Asian Games 2026: जापान के आइची-नागोया में चल रहे 20वें एशियाई खेल केवल पदकों की लड़ाई नहीं रह गए हैं, ये एशियाई खेलों के इतिहास के सबसे बड़े रिकॉर्ड-उत्सवों में बदल गए हैं। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले इन खेलों में एशिया के स्थापित दिग्गजों के साथ ऐसी नई पीढ़ी सामने आई है, जिसकी उम्र कहीं 17 वर्ष है, कहीं 18 और कहीं 19 वर्ष, लेकिन प्रदर्शन विश्व स्तर का है।
29 सितंबर की शाम तक ही आयोजकों ने 317 नए रिकॉर्ड दर्ज किए थे। इनमें 53 विश्व रिकॉर्ड, 76 एशियाई रिकॉर्ड, 166 एशियाई खेल रिकॉर्ड, 11 विश्व जूनियर रिकॉर्ड और 11 एशियाई जूनियर रिकॉर्ड शामिल थे। यह संख्या अपने आप बताती है कि आइची-नागोया 2026 को भविष्य में केवल चीन के दबदबे या किसी देश की पदक संख्या के लिए नहीं, बल्कि उस एशियाड के रूप में भी याद किया जाएगा जिसमें खेलों की सीमाएँ बार-बार बदली गईं। निशानेबाजी, भारोत्तोलन, तैराकी, एथलेटिक्स, ट्रैक साइकिलिंग और तीरंदाजी में रिकॉर्डों की झड़ी लगी है।
17 साल के शिन ओहाशी ने तैराकी की असंभव मानी जा रही दीवार तोड़ी
इस एशियाड का यदि कोई एक प्रदर्शन विश्व खेल जगत में सबसे अधिक समय तक याद रखा जाएगा तो जापान के केवल 17 वर्षीय शिन ओहाशी का नाम सबसे आगे होगा। पुरुषों की 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में ओहाशी ने 2 मिनट 4.83 सेकंड का समय निकालकर विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले चीन के चिन हाईयांग के नाम 2:05.48 का विश्व रिकॉर्ड था। ओहाशी ने पुराने रिकॉर्ड से 0.65 सेकंड कम समय लिया और इस स्पर्धा में 2 मिनट 5 सेकंड से कम समय निकालने वाले दुनिया के पहले तैराक बन गए। इतनी कम उम्र में विश्व रिकॉर्ड और वह भी घरेलू दर्शकों के सामने एशियाई खेलों में, इस उपलब्धि ने ओहाशी को जापानी तैराकी के भविष्य के सबसे बड़े नामों में खड़ा कर दिया है।
ओहाशी की उपलब्धि इसलिए भी बड़ी है क्योंकि तैराकी में एक सेकंड का अंतर बहुत बड़ा होता है, यहाँ उन्होंने विश्व रिकॉर्ड को 0.65 सेकंड से सुधारा। आइची-नागोया की तैराकी प्रतियोगिता छह दिनों तक चली और इसमें नई पीढ़ी का दबदबा साफ दिखाई दिया। जापान को ओहाशी मिला तो चीन ने एक ऐसे 19 वर्षीय तैराक को दुनिया के सामने पेश किया जिसने पूरे एशियाड में पदकों की मानो अपनी अलग दुकान खोल दी।
चीन के झांग झानशुओ, अकेले सात स्वर्ण और एशियाड के महान प्रदर्शनों में जगह
चीन के झांग झानशुओ की उम्र केवल 19 वर्ष है, लेकिन आइची-नागोया में उन्होंने सात स्वर्ण पदक जीतकर स्वयं को इस एशियाड के सबसे सफल व्यक्तिगत खिलाड़ियों में शामिल कर लिया। पुरुषों की 200, 400, 800 और 1500 मीटर फ्रीस्टाइल में उन्होंने स्वर्ण जीते और इसके अलावा तीन रिले स्वर्ण पदकों में भी चीन का हिस्सा रहे। यानी चार व्यक्तिगत और तीन रिले स्वर्ण, कुल सात स्वर्ण पदक। 400 मीटर फ्रीस्टाइल में उनका 3 मिनट 41.28 सेकंड का समय नया एशियाई खेल रिकॉर्ड बना। उन्होंने 2010 ग्वांगझू एशियाड में दक्षिण कोरिया के महान तैराक पार्क ताए-ह्वान द्वारा बनाए गए पुराने रिकॉर्ड को 0.15 सेकंड से पीछे छोड़ा।
सात स्वर्ण का महत्व केवल संख्या में नहीं है। 200 मीटर से 1500 मीटर तक एक ही तैराक का श्रेष्ठ बने रहना गति और सहनशक्ति दोनों का असाधारण मेल मांगता है। झांग ने छोटी-मध्यम दूरी से लेकर लंबी फ्रीस्टाइल तक अपना दबदबा स्थापित किया और रिले में भी चीन की शक्ति बने। इसीलिए जब आइची-नागोया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की चर्चा होगी तो झांग का नाम किसी भी सूची से बाहर नहीं रखा जा सकेगा।
