ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और वर्ल्ड कप विजेता कप्तान स्टीव वॉ ने वैभव सूर्यवंशी को बेहद असाधारण प्रतिभा करार दिया है। उनका मानना है कि 15 वर्षीय ओपनर में व्हाइट-बॉल में ही नहीं बल्कि रेड-बॉल क्रिकेट में भी धमाल मचाने का मद्दा है।
उन्होंने तो यहां कह दिया कि सूर्यवंशी में डेब्यू टेस्ट में शतक लगाने का दम है। वॉ ने भले ही सूर्यवंशी की शान में कसीदा पढ़ा लेकिन उन्हें लगता है कि युवा बल्लेबाज को अभी रेड-बॉल क्रिकेट में और अधिक अनुभवी हासिल करने की जरूरत है। सूर्यवंशी ने जुलाई 2026 में इंटरनेशनल डेब्यू किया था। उन्होंने अब तक छह T20I मैचों में 193 रन बनाए हैं, जिसमें 189.21 का स्ट्राइक रेट रहा। उन्होंने आईपीएल 2026 में 776 रन बनाने के बाद टीम इंडिया में एंट्री मिली थी। वह भारत की ओर से इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले सबसे उम्र के क्रिकेटर हैं।
क्या सूर्यवंशी को लेकर भारत ऐसा करेगा?
स्टीव वॉ ने स्टार स्पोर्ट्स पर कहा, ”वैभव सूर्यवंशी एक असाधारण टैलेंट है। वह टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए पर्याप्त अच्छा होगा। मुझे इसमें कोई शक नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारत उसे इतनी कम उम्र में मौका देने के लिए तैयार है। ऐसा कोई कारण नहीं है कि वह अपने पहले टेस्ट मैच में शतक नहीं लगा सके। सूर्यवंशी में उस लेवल का टैलेंट है। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट उसके लिए अलग होगा। इसमें उसके सामने अलग तरह की चुनौतियां होंगी। गेंदबाजों के पास चीजें अलग तरीके से करने की अधिक गुंजाइश होती है। मैं चाहूंगा कि उनके पास और ज्यादा फर्स्ट क्लास क्रिकेट का एक्पीरियंस हो। आप उसे तीन या चार दिन के क्रिकेट का पर्याप्त अनुभव दिए बिना सीधे टेस्ट क्रिकेट में नहीं उतारना चाहेंगे।”
सूर्यवंशी ने कितने फर्स्ट क्लास मैच खेले?
सूर्यवंशी के पास अभी तक सिर्फ 9 फर्स्ट क्लास मैचों का अनुभव है। उन्होंने इस दौरान 215 रन बनाए, जिसमें 16.53 का औसत रहा। वह फिलहाल दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन के लिए खेल रहे हैं, जो भारत का घरेलू रेड-बॉल टूर्नामेंट है। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 6 गेंदों में 8 रन बनाए। ईस्ट जोन ने यह मैच एक पारी और 210 रनों से जीता। वहीं, भारत के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ ने सूर्यवंशी के प्रति धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने जियो हॉटस्टार से कहा, ”वैभव के मामले में आपको धैर्य रखना होगा। वह अभी सिर्फ 15 साल का है। मैंने उस बच्चे को जितना देखा है, उससे मुझे कोई संदेह नहीं है कि अगर उसे घरेलू क्रिकेट में कुछ सत्र लाल गेंद से क्रिकेट खेलने का मौका मिले, तो वह टेस्ट टीम में जगह बनाने में सफल रहेगा।”