भारतीय घरेलू क्रिकेट की कई टीमों में अक्सर बवाल चलता रहता है और इस साल भी कहानी कुछ अलग नहीं है. हाल ही में शुरू हुए नए रणजी ट्रॉफी सीजन से ठीक पहले अरुणाचल क्रिकेट में उथल-पुथल मच गई थी, जिसके चलते टीम को एक मैच बिना खेले ही छोड़ना पड़ा था.
अब मेघालय क्रिकेट भी गलत वजहों से खबरों में आ गई है. टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही मेघालय की पूरी टीम को मैच से एक रात पहले पूरी तरह बदल दिया गया और नए खिलाड़ियों के साथ मेघालय का मुकाबला शुरू हुआ.
अक्टूबर में शुरू हुए रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन में ग्रुप स्टेज के चौथे राउंड के मुकाबले 2 नवंबर से शुरू हुआ. टूर्नामेंट के प्लेट ग्रुप में खेल रही मेघालय की टीम जब नागालैंड के खिलाफ मैदान पर उतरी तो एकदम बदले हुए चेहरे नजर आए. टीम की प्लेइंग-11 और स्क्वॉड शीट में भी सारे नाम बदल चुके थे. पिछले तीन राउंड के मुकाबलों में जो खिलाड़ी खेलते हुए नजर आए थे, उनमें से कोई भी इस मैच में नहीं उतरा.
रिपोर्ट के मुताबिक, मेघालय क्रिकेट संघ के अंदर खेमेबाजी के कारण ये नौबत आई है. असल में मेघालय क्रिकेट दो धड़ों में बंटा हुआ है, जिसमें एक तरफ अध्यक्ष जेम्स संगमा हैं तो दूसरी ओर सचिव रेयोनाल्ड खारकामनी है. दोनों के बीच चल रहे टकराव के कारण मेघालय हाई कोर्ट में मामला पहुंच गया, जहां से कोर्ट ने अध्यक्ष संगमा के पक्ष में फैसला दिया और पिछले 3 मैचों में खेलने वाली टीम को अवैध घोषित कर दिया. इसके अलावा कोर्ट ने सचिव के खेमे की ओर से तैयार एपेक्स काउंसिल के अन्य सभी फैसलों और टीम सेलेक्शन को भी खारिज कर दिया.
इसके चलते रातों-रात नई टीम तैयार की गई, जिसके बारे में पुरानी टीम को खबर भी नहीं थी. ऐसे में पिछले तीनों मैच खेलने वाली टीम मैदान पर भी पहुंची, लेकिन मैच रेफरी ने उन्हें बताया कि वो इसमें हिस्सा नहीं ले सकते, क्योंकि BCCI ने नई टीम को मान्यता दी है. क्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने स्क्वॉड के खिलाड़ी मैच से पहले वाली शाम तक प्रैक्टिस करते रहे. वहीं नए स्क्वॉड में से किसी भी खिलाड़ी ने किसी भी तरह की मैच प्रैक्टिस नहीं की थी, जबकि 2-3 खिलाड़ी तो पहली बार अपने बाकी साथी खिलाड़ियों से मिले थे.
मेघालय क्रिकेट में मचे इस बवाल की वजह सचिव रेयोनाल्ड खारकामनी हैं. उनके खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने इस साल की शुरुआत में अंडर-23 महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ियों से मिली यौन शोषण की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की. इसके चलते ही अध्यक्ष ने उन्हें निलंबित कर दिया था. खारकामनी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन फैसला उनके पक्ष में नहीं आया.