पुरिपोल बूनसन, एशिया को मिला नया स्प्रिंट सुपरस्टार
थाईलैंड के पुरिपोल बूनसन ने एथलेटिक्स ट्रैक पर वह किया जिसकी एशियाई स्प्रिंट में लंबे समय से प्रतीक्षा थी। पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में उन्होंने पहले सेमीफाइनल में 9.91 सेकंड दौड़कर एशियाई खेल रिकॉर्ड तोड़ा और कुछ ही समय बाद फाइनल में स्वयं अपने नए रिकॉर्ड को सुधारते हुए 9.90 सेकंड में स्वर्ण जीत लिया। यह उन्हें एशियाई इतिहास का दूसरा सबसे तेज 100 मीटर धावक बनाता है। उनसे तेज एशियाई समय केवल चीन के सु बिंगतियान के नाम है। बूनसन की जीत ने थाईलैंड का 48 वर्ष का इंतजार भी खत्म किया, क्योंकि 1978 के बाद कोई थाई धावक एशियाई खेलों की पुरुष 100 मीटर दौड़ नहीं जीत पाया था।
लेकिन बूनसन 100 मीटर जीतकर नहीं रुके। 200 मीटर में उन्होंने 19.88 सेकंड का समय निकाला और चीन के शी झेनये के एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इस तरह एक ही एशियाड में 100 मीटर 9.90 और 200 मीटर 19.88 सेकंड, दोनों में स्वर्ण। थाई एथलेटिक्स के इतिहास में पहली बार किसी धावक ने 200 मीटर में 20 सेकंड की सीमा तोड़ी। इन्हीं उपलब्धियों के कारण बूनसन को इस एशियाड के पुरुष वर्ग के सर्वाधिक मूल्यवान खिलाड़ी के सम्मान के लिए चुना गया है।
चीन की 17 वर्षीय चेन युजी, महिला फर्राटा दौड़ का नया चेहरा
पुरुषों में बूनसन की उम्र चौंकाती है तो महिलाओं की 100 मीटर में चीन की चेन युजी ने महज 17 वर्ष की उम्र में बता दिया कि अगले कई वर्षों तक उनका नाम सुनाई दे सकता है। चेन ने 11.06 सेकंड में 100 मीटर स्वर्ण जीता। यह नया एशियाई खेल रिकॉर्ड होने के साथ अंडर-20 एशियाई रिकॉर्ड भी बना। उन्होंने 200 मीटर में 22.93 सेकंड के साथ रजत जीता और चीन की 4×100 मीटर रिले सफलता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इतनी कम उम्र में 100 मीटर एशियाई खेल विजेता बनना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है।
विनफ्रेड यावी, एक एशियाड में 5000, 10000 और स्टीपलचेज़ जीतने वाली पहली खिलाड़ी
बहरीन की विनफ्रेड यावी का प्रदर्शन बिल्कुल अलग प्रकृति का रहा। गति के बजाय यहाँ सहनशक्ति और अलग-अलग लंबी दूरी की स्पर्धाओं में श्रेष्ठता का प्रश्न था। यावी ने महिलाओं की 5000 मीटर, 10000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज़, तीनों में स्वर्ण जीतकर एशियाई खेलों का नया इतिहास बना दिया। एशियाड के इतिहास में इससे पहले किसी खिलाड़ी ने एक ही संस्करण में इन तीनों स्पर्धाओं को नहीं जीता था। 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में उन्होंने 9 मिनट 4.36 सेकंड का नया एशियाई खेल रिकॉर्ड भी बनाया। यावी पहले से विश्व और ओलंपिक चैंपियन हैं, लेकिन नागोया की तिहरी जीत ने उनके करियर में एक ऐसी उपलब्धि जोड़ दी है जो एशियाई खेलों के इतिहास में अलग स्थान रखेगी।
18 साल की यान जियी, भाला 70.46 मीटर और ओलंपिक चैंपियन को पीछे छोड़ा
चीन की यान जियी भी नई पीढ़ी के उन चेहरों में हैं जिनकी उपलब्धि केवल स्वर्ण तक सीमित नहीं है। महिलाओं की भाला फेंक में उन्होंने 70.46 मीटर का एशियाई खेल रिकॉर्ड बनाया। खास बात यह रही कि उनके सामने जापान की ओलंपिक चैंपियन हारुका कितागुची थीं, जो 62.70 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। यानी 18 वर्षीय चीनी खिलाड़ी और ओलंपिक चैंपियन के बीच लगभग आठ मीटर का विशाल अंतर रहा। यान पहले से विश्व अंडर-20 रिकॉर्डधारी हैं और नागोया ने संकेत दे दिया है कि महिलाओं की विश्व भाला फेंक में आने वाले वर्षों का शक्ति-संतुलन बदल सकता है।
