पॉवेल और रदरफोर्ड पर ICC की कार्रवाई, बदसलूकी पड़ी भारी

नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने वेस्टइंडीज के दो खिलाड़ियों  और शेरफेन रदरफोर्ड के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। दोनों खिलाड़ियों ने भारत के खिलाफ रांची में खेले गए दूसरे टी20 मैच के दौरान आईसीसी के नियमों का उल्लंघन किया था।

इसके बाद क्रिकेट की शीर्ष संस्था ने उन्हें फटकार लगाई और दोनों को एक-एक डिमेरिट प्वाइंट दिया। खिलाड़ियों ने मैच अधिकारियों के सामने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी। पॉवेल को आचार संहिता के आर्टिकल 2.2, जबकि रदरफोर्ड को आर्टिकल 2.8 के तहत दोषी पाया गया।

यह कार्रवाई भारत और वेस्टइंडीज के बीच रांची में हुए दूसरे टी20 मुकाबले से जुड़ी है। मैच के दौरान दोनों खिलाड़ियों के व्यवहार को आईसीसी की आचार संहिता का उल्लंघन माना गया। हालांकि, पॉवेल और रदरफोर्ड के मामले अलग-अलग प्रावधानों के तहत दर्ज हुए हैं। पॉवेल पर आर्टिकल 2.2 लागू किया गया, जबकि रदरफोर्ड का उल्लंघन आर्टिकल 2.8 के अंतर्गत माना गया। दोनों के खिलाफ घोषित कार्रवाई में फटकार और एक-एक डिमेरिट प्वाइंट शामिल हैं।

सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों खिलाड़ियों ने मैच अधिकारियों के समक्ष अपनी गलती मान ली। इसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाया गया। गलती स्वीकार किए जाने का तथ्य इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में खिलाड़ियों के अलग-अलग बयान या उनकी ओर से दिए गए स्पष्टीकरण का पूरा पाठ शामिल नहीं है। इसलिए उन्होंने घटना के बारे में क्या कहा और अपने व्यवहार के पीछे क्या वजह बताई, इसका अतिरिक्त विवरण नहीं जोड़ा जा सकता।

रोवमैन पॉवेल को आईसीसी के कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.2 के तहत दोषी पाया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई दूसरे टी20 मैच के दौरान हुए उल्लंघन के कारण की गई है। साझा जानकारी में घटना का सटीक समय, संबंधित ओवर या मैदान पर हुई गतिविधि का विस्तृत वर्णन नहीं है। इसलिए किसी विशेष शॉट, विकेट या मैच के परिणाम से उनकी कार्रवाई को जोड़ना उचित नहीं होगा। फिलहाल स्पष्ट तथ्य उनका दोषी पाया जाना और घोषित अनुशासनात्मक कार्रवाई है।

शेरफेन रदरफोर्ड का मामला आचार संहिता के आर्टिकल 2.8 से संबंधित है। उन्हें भी फटकार के साथ एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया है। हालांकि, उनके उल्लंघन की पूरी परिस्थितियां उपलब्ध विवरण में नहीं बताई गई हैं। किसी मैच अधिकारी के साथ हुई बातचीत, किसी निर्णय पर प्रतिक्रिया या मैदान में कहे गए शब्दों का उल्लेख नहीं है। ऐसे में रदरफोर्ड की घटना का दृश्य या संवाद अनुमान से प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ समान कार्रवाई घोषित हुई है, लेकिन उल्लंघन अलग-अलग आर्टिकल के तहत माना गया है। यह अंतर खबर में स्पष्ट रखना जरूरी है। पॉवेल और रदरफोर्ड को एक ही घटना में शामिल बताने का आधार उपलब्ध नहीं है। साझा विवरण केवल यह बताता है कि दोनों ने रांची के दूसरे टी20 मैच में नियमों का  किया। उनकी घटनाएं किस समय हुईं और क्या उनका एक-दूसरे से कोई संबंध था, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

फटकार और डिमेरिट प्वाइंट की जानकारी के साथ किसी आर्थिक जुर्माने का उल्लेख नहीं है। मैच फीस में कटौती या किसी निश्चित रकम का दंड साझा विवरण में शामिल नहीं किया गया है। इसलिए कार्रवाई को जुर्माने के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। इसी तरह दोनों खिलाड़ियों को किसी मैच से निलंबित किए जाने की जानकारी भी नहीं दी गई है। उपलब्ध घोषणा के आधार पर केवल फटकार और एक-एक डिमेरिट प्वाइंट का उल्लेख किया जा सकता है।

पॉवेल और रदरफोर्ड के पहले के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड का ब्योरा भी सामने नहीं है। दोनों के खाते में पहले से कितने डिमेरिट प्वाइंट थे या यह उनका पहला उल्लंघन है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए नए प्वाइंट को जोड़कर उनकी कुल संख्या का दावा नहीं किया जा सकता। फिलहाल इस मुकाबले से संबंधित कार्रवाई में प्रत्येक खिलाड़ी को एक डिमेरिट प्वाइंट मिलने की पुष्टि है। आगे किसी दंड की संभावना पर भी उपलब्ध विवरण से निष्कर्ष नहीं निकलता।

रांची में खेले गए दूसरे टी20 मैच का परिणाम, दोनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन और  के अन्य आंकड़े साझा सामग्री में शामिल नहीं हैं। इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की खबर को किसी टीम की जीत या हार से जोड़कर नहीं बताया जा सकता। मैच अधिकारियों के नाम और कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट का उल्लेख भी नहीं है। खबर का केंद्र मैदान पर आचार संहिता के उल्लंघन और उसके बाद आईसीसी द्वारा उठाए गए कदम हैं।

भारत के खिलाफ दूसरे टी20 के दौरान हुए उल्लंघनों पर आईसीसी ने वेस्टइंडीज के दोनों खिलाड़ियों को फटकार लगाई है। रोवमैन पॉवेल को आर्टिकल 2.2 और शेरफेन रदरफोर्ड को आर्टिकल 2.8 के तहत दोषी पाया गया। दोनों ने मैच अधिकारियों के सामने गलती स्वीकार की और उन्हें एक-एक डिमेरिट प्वाइंट दिया गया। घटना की विस्तृत परिस्थितियों, किसी अतिरिक्त दंड या पहले के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए घोषित कार्रवाई को इन्हीं पुष्ट जानकारियों तक सीमित रखा जाना चाहिए।

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