का इंतजार करते रहे।

वहीं कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे जिन्होंने जगह बनाई तो उन्हें खास मौके नहीं मिले। ऐसे ही कई खिलाड़ियों की बात करेंगे, उनके आंकड़ों पर भी नजर डालेंगे। उससे पहले भारतीय चयन प्रक्रिया की बात कर लेते हैं। दरअसल पिछले कुछ सालों में वनडे और टेस्ट क्रिकेट की संख्या में तेजी से गिरावट देखी गई है। इसका कारण टी20 क्रिकेट का बढ़ता कद भी हो सकता है। यही कारण है कि अब वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ियों की चर्चा देवदत्त पडिक्कल, ध्रुव जुरेल जैसे उभरते रेड बॉल टैलेंट से ज्यादा होती है।

जब विराट कोहली भी रणजी ट्रॉफी में खेलने उतरे…

अब सवाल यह है कि फिर रणजी ट्रॉफी का महत्व क्या है? कुछ महीनों पहले टीम इंडिया के मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं ने श्रेयस अय्यर, इशान किशन जैसे खिलाड़ियों का नाम लेकर घरेलू क्रिकेट खेलना अनिवार्य किया था। विराट कोहली भी दिल्ली के लिए रणजी में खेलने उतरे थे और कोटला का मैदान दर्शकों से भर गया था। धीरे-धीरे इसका माहौल बना लेकिन कुछ समय बाद फिर से यह सख्ती कम होती दिखने लगी। आज श्रेयस अय्यर टी20 टीम के कप्तान हैं और इशान किशन वनडे व टी20 का अहम हिस्सा हैं। क्या टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव, हर दो साल में वर्ल्ड कप से रणजी जैसे टूर्नामेंट की अहमियत कम हो रही है?

आज का युवा क्रिकेटर राहुल द्रविड़ या वीवीएस लक्ष्मण नहीं बनना चाहता है। आज के युवा अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, इशान किशन जैसे हार्ड हिटर्स को रोल मॉडल बनाने लगे हैं। टीम के कोचेज और मेंटोर की भी सोच टी20 वाली हो गई है। यही कारण है कि वनडे में भी अब 400 रन बनाना आम बात होती जा रही है। मगर इसका रणजी ट्रॉफी जैसे रेड बॉल टूर्नामेंट पर क्या असर पड़ रहा है। क्या अब भी खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने के जोश के साथ उतरते हैं? क्या अब भी उनके मन में यह उम्मीद होती है कि रणजी ट्रॉफी का अच्छा प्रदर्शन उन्हें भारतीय टेस्ट टीम तक ले जा सकता है?

रणजी ट्रॉफी का क्या है महत्व?

रणजी ट्रॉफी का महत्व टेस्ट टीम में आने के लिए कितना है यह देखने वाली बात हो जाती है। एक समय भारतीय क्रिकेट में टेस्ट टीम तक पहुंचने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता रणजी ट्रॉफी को माना जाता था। यहां लगातार रन बनाने वाले बल्लेबाज और विकेट लेने वाले गेंदबाज चयनकर्ताओं का ध्यान खींचते थे। हाल ही में सारांश जैन, आकिब नबी दार जैसे खिलाड़ियों ने अपने रणजी के प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया में जगह भी बनाई थी, मगर कई ऐसे नाम भी हैं जो शायद सालों से इस टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन उन्हें भारतीय टेस्ट टीम में जगह नहीं मिल पा रही है। इसका एक और कारण उभर कर आता है कि हर फॉर्मेट का विशेषज्ञ अलग होता है।

आकिब नबी ने पिछले साल रणजी ट्रॉफी रेड बॉल में बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन उसका फल यह था कि दिल्ली कैपिटल्स की आईपीएल टीम में उन्हें मौका मिला और वह फ्लाप साबित हुए। फिर भारत की वनडे टीम में उन्हें जगह मिली और वह बेअसर रहे। टेस्ट टीम में उन्हें चुना गया लेकिन वह प्लेइंग 11 में जगह बनाने में नाकामयाब रहे। हाल ही में इंडिया ए के लिए न्यूजीलैंड दौरे पर वह खेले और उन्होंने अपने विशेषज्ञ फॉर्मेट, जिसमें वह अच्छा करके आए थे, आते ही छाप छोड़ी। उन्होंने अनौपचारिक टेस्ट में बेहतरीन गेंदबाजी की।

अंतर साफ है कि आप रेड बॉल फॉर्मेट में अच्छा करने वाले खिलाड़ी को टेस्ट टीम में जगह देंगे या फिर टी20 व वनडे टीम में चुनेंगे? इसी कड़ी में कुछ ऐसे नामों का भी जिक्र करते हैं जो सालों से रणजी ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाए। इस लिस्ट में नाम आता है शम्स मुलानी, तनुष कोटियान, आर साई किशोर, मुशीर खान जैसे खिलाड़ियों का जो युवा होने का मानक भी पूरा करते हैं लेकिन टीम से दूर भी हैं।