भारोत्तोलन में रिकॉर्डों का विस्फोट, उत्तर कोरिया की सोंग कुक ह्यांग सबसे प्रभावशाली
यदि किसी एक खेल ने आइची-नागोया में विश्व रिकॉर्डों की बाढ़ ला दी तो वह भारोत्तोलन था। अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ के अनुसार प्रतियोगिता में 25 सीनियर विश्व रिकॉर्ड बने। उत्तर कोरिया ने इनमें अकेले 15 विश्व रिकॉर्ड बनाए और सात विजेता दिए। महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में उत्तर कोरिया की सोंग कुक ह्यांग ने स्नैच में 121 किलोग्राम, क्लीन एंड जर्क में 152 किलोग्राम और कुल 273 किलोग्राम, तीनों में विश्व रिकॉर्ड बनाकर क्लीन स्वीप किया। अंतरराष्ट्रीय महासंघ की नई भार-वर्ग तुलनात्मक अंक प्रणाली में भी वह पूरे एशियाड की सर्वश्रेष्ठ भारोत्तोलक रहीं।
उत्तर कोरिया की री सोंग गुम ने महिलाओं के 49 किलो वर्ग में 94 किलो स्नैच, 121 किलो क्लीन एंड जर्क और कुल 215 किलो, तीनों विश्व रिकॉर्ड बनाए। ओह क्वांग ओक ने 57 किलो में 104, 134 और कुल 238 किलो के तीन विश्व रिकॉर्ड बनाए। चीन की किशोर खिलाड़ी यांग लियुये ने महिलाओं के 61 किलो वर्ग में 112 किलो स्नैच और 251 किलो कुल भार का विश्व रिकॉर्ड बनाया। पुरुषों में इंडोनेशिया के रहमत एरविन अब्दुल्ला ने 75 किलो वर्ग में 206 किलो क्लीन एंड जर्क और कुल 366 किलो के विश्व रिकॉर्ड बनाए। कजाखस्तान के एलेक्सी चुरकिन ने 85 किलो में 173 किलो स्नैच, उत्तर कोरिया के रो क्वांग रयोल ने इसी वर्ग में 214 किलो क्लीन एंड जर्क और कुल 379 किलो तथा उज्बेकिस्तान के अकबर जुराएव ने 110 किलो में 197 किलो स्नैच का विश्व रिकॉर्ड बनाया। इन आँकड़ों से समझा जा सकता है कि भारोत्तोलन में प्रतियोगिता किस स्तर की थी।
निशानेबाजी में शेंग लिहाओ और जापान की हिनाता ताइची के रिकॉर्ड
चीन के शेंग लिहाओ ने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में 254.2 अंक बनाकर नया एशियाई रिकॉर्ड स्थापित करते हुए स्वर्ण जीता। भारत के हिमांशु ढिल्लों ने 252.4 के साथ रजत और रुद्रांक्ष पाटिल ने 230.9 के साथ कांस्य जीता। चीन ने इसी स्पर्धा की टीम प्रतियोगिता में विश्व रिकॉर्ड बनाया। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में जापान की हिनाता ताइची ने 253.0 अंक के नए एशियाई खेल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीता, जबकि भारत की एलावेनिल वलारिवन केवल 0.6 अंक पीछे 252.4 के साथ रजत पदक पर रहीं।
भारत के सितारे: पदकों से आगे इतिहास रचने वाली उपलब्धियाँ
भारत के लिए आइची-नागोया का अभियान कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा है। 3 अक्टूबर को रिपोर्ट तैयार किए जाने तक पदक संख्या लगातार बदल रही थी, इसलिए अंतिम तालिका 4 अक्टूबर के बाद ही स्थिर होगी। लेकिन इससे अलग कुछ भारतीय उपलब्धियाँ अभी से इतिहास में दर्ज हो चुकी हैं। तीरंदाजी, निशानेबाजी, गोल्फ, एथलेटिक्स और हॉकी में ऐसे परिणाम आए हैं जो केवल एक पदक नहीं बल्कि भारतीय खेलों की पुरानी सीमाओं को तोड़ते हैं।
17 वर्षीय कुमकुम मोहोड, इस एशियाड की भारतीय खोज
