नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज मोहम्मद कैफ ने टीम मैनेजमेंट की चयन नीति पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। कैफ ने मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी तेज गेंदबाजों को लगातार नजरअंदाज करने और उन्हें टीम से बाहर रखने के फैसले को भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान बताया है।
कैफ का मानना है कि केवल उम्र के आधार पर किसी मैच-विनर खिलाड़ी को किनारे कर देना सही नहीं है, बल्कि मौजूदा फॉर्म और फिटनेस को पैमाना बनाया जाना चाहिए।
मोहम्मद कैफ ने क्या कहा?
मोहम्मद कैफ ने रोहित शर्मा, विराट कोहली और मोहम्मद शमी का उदाहरण देते हुए कहा कि उम्र का बहाना बनाकर किसी खिलाड़ी को बाहर का रास्ता नहीं दिखाया जा सकता। उन्होंने कहा कि ‘आप विराट कोहली, रोहित शर्मा या मोहम्मद शमी की उम्र को लेकर ही क्यों बात करते हैं? उम्र आपकी क्षमता तय नहीं करती, आपकी मौजूदा फॉर्म और फिटनेस तय करती है। शमी फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 22-22 ओवर गेंदबाजी कर रहे हैं, एक खिलाड़ी इससे ज्यादा और क्या कर सकता है? वहीं भुवनेश्वर कुमार ने बैंगलोर के लिए खेला और दो बार IPL का खिताब जिताने में बड़ी भूमिका निभाई। कोई खिलाड़ी इससे ज्यादा और क्या साबित करे?’
अनुभव का कोई तोड़ नहीं!
कैफ ने स्पष्ट किया कि अनुभवी तेज गेंदबाजों को ड्रॉप करने से खुद शमी या भुवी का नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर भारतीय टीम, देश और प्रशंसकों का नुकसान है। कैफ के अनुसार, जिस स्तर की गेंदबाजी और स्विंग कंट्रोल भुवनेश्वर और शमी के पास है, उस स्तर तक नए गेंदबाजों को पहुंचने में काफी लंबा समय लगेगा। उन्होंने कहा, ‘अनुभव सिर्फ गिनती का नहीं होता। अगर आपको वर्ल्ड कप जीतना है, तो आपको मैदान पर अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत होती है। बल्लेबाजी में रोहित, कोहली, अय्यर, केएल राहुल और हार्दिक पांड्या के साथ हमारा टॉप 5-6 तय है, वहां कोई दिक्कत नहीं है। असली सवाल यह है कि हमारे स्पिनर और तेज गेंदबाज कौन होंगे?’
लॉर्ड्स टेस्ट का दिया उदाहरण
मोहम्मद कैफ ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए लॉर्ड्स टेस्ट का उदाहरण दिया, जहां जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में युवा गेंदबाजों के साथ उतरना टीम को भारी पड़ा था। उन्होंने कहा कि ‘हमने लॉर्ड्स में जसप्रीत बुमराह के बिना नए गेंदबाजों को मौका दिया था और इंग्लैंड ने हमारे खिलाफ 387 रन बना डाले। हमारी खूब धुनाई हुई थी। अर्शदीप सिंह और अन्य नए खिलाड़ियों को मौके दिए गए, लेकिन मेरा मानना है कि आप सिर्फ एक साल के भीतर नए खिलाड़ियों को पूरी तरह से परख और तैयार नहीं कर सकते।’