वाराणसी के सिगरा स्टेडियम के इंडोर कोर्ट पर रविवार (11 जनवरी) को आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का महिला फाइनल ऐतिहासिक बन गया. महिला वर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबले में केरला ने रेलवे को हराकर चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया. वहीं पुरुष वर्ग में रेलवे के स्मैशर्स ने केरला की चुनौती को ध्वस्त कर खिताब पर कब्जा जमाया.
महिला वर्ग में रेलवे और पुरुष वर्ग में केरल उपविजेता रहे. जबकि हार्ड लाइन मैच में पंजाब और राजस्थान की टीमों का रहा दबदबा रहा. नगर निगम की ओर से अयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर अशोक कुमार तिवारी और उत्तर प्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने शिरकत की. इस दौरान विजेता टीमों को ट्रॉफी और पदक प्रदान किए.
रेलवे ने केरला को 3-0 से रौंदकर खिताब पर जमाया कब्जा
रेलवे की पुरुष टीम ने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए फाइनल मुकाबले में केरला को सीधे सेटों में 3-0 (25-19, 25-17, 25-19) से पराजित कर चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली.पूरे मैच के दौरान रेलवे के खिलाड़ियों ने तालमेल और आक्रामक खेल का ऐसा नमूना पेश किया कि केरला की टीम एक बार भी मैच में वापसी नहीं कर सकी.
रेलवे के कप्तान अंगामुथु ने टीम की कमान संभालते हुए शुरुआती सेट से ही केरला पर मानसिक दबाव बनाया. उनके पावरफुल स्मैश मैच का टर्निंग पॉइंट रहे. रोहित कुमार ने शानदार खेल कौशल दिखाते हुए अंक जुटाए और टीम के आक्रमण को धार दी. जॉर्ज एंटनी नेट पर अपनी लंबाई और टाइमिंग का फायदा उठाते हुए केरला के हमलों को नाकाम किया. टीम के बाकी खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया.
उप-विजेता रही केरला की टीम ने वापसी की कोशिश की, लेकिन लय नहीं पकड़ सकी. केरला के सेथु टी.आर. ने कप्तान के तौर पर संघर्ष किया और अपनी टीम के लिए प्रमुख स्कोरर रहे.एरीन वर्गीस ने रेलवे के ब्लॉकर्स को छकाकर कुछ अच्छे अंक हासिल किए. वहीं मुजीब एम.सी. व राहुल के. ने तालमेल के साथ रेलवे के आक्रमण को रोकने का प्रयास किया. हालांकि टीम हार गई.
केरल की बेटियों ने भारतीय रेलवे को 3-2 से दी शिकस्त
वहीं 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप का महिला फाइनल ऐतिहासिक बन गया. इस मुकाबले में केरल की बेटियों ने अपनी प्रतिद्वंद्वी भारतीय रेलवे को 3-2 से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम कर लिया. पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करने वाली केरल की टीम ने निर्णायक सेट में रेलवे को कोई मौका नहीं दिया.
मुकाबले की शुरुआत रेलवे के पक्ष में रही, जहां उन्होंने पहला सेट 25-22 से जीता. इसके बाद केरल ने जोरदार पलटवार किया और लगातार दो सेट 25-20 और 25-15 से जीतकर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. चौथे सेट में रेलवे ने फिर वापसी की और 25-22 से जीतकर मैच को निर्णायक पांचवें सेट में धकेल दिया. हालांकि, अंतिम सेट में केरल के दमदार स्मैश और डिफेंस के आगे रेलवे बेबस दिखी और केरल ने 15-8 से सेट जीतकर चैंपियनशिप की ट्रॉफी उठा ली.
केरल की इस खिताबी सफलता के पीछे टीम की एकजुटता और रणनीतिक कौशल का बड़ा हाथ रहा. टीम की जीत की मुख्य सूत्रधार रहीं अनुश्री ने अपनी कलाई के जादू और आक्रामक स्मैश से रेलवे के डिफेंस को पस्त कर दिया. हर निर्णायक मोड़ पर अनुश्री के सटीक प्रहारों ने केरल की झोली में अंक डाले. वहीं, डिफेंस की कमान शिवप्रिया जी. ने संभाली थी.लिबरो की भूमिका में शिवप्रिया ने मैदान पर गजब की फुर्ती दिखाते हुए रेलवे के तेज तर्रार हमलों को न सिर्फ रोका, बल्कि उन्हें काउंटर अटैक में तब्दील करने का मौका भी बनाया. नेट पर अनघा आर. एक अभेद्य दीवार की तरह खड़ी रहीं. उनकी शानदार ब्लॉकिंग के कारण रेलवे की अनुभवी खिलाड़ी भी अंक चुराने के लिए संघर्ष करती दिखीं. खेल के बीच के ओवरों में जब मैच फंसता नजर आया, तब नंदना वी. और अन्ना मैथ्यू ने अपने अनुभव का परिचय दिया.
अंत में बिखर गया रेलवे का तालमेल
भारतीय रेलवे जैसी मजबूत टीम का फाइनल में हारना खेल प्रेमियों के लिए चौंकाने वाला रहा. मैच जब पांचवें और निर्णायक सेट में पहुंचा, तो रेलवे की टीम दबाव में बिखर गई. जहां केरल ने आक्रामकता दिखाई, वहीं रेलवे के खिलाड़ी रक्षात्मक हो गए. रेलवे की हार का सबसे बड़ा तकनीकी कारण उनका ‘फर्स्ट पास’ रहा. केरल की तेज सर्विस को रिसीव करने में रेलवे की खिलाड़ी कई बार नाकाम रहीं. इसके अलावा, चौथे सेट के बाद रेलवे ने कई महत्वपूर्ण मौकों पर सर्विस नेट में मारी या बाहर फेंकी, जिससे केरल को मुफ्त के अंक उपहार में मिले.वहीं केरल की अनुश्री के.पी. और अन्ना मैथ्यू के पावरफुल स्मैश को रोकने में रेलवे की फ्रंट लाइन असफल रही. नेट पर रेलवे के ब्लॉकर्स और डिफेंडर्स के बीच तालमेल की कमी दिखी, जिसका फायदा उठाकर केरल ने बार-बार रेलवे के खाली क्षेत्रों (डेथ जोन) में गेंद गिराई.