भारत के लिए संभवतः सबसे रोमांचक व्यक्तिगत कहानी 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड की है। महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में उन्होंने दक्षिण कोरिया की ओ येजिन को रोमांचक शूटऑफ में हराकर स्वर्ण जीता। मुकाबला 5-5 से बराबर होने के बाद ओ येजिन ने निर्णायक तीर पर 8 अंक बनाए, कुमकुम ने दबाव में सीधे 10 पर निशाना लगाया और स्वर्ण भारत का हो गया। इसके साथ कुमकुम एशियाई खेलों में महिला व्यक्तिगत रिकर्व में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और वह पहला पदक ही स्वर्ण निकला। उन्होंने भारत के लिए लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक का कोटा भी हासिल किया।
कुमकुम की कहानी एक स्वर्ण पर समाप्त नहीं होती। उन्होंने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ महिला रिकर्व टीम स्वर्ण जीता और धीरज बोम्मदेवरा के साथ मिश्रित रिकर्व में रजत भी हासिल किया। यानी अपने पहले एशियाई खेलों में 17 साल की खिलाड़ी के नाम दो स्वर्ण और एक रजत। भारतीय तीरंदाजी ने पूरे अभियान में नौ पदक, पाँच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य जीते और पिछले सर्वश्रेष्ठ पदक आँकड़े की बराबरी की।
धीरज बोम्मदेवरा, पदक से पहले ही रिकॉर्ड
धीरज व्यक्तिगत रिकर्व में पदक से चूक गए, लेकिन क्वालिफिकेशन में उनका प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। उन्होंने 698 अंक बनाकर नया एशियाई खेल रिकॉर्ड बनाया और दो बार के ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया के किम जे-देओक को पाँच अंकों से पीछे छोड़कर शीर्ष वरीयता हासिल की। भारत की नई तीरंदाजी शक्ति को समझने के लिए यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। धीरज ने कुमकुम के साथ मिश्रित रिकर्व में रजत और पुरुष टीम में भी रजत जीता।
चिकिथा तानिपार्थी और साहिल जाधव, स्वर्ण के साथ ओलंपिक इतिहास
कंपाउंड तीरंदाजी में चिकिथा तानिपार्थी और साहिल राजेश जाधव ने मिश्रित टीम फाइनल में दक्षिण कोरिया को शूटऑफ में 20-19 से हराकर स्वर्ण जीता। सामान्य मुकाबला 157-157 पर बराबर था। शूटऑफ में दोनों भारतीयों ने 10 लगाए। इस स्वर्ण के साथ दोनों ने लॉस एंजिलिस 2028 के लिए कंपाउंड मिश्रित टीम के पहले ओलंपिक कोटा स्थान भारत को दिलाए। कंपाउंड तीरंदाजी 2028 ओलंपिक में पहली बार शामिल हो रही है, इसलिए यह उपलब्धि भारतीय खेल इतिहास का हिस्सा बन गई।
विथ्या रामराज ने आखिरकार पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा
भारतीय एथलेटिक्स की सबसे भावनात्मक उपलब्धियों में विथ्या रामराज का नाम रहेगा। महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में विथ्या ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर कांस्य जीता और पीटी उषा का 42 वर्ष पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। उषा ने 1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में 55.42 सेकंड का रिकॉर्ड बनाया था। विथ्या ने 2023 हांगझोऊ एशियाड में इस रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी, लेकिन नागोया में उन्होंने इसे 0.67 सेकंड से सुधार दिया। इसके साथ वह 400 मीटर बाधा दौड़ को 55 सेकंड से कम समय में पूरा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इससे पहले वह मिश्रित 4×400 मीटर रिले में भी भारत को रजत दिला चुकी थीं, इसलिए नागोया से उनके नाम दो पदक और एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड जुड़ा।
प्राणवी उर्स, भारतीय महिला गोल्फ में पहली बार एशियाड स्वर्ण
