आईपीएल को इसका नया युवा स्टार मिल गया है. वैभव सूर्यवंशी तो पहले ही स्टार बन गए हैं लेकिन आईपीएल 2026 में एक और नया युवा सितारा उभर कर आया है. नाम है मुकुल चौधरी. वैसे तो मुकुल की उम्र वैभव जितनी नहीं है लेकिन ज्यादा भी नहीं है. सिर्फ 21 साल के इस युवा बल्लेबाज ने एक ही मैच से अपना नाम हर किसी की जुबान पर पहुंचा दिया है. लखनऊ सुपर जायंट्स के इस खिलाड़ी ने बिल्कुल उसी अंदाज में अपनी पहचान बनाई, जिसके वो बचपन में फैन हो गए थे- हेलीकॉप्टर शॉट, मैच फिनिशर और एमएस धोनी.
कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मैच में लखनऊ सुपर जायंट्स की हार तय नजर आ रही थी. आखिरी 4 ओवर में टीम को जीत के लिए 52 रन चाहिए थे, जबकि 3 विकेट ही बचे थे. इसमें से एक थे दाएं हाथ के बल्लेबाज मुकुलचौधरी , जिनका IPL करियर में ये सिर्फ तीसरा ही मैच था. मुकुल तो 13वें ओवर में ही क्रीज पर आ गए थे लेकिन शुरुआती 8 गेंदों में वो सिर्फ 2 रन बना सके थे. मगर जैसे ही उनके बल्ले से पहला चौका निकला, फिर तो उन्हें कोई नहीं रोक सका.
मुकुल, हेलीकॉप्टर शॉट और मैच फिनिशर
मुकुल ने आखिरी 4 ओवर में टीम को जरूरी 54 रन तक पहुंचाकर ही दम लिया, जिसमें 52 रन खुद उनके बल्ले से निकले थे. अपनी पारी में मुकुल ने कुल 7 शानदार छक्के लगाए लेकिन इसमें पहला ही छक्का सबसे खास था. 17वें ओवर की चौथी गेंद पर उन्होंने धोनी का मशहूर ‘हेलीकॉप्टर शॉट’ जमाते हुए छक्का ठोक दिया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. मगर सिर्फ एक शॉट ही नहीं, बल्कि मुकुल ने पूरी पारी अपने हीरो और आदर्श धोनी के अंदाज में ही खेली और उन्हीं के अंदाज में आखिरी ओवर में टीम के लिए ‘मैच फिनिश’ करके ही दम लिया.
एमएस धोनी की तरह मैच फिनिश करने का उनका ये सपना IPL पूरा तो 21 साल की उम्र में हुआ लेकिन इसे वो तब से ही देख रहे थे, जब सिर्फ 6 साल के थे. आईपीएल ऑक्शन में जब LSG ने उन पर 2.60 करोड़ रुपये खर्च किए थे तो हर कोई हैरान था. उसके बाद ईएसपीएन-क्रिकइंफो के एक इंटरव्यू में मुकुल ने खुलासा किया था कि 2011 वर्ल्ड कप में धोनी का लगाया छक्का ही उनके लिए खास था, तब से ही धोनी उनके आदर्श थे.
जो 6 साल की उम्र में देखा, वो कर दिखाया
2004 में जन्मे मुकुल तब सिर्फ 6 साल के थे. उसके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा था, “मैं हमेशा एमएस धोनी सर को देखता आया हूं. मैं भी कीपर हूं और उनको ही देखता आया हूं. 2011 वर्ल्ड कप का हेलीकॉप्टर शॉट हमेशा से याद है. वो मेरे रोल मॉडल हैं. वो भी फिनिशर थे और मैं भी उनकी तरह ही फिनिशर बनना चाहता हूं, गेम खत्म करना चाहता हूं.”धोनी बनना को आसान नहीं है लेकिन उनके जैसा बनने की कोशिश और उसके करीब पहुंचने की कोशिश तो की ही जा सकती है. मुकेश ने पहला ही मौका मिलने पर ऐसा करके दिखाया और फिर टीम को जिताने के बाद उन्होंने अपनी पारी को धोनी को ही समर्पित भी किया.