उनका कहना है कि पाकिस्तान सरकार और PCB ने इस फैसले से पहले कई विशेषज्ञों से सलाह ली होगी और कानूनी पहलुओं पर विचार किया होगा।
बर्नी ने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार किया, जो बांग्लादेश के समर्थन में उठाया गया कदम माना जा रहा है। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में खेलने से मना किया था, जिसके बाद उनकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया।
आर्थिक और वित्तीय असर
बर्नी ने संकेत दिया कि पाकिस्तान को इस निर्णय के लिए से वित्तीय जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है और राजस्व का नुकसान हो सकता है, जो लाखों डॉलर तक हो सकता है। उन्होंने कहा, “जहां तक सजा या नुकसान की बात है, उस एक मैच की कीमत लगभग 25 करोड़ डॉलर है। लेकिन पाकिस्तान का सालाना राजस्व 3.55 करोड़ डॉलर है, इसलिए बड़े अंतर के बावजूद वे टिक सकते हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान पिछले दो दशक से भारत के साथ द्विपक्षीय मैच नहीं खेल पाया और इसके बावजूद टी20 विश्व कप 2009 और चैंपियन्स ट्रॉफी 2017 जैसे टूर्नामेंट जीतने में सफल रहा।
बीसीसीआई के मुस्तफिजुर रहमान विवाद पर टिप्पणी
बर्नी ने BCCI द्वारा बांग्लादेश के तेज गेंदबाज को आईपीएल से बाहर करने के तरीके की आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि BCCI को इस तरह का सार्वजनिक बयान देने की जरूरत नहीं थी और इसे निजी तौर पर फ्रेंचाइजी के माध्यम से हल किया जा सकता था। बर्नी के अनुसार, “तीन जनवरी की घोषणा ने हालात को और उकसा दिया।”
दोहरे मापदंड का आरोप
पूर्व पत्रकार और PCB के मीडिया निदेशक रह चुके बर्नी ने यह भी बताया कि PCB प्रमुख मोहसिन नकवी को भारत और बांग्लादेश से जुड़े निर्णयों में दोहरे मापदंड महसूस हुए। उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव की यह भावना PCB और नकवी के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी। बर्नी का मानना है कि पाकिस्तान ने अपने फैसले के परिणामों का पूरा आकलन किया और यह निर्णय आसान नहीं था।