Shivam Dubey: रोज डेढ़ घंटे तक तेल मालिश की, अब शिवम दुबे ने दिया अपना टी20 वर्ल्ड कप मेडल

Shivam Dubey T20 World Cup Medal: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने में संजू सैमसन और जसप्रीत बुमराह का तो हाथ है ही साथ ही एक ऐसा खिलाड़ी भी इस जीत का हीरो है जिसने अहम मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया को जीत दिलाई. बात हो रही है शिवम दुबे की जिन्होंने मुश्किल मौकों पर बतौर फिनिशर बेहतरीन पारियां खेली जिसके दम पर भारत लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीता. शिवम दुबे अब वर्ल्ड चैंपियन बनकर घर लौट आए हैं और इस खिलाड़ी ने अपना टी20 वर्ल्ड कप बेहद खास शख्स को दे दिया है. ये शख्स इतना खास है कि उन्हें क्रिकेटर बनाने में सबसे बड़ा योगदान इसी शख्स का है. इसी शख्स ने शिवम दुबे की रोजाना तेल मालिश की ताकि वो कठोर ट्रेनिंग से रिकवर कर पाएं. दुबे के शरीर पर तेल मालिश करने वाला कोई और नहीं बल्कि उनके पिता राजेश दुबे हैं जिन्होंने अपना बिजनेस डूबने के बावजूद बेटे को टीम इंडिया तक पहुंचाया.

शिवम दुबे ने पिता को दिया मेडल

शिवम दुबे ने पिता को मेडल पहनाते हुए कुछ तस्वीरें पोस्ट की. उसपर उन्होंने लिखा कि ये ही मेरे जीवन के असली हीरो हैं. बता दें राजेश दुबे यूपी के भदोही जिले के हैं और वो काम की तलाश में मुंबई पहुंचे थे. वो पहले डेयरी फार्म का बिजनेस करते थे और बाद में उन्होंने जींस वॉशिंग की फैक्ट्री शुरू की थी. लेकिन बेटे शिवम का करियर बनाने के लिए उन्होंने पूरा बिजने लीज पर दे दिया. शिवम जब महज 6 साल के थे तो पिता राजेश दुबे ने उनके टैलेंट के बारे में जाना. ये खिलाड़ी छोटी सी उम्र में लंबे-लंबे छक्के लगा रहा था और इसके बाद राजेश ने उन्हें क्रिकेटर बनाने की ठान ली.

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घर पर शुरू हुई ट्रेनिंग

राजेश दुबे ने घर के पीछे ही टर्फ पिच बनाई. सुबह शाम घंटों प्रैक्टिस कराई. वो रोज अपने बेटे को 500 गेंद फेंकते थे और ये सिलसिला 10 साल तक चलता रहा. शिवम महज 6 साल की उम्र से ही मुंबई में चंद्रकांत पंडित क्रिकेट एकेडमी में जाते थे, बाद में उन्हें सतीश सामंत ने ट्रेनिंग दी. दुबे को प्रैक्टिस के बाद थकान होती थी और इसे मिटाने के लिए उनके पिता रोजाना उनकी सरसों के तेल से मालिश करते थे. शिवम जब 14 साल के थे तो उनके पिता का बिजनेस ठप हो गया था और परिवार पर भारी कर्ज आ गया. इसके चलते शिवम दुबे का क्रिकेट खेलना 5 सालों तक बंद रहा. शिवम दुबे का वजन 110 किलो हो गया और वो डिप्रेशन में चले गए. लेकिन राजेश दुबे ने हार नहीं मानी और बेटे को एक साल में 75 किलो तक कर दिया. फिर से घर पर 8 घंटे प्रैक्टिस शुरू की गई और आज नतीजा सबके सामने है. यही वजह है कि शिवम अपने पिता को सबसे बड़ा हीरो मानते हैं. शिवम दुबे एक नहीं दो-दो टी20 वर्ल्ड कप जिता चुके हैं. यकीनन इस जीत में उनके पिता का भी योगदान है.