शुभादित्य बोस। कभी भारतीय क्रिकेट का सबसे प्रतिभाशाली युवा सितारा माने गए पृथ्वी शॉ 26 साल की उम्र में अपने करियर को नई दिशा देने की कोशिश में जुटे हैं। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर उन्होंने अपना ध्यान क्रिकेट, परिवार और खुद पर केंद्रित किया है।
महाराष्ट्र की कप्तानी करते हुए वह मैदान पर अपनी नेतृत्व क्षमता भी दिखा रहे हैं। भारतीय टीम में वापसी का सपना अब भी उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य है, लेकिन अब उनका कहना है कि मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है।
बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को पालम में पृथ्वी शॉ लगातार साथियों का हौसला (लगे रहो, लगे रहो कह रहे थे) बढ़ा रहे थे। । उन्होंने समझदारी से फील्ड सेट की। सही समय पर गेंदबाजों को बदला और उपलब्ध संसाधनों का बहुत ही सूझबूझ से इस्तेमाल किया। इसका इनाम उन्हें जीत के रूप में मिला।
एक ऐसी जीत जिसकी 24 घंटे पहले तक कोई उम्मीद नहीं थी। महाराष्ट्र ने 268 रन के स्कोर का बचाव किया और सर्विसेज की पूरी टीम को 120 रन पर समेट दिया। मैच के अंतिम दिन 10 विकेट गिरे। आखिरी विकेट तब गिरा जब अंपायरों द्वारा मैच को ड्रॉ घोषित करने में बस कुछ ही मिनट बचे थे।
आठ साल पहले पृथ्वी शॉ को क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा था। उनकी तुलना दिग्गज खिलाड़ियों से होने लगी थी। उनसे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन किस्मत ने कई उतार-चढ़ाव ला दिए। अब 26 साल की उम्र में वह करियर को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। यह ऐसी उम्र है, जब कई खिलाड़ी अपने पेशेवर करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं।
’26 साल की उम्र अभी बहुत कम है, है ना?’
इस सवाल पर पृथ्वी शॉ ने खुलकर अपनी बात रखी। पृथ्वी शॉ ने कहा, ”मुझे पता है कि 26 साल की उम्र ज्यादा नहीं होती, लेकिन जब मैं 18 साल के खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करते देखता हूं तो सोचता हूं कि यार मैं तो बूढ़ा हो गया! मुझे पता है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, लेकिन यह लगातार बढ़ती रहती है। आपको इस सच्चाई को स्वीकार करना पड़ता है।”
18 साल की उम्र में ही पृथ्वी शॉ ने न्यूजीलैंड में भारतीय U-19 टीम की कप्तानी की थी और टीम को आईसीसी U-19 विश्व कप का खिताब दिलाया था। इसी उम्र में वह टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले दूसरे सबसे युवा भारतीय बने थे। उनसे कम उम्र में यह उपलब्धि सचिन तेंदुलकर ने हासिल की थी।
इसके बावजूद 26 साल की उम्र तक पृथ्वी शॉ भारत के लिए सिर्फ पांच टेस्ट मैच ही खेल पाए। समय तेजी से बीतता है। भारतीय क्रिकेट में बदलाव की रफ्तार इससे भी तेज है। पृथ्वी शॉ से भारतीय टीम आगे बढ़ चुकी है। हालांकि, पृथ्वी शॉ ने अब भी टीम इंडिया में वापसी का सपना नहीं छोड़ा है।
पृथ्वी शॉ ने कहा, ”अगर मेरे अंदर वह जुनून नहीं होता तो मैं आज क्रिकेट नहीं खेल रहा होता। मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य भारतीय टीम में वापसी करना है। राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए कई ओपनर कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अपनी दावेदारी बनाए रखने के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा।”
अपनी बात पर कुछ पल सोचने के बाद पृथ्वी ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, ”…लेकिन असल में, मेरे लिए यह किसी को कुछ साबित करने के बारे में नहीं है। मेरा मुकाबला खुद से है।” करीब दो साल पहले पृथ्वी शॉ को अचानक मुंबई की टीम से बाहर कर दिया गया था। उस समय इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खबर में बताया था कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) उनकी फिटनेस से संतुष्ट नहीं था।