गोल्फ में प्राणवी उर्स ने भारतीय महिला खेल इतिहास का नया अध्याय लिखा। उन्होंने महिला व्यक्तिगत गोल्फ का स्वर्ण जीतकर ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। अंतिम दौर में उनकी तीन स्ट्रोक की बढ़त तीसरे होल पर ट्रिपल बोगी के कारण समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वापसी की और खिताब जीत लिया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एशियाई गोल्फ में जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसी मजबूत शक्तियाँ मौजूद हैं। प्राणवी ने अदिति अशोक और दीक्षा डागर के साथ महिला टीम स्पर्धा में रजत भी जीता।
नीरू ढांडा, ट्रैप में भारत की पहली महिला एशियाई खेल चैंपियन
निशानेबाजी में नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा। वह एशियाई खेलों में महिला ट्रैप का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्होंने इसी प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम को रजत दिलाने में भी योगदान दिया। भारतीय निशानेबाजी ने इस एशियाड में कुल 15 पदक, तीन स्वर्ण, आठ रजत और चार कांस्य के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
सुरुचि सिंह और कमलजीत, स्वर्ण के रास्ते में एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी
10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में सुरुचि सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने स्वर्ण जीता। क्वालिफिकेशन में दोनों ने मिलकर 587 अंक बनाए और एशियाई रिकॉर्ड की बराबरी की। यह प्रदर्शन इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि भारतीय निशानेबाजी पिछले कुछ वर्षों से युवा खिलाड़ियों की गहराई तैयार कर रही है और नागोया में एक और नई जोड़ी सीधे महाद्वीपीय स्वर्ण तक पहुँच गई।
मुक्केबाजी में लवलीना की नई मंजिल
ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने महिलाओं के 75 किलो वर्ग में स्वर्ण जीतकर अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में एशियाई खेलों का स्वर्ण भी जोड़ लिया। पिछले एशियाड में उन्हें रजत मिला था। इस बार उन्होंने फाइनल जीतकर स्वर्ण हासिल किया। उसी दिन परवीन हुड्डा ने महिलाओं के 65 किलो और अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलो वर्ग में स्वर्ण जीतकर भारतीय मुक्केबाजी के लिए शानदार दिन बनाया।
हॉकी में पुरुष और महिला दोनों चैंपियन, एक दुर्लभ भारतीय उपलब्धि
भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर 44 वर्ष बाद एशियाई खेल स्वर्ण हासिल किया। इसके अगले दिन पुरुष टीम ने मलेशिया को फाइनल में 5-1 से हराकर अपना खिताब बचाया। भारतीय पुरुष हॉकी इतिहास में यह पहली बार हुआ कि टीम ने लगातार दो एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। यह भारत का पुरुष हॉकी में पाँचवाँ एशियाई खेल स्वर्ण भी बना। पुरुष टीम की जीत के साथ लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक का स्थान भी सुनिश्चित हुआ। एक ही एशियाड में भारत की महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों का स्वर्ण जीतना नागोया की सबसे महत्वपूर्ण भारतीय सामूहिक उपलब्धियों में है।
क्रिकेट में पाकिस्तान को हराकर खिताब बरकरार
3 अक्टूबर को भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर अपना एशियाई खेल खिताब बरकरार रखा। भारत ने 211 रन बनाए और उसके बाद पाकिस्तान को लक्ष्य तक नहीं पहुँचने दिया। अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा की बल्लेबाजी महत्वपूर्ण रही। इस जीत ने भारत के अंतिम दिनों के स्वर्ण पदकों में एक और बड़ा पदक जोड़ दिया।
