नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम ने रणजी ट्राफी सत्र से पहले अपनी तैयारियों को मजबूत करते हुए प्रतिष्ठित कैप्टन थिम्पिआह स्मृति टूर्नामेंट में लगातार दूसरे साल ट्राफी जीती।
फाइनल में मध्य प्रदेश ने आंध्र प्रदेश की टीम को पांच विकेट से हराया। मध्य प्रदेश की टीम की जीत कई मायनों में खास रही क्योंकि टीम में कप्तान रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर सहित नौ अनुभवी खिलाड़ी मौजूद नहीं थे।
फिर पहली पारी में आंध्र प्रदेश ने 525 रनों का विशाल स्कोर बनाते हुए मप्र के खिलाफ करीब 200 रनों की बढ़त हासिल कर ली थी। मध्य प्रदेश को जीत के लिए 78 ओवर में 390 रन बनाने की चुनौती थी। टीम ने टी-20 अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 63.5 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा बेंगलुरू में खेले गए इस टूर्नामेंट में देशभर की टीमों ने हिस्सा लिया था।
अक्षय शर्मा का अहम योगदान
इसे रणजी ट्राफी सत्र से पहले तैयारियों के लिए सबसे सम्मानित टूर्नामेंट माना जाता है। फाइनल में आंध्र प्रदेश ने पहली पारी में छह विकेट पर 525 रन बनाए थे, जिसके जवाब में मध्य प्रदेश ने पहली पारी नौ विकेट पर 326 रन बनाकर घोषित की थी। दूसरी पारी में आंध्र प्रदेश की बल्लेबाजी खराब रही। पूरी टीम 51.3 ओवर में 190 रनों पर सिमट गई। इसमें युवा तेज गेंदबाज अक्षय शर्मा का अहम योगदान रहा, जिन्होंने 11 ओवर में पांच बल्लेबाजों को आउट किया।
हर्ष गवली ने 122 रन बनाए
दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा करने उतरी मध्य प्रदेश टीम ने टी-20 अंदाज में बल्लेबाजी की। कप्तान हर्ष गवली ने 110 गेंदों पर 122 रन बनाए। इसमें 12 चौके और एक छक्का शामिल था। वहीं युवा अथर्व महाजन ने 131 गेंदों पर 140 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली। पारी के दौरान उन्होंने पांच छक्के और 12 चौके लगाए। निचलेक्रम में शिवांग कुमार ने भी 51 गेंदों पर 48 रनों का योगदान दिया। उनकी पारी में भी एक छक्का और छह चौके शामिल थे।
1999 के रणजी फाइनल को याद कर डर गए थे कोच
मध्य प्रदेश टीम के कोच चंद्रकांत पंडित ने मैच के बाद कहा कि पहली पारी में करीब 200 रनों से पिछड़ने के बाद जीत की उम्मीद कम ही थी। मगर हमने हौसला बनाए रखा और खिलाड़ियों ने भी योजना को मैदान पर क्रियांवित किया। पंडित ने कहा- चौथी पारी में बल्लेबाजी कठिन होती है, फिर लक्ष्य भी बहुत बड़ा था। सुबह हमने तय किया था कि जीत के लिए प्रयास करेंगे।
मैच को हमने 20-20 ओवर के स्लाट में बांटते हुए हर स्लाट में 120 रन बनाने का लक्ष्य रखा। योजना बनाना अलग बात है, लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों को खेलना होता है। खुशी की बात है कि बच्चों ने बढ़िया बल्लेबाजी की। हर्ष गवली ने दोनों पारियों ने शतक लगाया। दूसरी पारी में अथर्व महाजन ने भी उनका अच्छा साथ दिया। इसके बावजूद जब 45 रन चाहिए थे तो अचानक तीन विकेट गिर गए।
काफी ओवर शेष थे, लेकिन मेरे दिमाग में 1999 के रणजी ट्राफी फाइनल का दृश्य सामने आ गया। तब भी मैच बेंगलुरू में था और हम ऐसे ही जीता हुआ मैच गंवा बैठे थे। उस मैच में मैं ही मप्र का कप्तान था। मगर इस बार हम मैच जीते। अक्षय शर्मा ने भी सुबह बढ़िया गेंदबाजी करते हुए चार विकेट लिए, वरना आंध्र प्रदेश यदि 15 ओवर खेलती तो हमारे लिए मुश्किल होता।