राहुल द्रविड़ का नंबर मेरे पास सेव नहीं था, टीम इंडिया के गेंदबाज ने कहा- भारत के कोच का मैसेज मैंने इग्नोर कर दिया

भारतीय तेज गेंदबाज आकाश दीप ने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने का सपना बरसों तक देखा था, लेकिन जब वह पल आया, तो एक अजीबोगरीब वाकया हो गया। डेब्यू से ठीक एक दिन पहले तत्कालीन हेड कोच राहुल द्रविड़ ने उन्हें मैसेज करके उनके खेलने की जानकारी दी।

हालांकि, फोन में राहुल द्रविड़ का नंबर सेव न होने के कारण आकाश दीप ने उस मैसेज पर ध्यान ही नहीं दिया और उसे सामान्य मैसेज समझकर नजरअंदाज कर दिया।

नंबर अनजाने में अनदेखा करने के बाद आकाश दीप घंटों तक इसी उधेड़बुन में रहे कि उन्हें अगले दिन मैदान पर उतरने का मौका मिलेगा या नहीं। उन्होंने बताया, “मुझे राहुल सर का मैसेज आया था कि ‘तुम कल खेल रहे हो।’ उनका नंबर मेरे फोन में सेव नहीं था, इसलिए मैंने मैसेज को इग्नोर कर दिया।” बाद में जब उन्होंने मैसेज को दोबारा ध्यान से देखा तो सच्चाई का अहसास हुआ। आकाश ने द्रविड़ को कॉल करके तुरंत माफी मांगी और कहा, “सॉरी सर, आपका नंबर सेव नहीं था, इसलिए मैसेज मिस हो गया।”

इस खबर की पुष्टि होते ही आकाश दीप पर कोई दबाव नहीं आया, बल्कि उन्होंने इस मौके को अपने सालों के संघर्ष का रिपोर्ट कार्ड माना। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि पर कहा, “मैं खुश था, लेकिन मैंने इसे एक बड़े मौके की तरह देखा। मैंने सोचा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा मौका है। मैंने पिछले 22-23 सालों में जो कुछ भी किया था, यह पांच दिन उसी की परीक्षा थे।”

बिहार के सासाराम जिले से निकलकर भारतीय टीम तक पहुंचने का आकाश दीप का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। शुरुआत में उनके पास कोई मैदान या बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। सासाराम में रहते हुए उन्होंने कभी लेदर बॉल से क्रिकेट भी नहीं देखा था। शुरुआत में वह बल्लेबाज के तौर पर खेलते थे, लेकिन महंगे क्रिकेट किट का खर्च न उठा पाने के कारण उन्होंने गेंदबाजी पर ध्यान देना शुरू कर दिया-और यही फैसला उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

सासाराम छोड़ने के बाद आकाश दीप ने दिल्ली और फिर कोलकाता का रुख किया, जहां उन्होंने क्लब क्रिकेट में अपनी धार दिखाई। इसके बाद उन्होंने बंगाल की ओर से घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। आखिरकार, उन्हें रांची टेस्ट में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला, जो उनके गृह राज्य बिहार के करीब था। इस खास पल के गवाह उनके परिवार वाले और मां भी बनीं, जो उन्हें पहली बार देश के लिए खेलता देखने स्टेडियम पहुंचे थे।

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