IND vs NZ: मिचेल सैंटनर की गेंदों के सामने क्यों संघर्ष करते हैं भारतीय बल्लेबाज?

न्यूजीलैंड के स्पिनर मिचेल सैंटनर की गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों के लिए हमेशा एक पहेली रही है. हालिया सीरीज में भी वो भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हुए हैं. उनकी सबसे बड़ी खासियत?

उनकी आंखें, जो बल्लेबाजों के हर हावभाव को पढ़ लेती हैं. सैंटनर की आंखें किसी जादूगर या स्नाइपर जैसी नहीं दिखतीं. वो भले ही रात के मैचों में चश्मा पहनते हों, लेकिन उनकी निगाहें बिल्कुल शांत और स्थिर रहती हैं. ये खामोश निगाहें ही बल्लेबाजों की हर हरकत को बारीकी से देखती हैं, जिससे उन्हें खेल को समझने में मदद मिलती है. 2024 की घरेलू टेस्ट सीरीज में भी उन्होंने भारतीय बल्लेबाजों को खूब परेशान किया था, और इस सीरीज में भी वो एकमात्र ऐसे गेंदबाज हैं जिनसे टीम इंडिया डर रही है.

बल्लेबाजों को पढ़ने का तरीका

ज्यादातर स्पिनर गेंद फेंकने से पहले बल्लेबाज के पैरों पर नजर रखते हैं, लेकिन कुछ और ही करते हैं. वो बल्लेबाज के पूरे शरीर को देखते हैं, पैर, हाथ, सिर, ताकि उनके सूक्ष्म हावभाव और वजन के वितरण से मन को पढ़ा जा सके. 2023 विश्व कप के दौरान उन्होंने कहा था, ‘आपको उनके हर हिस्से को जितनी बारीकी से हो सके देखना होगा. खासकर जब पिच सपाट हो या मुझे लगे कि बल्लेबाज कुछ करने वाला है, तो मैं उन्हें और भी गौर से देखता हूं.’ वो अपने रन अप में भी बदलाव करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे फुटबॉल में पेनल्टी लेने वाला खिलाड़ी करता है. इससे वो बल्लेबाज को पहले हरकत करने के लिए मजबूर करते हैं, ताकि वो अपनी योजना बदल सकें. रन अप के दौरान बल्लेबाज की चाल समझना और फिर पलक झपकते ही सही प्रतिक्रिया देना, इसमें सैंटनर को महारत हासिल है.

सैंटनर की दो गेंद करती हैं परेशान

सैंटनर की एक गेंद बाहर जाती है और दूसरी जो अंदर आती है. लेकिन इन पारंपरिक गेंदों के अंदर भी उनके पास दो प्रकार हैं.एक गेंद जो टॉप स्पिन के साथ टप्पा पड़ने के बाद ऊपर उठती है, और दूसरी साइड स्पिन वाली गेंद जो तेजी से बाहर निकलती है. वो अपनी गेंदों के रहस्य को छिपाते नहीं हैं.

क्रिकेट लाइफ स्टोरीज के एक वीडियो में उन्होंने अपनी विविधताओं के बारे में बताया था, ‘साइड स्पिन के लिए मैं अपनी हथेली को आगे रखता हूं ओवर स्पिन वाली गेंदों के लिए मैं अपनी हथेलियों को ऊपर रखता हूं. फिर मैं अंडर स्पिनर फेंकता हूं, जो पिच से बहुत तेजी से स्किड करती है. इसके लिए मैं हथेली को पीछे की ओर रखता हूं, कलाई को उस तरह से घुमाता हूं.’ उन्होंने ये भी कहा, ‘रिवोल्यूशन देना सीखो और फिर सटीकता बनाओ. इसका उल्टा मत करो.’

स्पीड और चकमे का रीमिक्स

सैंटनर की गति का स्पेक्ट्रम कमाल का है. उनकी औसत गेंद 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आती है, लेकिन कुछ 75 तक गिर जाती हैं और कुछ 95 तक भी पहुंच जाती हैं, बिना हाथ की गति में कोई खास बदलाव दिखाए. ये सब बल्लेबाजों को भ्रम में डाल देता है. उन्होंने ये कला डेनियल विटोरी से सीखी है.

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