मगर घरेलू क्रिकेट में भी यही हाल दिख रहा है, जहां बिहार को वैभव की कमी खल रही है. रणजी ट्रॉफी में ये साफ नजर आया, जब मणिपुर जैसी छोटी टीम के खिलाफ भी बिहार बुरी तरह संघर्ष करती दिखी. ऐसे वक्त में टीम के कप्तान साकिबुल गनी ने 7वें नंबर पर आकर टीम को संभाला और एक शानदार शतक जमा दिया.
22 जनवरी से रणजी ट्रॉफी का दूसरा फेज शुरू हुआ, जिसमें प्लेट ग्रुप के फाइनल में बिहार का सामना मणिपुर से था. पहले बल्लेबाजी कर रही बिहार की बैटिंग लाइन-अप बुरी तरह तहस-नहस हो गई. मैच के पहले ही दिन मणिपुर के गेंदबाजों ने सिर्फ 79 रन पर बिहार की आधी टीम को पवेलियन लौटा दिया था. पांच विकेट जल्दी गिरने के बाद सातवें नंबर पर आए कप्तान साकिबुल ने आकाश राज के साथ मिलकर पारी को संभाला और दोनों ने 119 रन की साझेदारी कर टीम को 200 रन के करीब पहुंचाया.
आकाश के आउट होने के बाद साकिबुल को साथ मिला 8वें नंबर के बल्लेबाज बिपिन सौरभ का. दोनों ने टीम को 280 रन के पार पहुंचाया. इस दौरान बिहार के कप्तान ने अपना शानदार शतक भी पूरा किया. ये साकिबुल के फर्स्ट क्लास करियर का छठा शतक था. इस तरह उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी से चली आ रही अच्छी फॉर्म को भुनाते हुए टीम को मुश्किल हालातों से बाहर निकाला. हालांकि वो 108 रन बनाकर आउट हुए लेकिन तब तक टीम के 283 रन हो गए थे और वो बेहतर स्थिति में थी.
वहीं मैच के पहले दिन 75 रन पर नाबाद लौटे बिपिन सौरभ ने अगले दिन के पहले सेशन में ही अपना शतक पूरा कर लिया. 26 साल के विकेटकीपर-बल्लेबाज का ये पांचवां फर्स्ट क्लास शतकस है. इन दोनों की पारियों ने फाइनल में बिहार को 400 रनों के पार ले जाकर मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया. आपको बता दें कि इस मैच को जीतना दोनों टीम के लिए जरूरी है, क्योंकि यहां जीतने वाली टीम को रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप में प्रमोशन मिलेगा और साथ ही वो टीम क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर खिताब के लिए दावेदारी पेश कर पाएगी.