पृथ्वी शॉ ने महाराष्ट्र के लिए खेलते हुए बुची बाबू ट्रॉफी में भी पहली पारी में शतक जड़ा था। (फोटो सोर्स- पीटीआई फाइल)
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने इस ओपनर बल्लेबाज को दो सप्ताह तक कड़े फिटनेस कार्यक्रम का पालन करने के लिए कहा था। उस समय एमसीए के एक पदाधिकारी ने कहा था, ”चयन के लिए विचार किये जाने के वास्ते उन्हें अपने शरीर का वजन कम करना होगा।”
इसके एक साल बाद पृथ्वी शॉ ने मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र की टीम का दामन थाम लिया। अपने पहले ही सीजन में उन्होंने महाराष्ट्र के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए। पृथ्वी शॉ ने 48.81 के औसत से 537 रन बनाए। इसमें एक दोहरा शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे।
पृथ्वी की प्रतिभा में कोई कमी नहीं थी। बदलाव की कोशिश के पीछे दूसरे कारण थे। पृथ्वी ने बताया, ”मैं पहले से कहीं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं। मैं फिलहाल सोशल मीडिया से दूर हूं। सिर्फ 3 चीजों (क्रिकेट, परिवार और खुद) पर ध्यान दे रहा हूं। बाकी सबको नजरअंदाज कर खुद से दूर रखता हूं।”
हालांकि, जिस खिलाड़ी का नाम अक्सर सुर्खियों में रहता है, उसके लिए लोगों की चर्चाओं और बातों से खुद को दूर रखना आसान नहीं होता। पृथ्वी ने बताया, ”मैं घर पर रहने की कोशिश करता हूं। परिवार के साथ जब भी डिनर पर बाहर जाता हूं तो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने से बचता हूं।”
पृथ्वी शॉ ने कहा, ”मैं कभी पपराजी को नहीं बुलाता। कुछ लोगों को कैमरों के आसपास रहना पसंद हो सकता है, लेकिन मुझे निजी समय में कैमरों की मौजूदगी अच्छी नहीं लगती। अब मैं निजी जिंदगी और उसके दायरे को महत्व देता हूं।”
सोशल मीडिया पर लगातार होने वाली टिप्पणियों और आलोचनाओं के बारे में पृथ्वी शॉ ने कहा, ”बाहर के लोग मेरे बारे में क्या कहते हैं, इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे लिए यह मायने रखता है कि मैं कैसा इंसान हूं और मेरा परिवार मेरे बारे में क्या सोचता है।”
हर बार कोई भी 100 फीसदी सही नहीं हो सकता
पहले के मुकाबले अब पृथ्वी ज्यादा समझदारी से जिंदगी और करियर को देख रहे हैं। वह अतीत में हुई गलतियों को स्वीकार करते हैं। पृथ्वी ने कहा, ”हां, इस सफर में मुझसे भी गलतियां हुई होंगी। जिंदगी में कोई भी हर बार 100 फीसदी सही नहीं हो सकता। यह आपकी यात्रा और किस्मत का हिस्सा है।”
पृथ्वी शॉ ने कहा, ”अब मैं अतीत के बारे में नहीं सोचता। मेरा पूरा ध्यान आगे बढ़ने पर है। मैं अपने क्रिकेट का आनंद लेना चाहता हूं, अपने साथियों के साथ समय बिताना चाहता हूं, मेहनत करने के अपने स्तर को बनाए रखना चाहता हूं और परिवार के साथ अच्छा वक्त गुजारना चाहता हूं। दिन खत्म होने के बाद मैं अपने होटल के कमरे में लौटता हूं और PS5 पर गेम खेलता हूं।”
पृथ्वी शॉ ने बताया, ”मैं गेम में अपने ही किरदार पृथ्वी शॉ के साथ करियर मोड खेल रहा हूं। जब असल जिंदगी में मैं कम रन बनाकर आउट हो जाता हूं तो गेम खेलने बैठ जाता हूं और उसमें 400-500 रन बना देता हूं!”
पृथ्वी शॉ एक साथ दो रास्तों पर आगे बढ़ रहे हैं। एक तरफ वह अपनी गलतियों से सीखकर करियर को फिर से संवारने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, वह अपने युवा साथियों को भी मार्गदर्शन दे रहे हैं और उन्हें कम उम्र में होने वाली गलतियों से सीखने की सलाह दे रहे हैं।
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