इस एशियाड की सबसे बड़ी कहानी केवल पदक नहीं, उम्र भी है
आइची-नागोया 2026 को ध्यान से देखें तो इसकी सबसे रोचक बात रिकॉर्डों से भी आगे दिखाई देती है। जापान के शिन ओहाशी 17 वर्ष के हैं और विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं, चीन की चेन युजी 17 वर्ष की उम्र में एशियाई खेल 100 मीटर चैंपियन हैं, चीन की यान जियी लगभग 18 वर्ष की उम्र में 70.46 मीटर भाला फेंक रही हैं, चीन के झांग झानशुओ 19 वर्ष की उम्र में सात स्वर्ण जीत चुके हैं और भारत की कुमकुम मोहोड 17 वर्ष की उम्र में दो स्वर्ण और एक रजत लेकर लौट रही हैं। इसका अर्थ है कि एशिया में पेरिस 2024 के बाद की नई खेल पीढ़ी अब केवल भविष्य की संभावना नहीं रही, वह वर्तमान में विश्व स्तर के परिणाम देने लगी है।
इन खेलों की दूसरी बड़ी कहानी यह है कि एशियाई स्तर और विश्व स्तर के बीच का अंतर कई खेलों में तेजी से मिट रहा है। पुरुष 100 मीटर में 9.90 सेकंड, पुरुष 200 मीटर में 19.88 सेकंड, महिला भाला फेंक में 70.46 मीटर, पुरुष 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में 2:04.83 का विश्व रिकॉर्ड और भारोत्तोलन में एक ही प्रतियोगिता के दौरान 25 सीनियर विश्व रिकॉर्ड, ये सामान्य महाद्वीपीय प्रतियोगिता के आँकड़े नहीं हैं। इनमें से अनेक प्रदर्शन सीधे विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक पदक स्तर के हैं।
भारत के लिए नागोया का सबसे महत्वपूर्ण संदेश
भारत के संदर्भ में इस एशियाड की असली उपलब्धि केवल कुल पदक संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। कुमकुम मोहोड का 17 वर्ष में उभरना, विथ्या रामराज का पीटी उषा का चार दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ना, प्राणवी उर्स का महिला गोल्फ में पहला व्यक्तिगत स्वर्ण, नीरू ढांडा का महिला ट्रैप में पहला स्वर्ण, कंपाउंड तीरंदाजी में ओलंपिक कोटा, महिला हॉकी का 44 वर्ष बाद चैंपियन बनना और पुरुष हॉकी का पहली बार लगातार दूसरा एशियाई खेल स्वर्ण जीतना अधिक दूरगामी उपलब्धियाँ हैं। भारत की तीरंदाजी ने नौ पदकों में पाँच स्वर्ण जीतकर यह भी संकेत दिया है कि जिस खेल में लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्षमता और ओलंपिक परिणामों के बीच अंतर की चर्चा होती रही, उसमें नई पीढ़ी तेजी से मजबूत हो रही है।
आइची-नागोया एशियाई खेल 4 अक्टूबर को समाप्त होंगे, इसलिए 3 अक्टूबर की शाम तक की इस तस्वीर को अंतिम पदक तालिका नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन खेलों का चरित्र अब लगभग स्पष्ट है। 2026 का एशियाड रिकॉर्डों, किशोर प्रतिभाओं और एशियाई खेल शक्ति के तेजी से विश्व स्तर तक पहुँचने का एशियाड है। शिन ओहाशी का 2:04.83, पुरिपोल बूनसन का 9.90 और 19.88, झांग झानशुओ के सात स्वर्ण, विनफ्रेड यावी के तीन ऐतिहासिक स्वर्ण, सोंग कुक ह्यांग के तीन विश्व रिकॉर्ड और भारत की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड के दो स्वर्ण और एक रजत, ये वे आँकड़े हैं जिन्हें आने वाले वर्षों में बार-बार याद किया जाएगा। और भारत के लिए शायद सबसे अच्छी खबर यही है कि उसके कुछ सबसे चमकीले प्रदर्शन स्थापित सितारों से नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों से आए हैं जिनका सर्वश्रेष्ठ दौर अभी शुरू ही हुआ है।