Cricket Controversy: तिलक वर्मा के रनआउट पर विवाद, वेस्टइंडीज पर खेल भावना के उल्लंघन के आरोप

भारत और वेस्टइंडीज के बीच 11 अक्टूबर को इंदौर में खेले गए तीसरे टी-20 मुकाबले में तिलक वर्मा के रनआउट को लेकर विवाद खड़ा हो गया। भारतीय बल्लेबाजों को लगा कि गेंद बाउंड्री तक पहुंच गई है और खेल रुक चुका है।

हालांकि, वेस्टइंडीज के फील्डरों ने गेंद को बाउंड्री पर रोक लिया और रनआउट का प्रयास किया। अक्षर पटेल तो बच गए, लेकिन तिलक वर्मा को अपना विकेट गंवाना पड़ा। इस घटना के बाद कैरेबियाई टीम की खेल भावना पर सवाल उठने लगे।

कैसे हुआ तिलक वर्मा का रनआउट?

यह घटना भारतीय पारी के 17वें ओवर में हुई, जब वेस्टइंडीज के गेंदबाज गुडाकेश मोती गेंदबाजी कर रहे थे। ओवर की चौथी गेंद पर तिलक वर्मा ने गेंद को लेग साइड की ओर खेला। भारतीय बल्लेबाजों को लगा कि गेंद चौके के लिए चली गई है, लेकिन फील्डर ने डाइव लगाकर उसे रोक लिया और विकेटकीपर शाई होप की तरफ थ्रो कर दिया।

इस दौरान अक्षर पटेल क्रीज से बाहर थे। शाई होप ने उन्हें रनआउट करने का प्रयास किया, लेकिन अक्षर ने समय रहते अपना बल्ला क्रीज में पहुंचा दिया। इसके बाद गेंदबाज गुडाकेश मोती ने नॉन-स्ट्राइकर छोर पर स्टंप्स की गिल्लियां बिखेर दीं। उस समय तिलक वर्मा को अंदाजा नहीं था कि गेंद अभी खेल में है और उनके खिलाफ रनआउट की अपील की जा सकती है।

थर्ड अंपायर के फैसले से बढ़ा विवाद

गुडाकेश मोती द्वारा स्टंप्स गिराए जाने के बाद वेस्टइंडीज की टीम ने तिलक वर्मा के खिलाफ रनआउट की अपील की। रिप्ले देखने के बाद थर्ड अंपायर ने पाया कि गेंद बाउंड्री पार नहीं गई थी और खेल जारी था। ऐसे में नियमों के मुताबिक तिलक वर्मा को रनआउट दिया गया।

हालांकि, विवाद का मुख्य कारण फैसला नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों का रवैया रहा। भारतीय बल्लेबाजों को लगा था कि गेंद चौके के लिए जा चुकी है, इसलिए इस घटना को खेल भावना के नजरिए से देखा जा रहा है। क्रिकेट के नियमों के तहत बल्लेबाज का आउट होना और विरोधी टीम का खेल भावना दिखाना दो अलग-अलग बातें हैं।

जब धोनी ने वापस ली थी इयान बेल के खिलाफ अपील

इस घटना की तुलना 2011 में भारत और इंग्लैंड के बीच नॉटिंघम टेस्ट में हुए एक चर्चित मामले से की जा रही है। उस मुकाबले में इयान बेल और उनके साथी बल्लेबाज को लगा था कि गेंद बाउंड्री पार कर गई है। इसी गलतफहमी में बेल क्रीज छोड़कर आगे बढ़ गए थे और भारतीय टीम ने उन्हें रनआउट कर दिया था।

हालांकि, तत्कालीन भारतीय कप्तान एमएस धोनी ने बाद में खेल भावना दिखाते हुए अपील वापस लेने का फैसला किया। इसके बाद बेल को दोबारा बल्लेबाजी करने का मौका मिला। अब तिलक वर्मा के रनआउट की घटना के बाद धोनी के उस फैसले की चर्चा फिर से होने लगी है। क्रिकेट प्रशंसक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि मैदान पर नियमों का पालन करने के साथ-साथ खेल भावना को कितनी अहमियत दी जानी चाहिए।

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