शम्स मुलानी और तनुष कोटियान के आंकड़े

रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद भारत को टेस्ट क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जो निचले क्रम पर फंसी हुई स्थिति में रन बना सके और स्पेशलिस्ट स्पिनर भी हो। शम्स मुलानी और तनुष कोटिया दो ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने इस मानक को पिछले कुछ सालों में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पूरा किया है। फिर भी यह खिलाड़ी टीम इंडिया में जगह बनाने में नाकामयाब रहे। सारांश जैन को मौका मिला लेकिन वह प्रभावी नहीं साबित हुए।

शम्स मुलानी: अगर आंकड़ों की बात करें तो शम्स मुलाने ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पिछले कुछ सालों में बल्ले और गेंद दोनों से कमाल किया है। मुलानी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 63 मैचों में 2671 रन बनाए हैं और 284 विकेट लिए हैं। रणजी ट्रॉफी 2021-22 में 45 विकेट लेकर वह नंबर 1 गेंदबाज थे। फिर 2022-23 में 46 विकेट उन्होंने झटके। 2023-24 में 353 रन बल्ले से बनाए और 35 विकेट उन्होंने झटके। लगातार प्रदर्शन के बावजूद उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के लिए नहीं मौका मिल पाया।

तनुष कोटियान: उनके आंकड़ों की बात करें तो उन्होंने 50 फर्स्ट क्लास मैचों में 2417 रन बनाए और 161 विकेट झटके। मौजूदा रणजी ट्रॉफी 2026-27 में भी उनका बेहतरीन प्रदर्शन गेंद और बल्ले से जारी है। उन्होंने हरियाणा के खिलाफ अर्धशतक जड़ा और मैच में 11 विकेट भी झटके। उनका चयन दिसंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी दो टेस्ट के लिए भारतीय टीम में हुआ था, मगर वह डेब्यू नहीं कर पाए। उसके बाद फिर उनका चयन पिछले दो साल से टीम इंडिया में नहीं हो पाया।

मुशीर खान को नहीं मिला मौका, सरफराज की लेट एंट्री

सरफराज खान ने सालों तक रणजी ट्रॉफी में बेहतरीन प्रदर्शन किया। सरफराज ने 2021-22 से 2022-23 के बीच दो रणजी सीजन में 1,538 रन बनाए। उनकी टीम इंडिया में एंट्री हुई लेकिन देरी से उनको मौका मिला। मौका मिलने के बाद भी सरफराज ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन लंबे समय से अब फिर टीम इंडिया से बाहर हैं। श्रीलंका दौरे के लिए उनका चयन हुआ मगर प्लेइंग 11 में वह जगह नहीं बना पाए।

मुशीर खान की बात करें तो उन्होंने पिछले कुछ सीजन से रणजी और सभी घरेलू टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया। मौजूदा सीजन में भी वह बेहतरीन फॉर्म में हैं। हरियाणा के खिलाफ मुशीर ने शतक लगाया और 8 विकेट भी लिए। वह महज 21 साल के हैं और उनके पास मौका भी सीखने का बहुत है। ऐसे में वह हकदार तो हैं लेकिन मौके का इंतजार कर रहे हैं।

आर साई किशोर को भी मौके का इंतजार

इसी कड़ी में आर साई किशोर का भी एक ऐसा नाम सामने आता है। वह रणजी ट्रॉफी में 200 प्लस विकेट ले चुके हैं। हाल ही में रणजी के मौजूदा सीजन में उन्होंने हैट्रिक भी ली थी। 2023-24 सीजन में साई किशोर ने 50 प्लस विकेट लिए। उसके बाद भी वह लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आए हैं। मगर उनका नाम शायद सेलेक्शन के लिए कभी चर्चा में ही नहीं आता है।

यही आंकड़े सवाल उठाते हैं कि आखिर रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना भी भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए क्यों पर्याप्त नहीं है? इसका दूसरा पहलू भी आकिब नबी दार, सारांश जैन जैसे खिलाड़ी दर्शाते हैं लेकिन इसके पहले पहलू के उदाहरण ज्यादा हैं।

आयुष बडोनी नंबर 1, प्रियांशु दूसरे पर, गेंदबाजों में तनय अव्वल; रणजी ट्रॉफी के तीसरे मैच के बाद टॉप 5 बैटर-बॉलर

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के एलीट स्टेज में पहले चरण के तीन-तीन मुकाबले सभी टीमें खेल चुकी हैं। तीसरे मैच के बाद अगर टॉप 5 बल्लेबाजों की लिस्ट देखें तो आयुष बडोनी नंबर 1 पर हैं। वहीं गेंदबाजी में कर्नाटक के तनय त्यागराजन अव्वल हैं।

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