चैंपियनशिप के अंतिम दिन पंजाब और राजस्थान की टीमों ने अपना दबदबा कायम करते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. पुरुष वर्ग में जहां पंजाब ने सर्विसेज को धूल चटाई, वहीं महिला वर्ग में राजस्थान ने हरियाणा को पटखनी दी.पुरुष वर्ग के कड़े मुकाबले में पंजाब की टीम ने सर्विसेज को सीधे सेटों में 3-0 से करारी शिकस्त दी. इस जीत के साथ ही पंजाब ने टूर्नामेंट में तीसरा स्थान (हार्ड लाइन मैच) सुरक्षित कर लिया है. पूरे मैच के दौरान पंजाब के खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया.
शुरुआत से ही पंजाब के खिलाड़ी रहे हावी
मैच की शुरुआत से ही पंजाब के खिलाड़ी हावी रहे. पहले सेट में पंजाब ने 25-21 से जीत दर्ज कर बढ़त बनाई. दूसरे सेट में सर्विसेज ने वापसी की कोशिश की, लेकिन पंजाब के डिफेंस के आगे उनकी एक न चली और पंजाब ने यह सेट 25-23 से अपने नाम किया. तीसरे सेट में पंजाब ने पूरी तरह से खेल पर नियंत्रण रखा और 25-18 के स्कोर के साथ मैच और पदक अपने नाम कर लिया.पंजाब के लिए जसजोत सिंह और प्रीत करन ने स्मैश का शानदार प्रदर्शन किया. वहीं कुलदीप सिंह और प्रिंस ने नेट पर मजबूत दीवार खड़ी की.
दूसरी ओर सर्विसेज की ओर से विक्रम और शिखर सिंह ने कई मौकों पर अंक बटोरकर टीम को वापस लाने की कोशिश की. नरेश कुमार और चिराग एस. कुमार का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा. डिफेंस की जिम्मेदारी लिबरो रोहन एंथोनी ने बखूबी संभाली, लेकिन वे पंजाब की आंधी को रोकने में नाकाम रहे.
राजस्थान की हरियाणा पर शानदार जीत
महिला वर्ग के हार्डलाइन मुकाबले में राजस्थान की टीम ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए हरियाणा को 3-1 से पराजित कर टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल किया. पूरे मैच के दौरान राजस्थान की खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया और हरियाणा को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया.
राजस्थान ने मैच की शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा. शुरुआती दो सेटों में राजस्थान ने हरियाणा को एकतरफा अंदाज में 25-14 और 25-12 से शिकस्त दी, हालांकि, तीसरे सेट में हरियाणा ने वापसी की कोशिश की और 20-25 से सेट अपने नाम किया, लेकिन चौथे सेट में राजस्थान ने फिर से लय पकड़ी और 25-14 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया. राजस्थान टीम की गुंजन रानी मुख्य सूत्रधार रहीं, उनके सटीक पास और तालमेल ने हरियाणा के डिफेंस को पस्त कर दिया। आयुषी भंडारी और रितु बिजारणिया ने नेट पर दीवार की तरह काम किया और स्मैश के जरिए अंक बटोरे.
उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य ब्रजेश पाठक, स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, एमएलसी धर्मेन्द्र राय, वरिष्ठ पत्रकार हेंमत शर्मा, गुजरात के पूर्व विधायक जगदीश पटेल, बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. पंजाब सिंह, पूर्व महापौर कोशलेंद्र सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिथियों और नगर निगम के अधिकारियों और खेल जगत की हस्तियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया.
काशी ने पहली बार मेजबानी कर रचा इतिहास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’ अभियान से प्रेरित नगर निगम ने धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप आयोजित कर एक नया इतिहास रच दिया है. 4 जनवरी को प्रधानमंत्री ने इसका वर्चुअल शुभारंभ किया था. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भौतिक रूप से स्टेडिएम में आकर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया था.
आयोजन समिति के अध्यक्ष व महापौर अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश को 42 साल के लंबे इंतजार के बाद इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता की मेजबानी का अवसर मिला है. इससे पहले साल 1984 में कानपुर ने सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप की सफल मेजबानी की थी. तब से लेकर अब तक प्रदेश के खेल प्रेमी इस बड़े आयोजन की राह देख रहे थे. खास बात यह है कि वाराणसी ही नहीं पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में पहली बार राष्ट्रीय स्तर वॉलीबॉल आयोजित हुआ. दशकों बाद यूपी में हुए इस आयोजन से न केवल स्थानीय खिलाड़ियों में नया जोश भरा, बल्कि काशी के खेल बुनियादी ढांचे को भी नई पहचान दी है.
एक नजर में चैंपियनशिप
30 राज्यों का प्रतिनिधित्व
06 केंद्र शासित प्रदेश
1044 खिलाड़ी
30 टीमें पुरुष वर्ग में
28 टीमें महिला वर्ग में
100 मैच रेफरी
60 भारतीय वॉलीबॉल संघ के अधिकारी व चयनकर्ता
200 वालंटियर्स की मदद से आयोजन सम्पन्न
रिपोर्ट/ शैलेश चौरसिया