International Women’s Day: कहते हैं इतिहास लिखा जाता है. 2 नवंबर 2025 को भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी वनडे वर्ल्ड कप का खिताब पहली बार अपने नाम कर, वही किया. उन्होंने नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले फाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीका को हराकर अपने वर्ल्ड चैंपियन बनने की ऐतिहासिक कहानी लिखी. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम ने सिर्फ भारत का ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का नाम रोशन किया. वो महिला वनडे वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली एशियाई टीम बनी. भारत को महिला क्रिकेट का वर्ल्ड चैंपियन बनाने में वैसे तो पूरी की पूरी टीम का बड़ा हाथ है, लेकिन उन 8 की बात बहुत जरूरी है, जो शायद अगर ना होती तो भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चैंपियन वाली पैंठ भी नहीं जमती.
1. हरमनप्रीत कौर
स्टोरी टूर्नामेंट के शुरुआती संघर्ष से शुरू होती है. भारत ने पहले दो मैच जीते, लेकिन फिर तीन हार का सामना किया. टीम पर दबाव था, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कभी हार नहीं मानी. पूरे टूर्नामेंट में 9 मैचों में उन्होंने 32.50 की औसत से 260 रन बनाए. सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 89 रनों की पारी ने भारत को 339 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने का हौसला दिया. उनकी कप्तानी, फील्डिंग और सीनियर खिलाड़ी के रूप में टीम को एकजुट रखना ही वह जादू था, जिसने भारत को फाइनल तक पहुंचाया. फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के 246 रनों के जवाब में उन्होंने आखिरी गेंद तक लड़ाई लड़ी. हरमनप्रीत ने कहा था, हम इंतजार कर रहे थे इस पल का. और, उनका इंतजार खूबसूरत अंजाम पर पहुंचा.

2. स्मृति मंधाना
स्मृति मंधाना तो टूर्नामेंट की सबसे चमकदार सितारा रहीं. 9 मैचों में 54.25 की औसत से 434 रन बनाकर वो भारत की सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बनीं. पूरे वर्ल्ड कप में उन्होंने लगातार पार्टनरशिप दी. पहले प्रतिका रावल के साथ और फिर टूर्नामेंट के नॉक आउट में आकर शेफाली के साथ.

3. प्रतिका रावल
टूर्नामेट में स्मृति की शुरुआती जोड़ीदार प्रतिका रावल ने भी कमाल किया. सिर्फ 7 मैच खेलकर उन्होंने 51.33 की औसत से 308 रन बनाए. न्यूजीलैंड के खिलाफ मस्ट-विन मैच में 122 रनों की उनकी शतकीय पारी ने भारत को सेमीफाइनल की राह दिखाई. तकनीकी रूप से मजबूत प्रतिका ने स्मृति के साथ दमदार ओपनिंग पार्टनरशिप की. दुर्भाग्यवश चोट के चलते वे नॉकआउट में नहीं खेल पाईं, लेकिन उनकी नींव पर ही टीम खड़ी हुई.

4. शेफाली वर्मा
फिर आई शेफाली वर्मा की बारी. चोटिल प्रतिका की जगह उन्होंने सिर्फ 2 मैच खेले, लेकिन क्या कमाल किया. फाइनल में 78 गेंदों पर उनकी 87 रन की विस्फोटक पारी ने भारत को मजबूत आधार दिया. वे प्लेयर ऑफ द मैच बनीं. न सिर्फ बल्लेबाजी, बल्कि गेंदबाजी में भी उन्होंने 2 विकेट झटके. उन्होंने सुने लूस और मारीजाने कैप को आउट कर साउथ अफ्रीका की कमर तोड़ दी. शेफाली ने फाइनल में किए अपने साबित कर दिया कि बड़े मैचों की बड़ी खिलाड़ी हैं.

5. जेमिमा रोड्रिग्स
भारत की मिडिल ऑर्डर में रक्षक बनीं जेमिमा रोड्रिग्स. 8 मैचों में 58.40 की औसत से उन्होंने 292 रन बनाए. इंग्लैंड के खिलाफ ड्रॉप होने के बाद जेमिमा ने वापसी की और न्यूजीलैंड के खिलाफ अर्धशतक जड़ा. लेकिन असली जादू सेमीफाइनल में दिखा, जहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 339 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने 134 गेंदों पर नाबाद 127 रन बनाए. जेमिमा की ये पारी एक मिसाल बन गई.

6. ऋचा घोष
विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने फिनिशर की भूमिका निभाई. उन्होंने 8 मैचों में 133.52 की स्ट्राइक रेट और 33.16 की औसत के साथ 235 रन बनाए. ऋचा की स्ट्राइक रेट पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रही, जो निचले ऑर्डर को संभालने का सबसे बड़ा हथियार साबित हुई.

7. दीप्ति शर्मा
अब आती है ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा की कहानी. वे टूर्नामेंट की सबसे बड़ी स्टार थी. दीप्ति को 9 मैचों में 215 रन बनाने के अलावा 22 विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया. साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में उन्होंने कमाल ही कर दिया, जहां 58 रन बनाने के अलावा 9.3 ओवर में 5/39 लेकर दक्षिण अफ्रीका को 246 पर समेट दिया.

8. श्री चरणी
भारतीय महिला क्रिकेट टीम के वर्ल्ड चैंपियन बनने की बात श्री चरणी के बिना अधूरी है. श्री चरणी ने टूर्नामेंट में चुपचाप अपना काम गेंद से किया. उन्होंने 9 मैचों में 14 विकेट चटकाए. मिडिल ओवर में कंट्रोल करने वाली उनकी गेंदबाजी ने कई मैच पलटे.

भारत की महिला क्रिकेट में सुनहरे युग की शुरुआत
ये आठों जांबाज—हरमनप्रीत, स्मृति, प्रतिका, शेफाली, जेमिमा, ऋचा, दीप्ति और श्री चरणी- ने मिलकर भारत को चैंपियन बनाया. सेमीफाइनल में 7 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराने से लेकर फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से रौंदने जैसे हर पल इनकी मेहनत का फल था. स्मृति की क्लास, शेफाली की आक्रामकता, जेमिमा का धैर्य, दीप्ति का ऑलराउंड जादू, ऋचा की पावर, प्रतिका की स्थिरता, हरमनप्रीत की नेतृत्व क्षमता और श्री चरणी का छुपा हुआ कमाल, ये कहानी सिर्फ एक वर्ल्ड कप की नहीं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के सुनहरे युग की शुरुआत की है.