भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला श्रेयस अय्यर के लिए खास होने वाला है. बुधवार को राजकोट में खेले जाने वाले मैच में भारतीय उपकप्तान श्रेयस अय्यर के पास इतिहास रचने का बड़ा मौका है.
अय्यर अपने वनडे करियर के 3,000 रन पूरे करने से सिर्फ 34 रन दूर हैं. अगर वह यह आंकड़ा छू लेते हैं, तो वह ऐसा कारनामा कर दिखाएंगे, जो उनसे पहले कई दिग्गज भारतीय बल्लेबाज नहीं कर पाए हैं.
सबसे तेज 3000 वनडे रन बनाने का मौका
श्रेयस अय्यर ने अब तक 68 वनडे पारियों में 2,966 रन बनाए हैं. अगर वह दूसरे वनडे में 34 रन बना लेते हैं, तो वह महज 69 पारियों में 3,000 रन पूरे कर लेंगे. इसके साथ ही वह भारत की ओर से सबसे कम पारियों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे. अभी यह रिकॉर्ड शिखर धवन के नाम है, जिन्होंने 72 पारियों में 3,000 रन पूरे किए थे. विराट कोहली को इस मुकाम तक पहुंचने में 75 पारियां लगी थीं, जबकि रोहित शर्मा और सचिन तेंदुलकर भी इस सूची में उनसे पीछे हैं.
सबसे कम पारियों में 3000 वनडे रन पूरे करने वाले भारतीय बल्लेबाज
शिखर धवन – 72 मैच
विराट कोहली – 75 मैच
केएल राहुल – 78 मैच
नवजोत सिंह सिद्धू – 79 मैच
सौरव गांगुली- 82 मैच
वर्ल्ड क्रिकेट में भी खास जगह
श्रेयस अय्यर का यह रिकॉर्ड सिर्फ भारतीय क्रिकेट तक सीमित नहीं रहेगा. 69 पारियों में 3000 रन पूरे करने के साथ वह वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विव रिचर्ड्स की बराबरी भी कर लेंगे. उनसे आगे सिर्फ हाशिम अमला, शाई होप और फखर जमान जैसे नाम हैं. यह आंकड़ा अय्यर की निरंतरता और मैच जिताने की क्षमता को दर्शाता है.
चोट से वापसी के बाद शानदार लय
श्रेयस अय्यर ने 2017 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया था. करियर के दौरान वह कई बार चोट और टीम चयन के कारण बाहर भी हुए, लेकिन हर बार उन्होंने वापसी कर खुद को साबित किया. हाल ही में चोट से उबरने के बाद उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में शानदार प्रदर्शन किया. टूर्नामेंट में उन्होंने अहम पारियां खेलीं और इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में भी 49 रन की उपयोगी पारी खेली.
दूसरे वनडे में सबकी नजरें अय्यर पर
राजकोट में होने वाले मुकाबले में श्रेयस अय्यर पर सभी की निगाहें होंगी. मौजूदा फॉर्म को देखते हुए 34 रन बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती नहीं लगती. अगर वह यह कारनामा कर लेते हैं, तो न सिर्फ टीम इंडिया को मजबूती मिलेगी, बल्कि उनका नाम भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो जाएगा.