पाकिस्तानी क्रिकेट को लेकर विवादों का सिलसिला नया नहीं है, लेकिन अब पूर्व सरकारी अधिकारी के एक इंटरव्यू में किए गए गंभीर दावों ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पूर्व अंडर सेक्रेटरी रहे आर.वी.एस. मणि ने एक पॉडकास्ट में आरोप लगाया कि भारत दौरे पर आने वाले कुछ पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडलों और क्रिकेटरों का इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी के लिए किया जाता था।
हालांकि, ये दावे पूर्व अधिकारी के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ के नाम का जिक्र
ANI के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान मणि ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लेते हुए दावा किया कि कुछ मौकों पर खिलाड़ियों के पास ड्रग्स पाए जाने की बात सामने आई थी। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में पाकिस्तानी हाई कमीशन के जरिए खिलाड़ियों को वापस भेजे जाने की कार्रवाई हुई थी।
मणि ने यह भी दावा किया कि इन घटनाओं को निजी इस्तेमाल से जोड़कर पेश किया गया। उन्होंने पाकिस्तान के कुछ अन्य चर्चित क्रिकेटरों के नामों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि ड्रग्स की तस्करी का नेटवर्क क्रिकेट से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा हुआ था।
बॉब वूल्मर की मौत को लेकर भी किया बड़ा दावा
पूर्व सरकारी अधिकारी ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तत्कालीन कोच बॉब वूल्मर की मार्च 2007 में हुई मौत को लेकर भी गंभीर दावा किया। उन्होंने संकेत दिया कि वूल्मर कथित ड्रग तस्करी के खिलाफ थे और इसी वजह से उनकी मौत को इस पूरे मामले से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
हालांकि, बॉब वूल्मर की मौत को लेकर कई तरह की चर्चाएं और जांच पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इसे ड्रग तस्करी से जोड़ने वाला दावा इस इंटरव्यू में मणि की ओर से किया गया है। इसे स्थापित तथ्य मानने से पहले विश्वसनीय जांच रिकॉर्ड और आधिकारिक निष्कर्षों को देखना जरूरी है।
ड्रग्स और आतंकवाद की फंडिंग का भी दावा
मणि ने अपने इंटरव्यू में ड्रग तस्करी और आतंकवाद की फंडिंग के बीच कथित संबंध का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, उस दौर में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के आकलन में ड्रग्स के कारोबार से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को वित्तीय मदद देने में किया जाता था।
उन्होंने अफगानिस्तान में अफीम की पैदावार और भारत में संभावित आतंकी गतिविधियों के बीच कथित संबंध का उदाहरण भी दिया।
दावों ने खड़े किए कई सवाल
आर.वी.एस. मणि के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इन दावों को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, इतने गंभीर आरोपों को लेकर यह समझना जरूरी है कि किसी इंटरव्यू में किया गया दावा अपने आप में न्यायिक या आधिकारिक रूप से साबित तथ्य नहीं होता।
ऐसे मामलों में संबंधित जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड, अदालत के दस्तावेज और आधिकारिक रिपोर्ट ही आरोपों की वास्तविकता का आकलन करने का आधार बन सकते हैं। फिलहाल मणि के इन दावों ने पाकिस्तान क्रिकेट और भारत-पाक संबंधों से जुड़े पुराने विवादों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।