अफगानिस्तान से नॉर्वे में बसी बॉडीबिल्डर रोया करीमी उन लड़कियों के लिए एक मिसाल हैं जो किसी ना किसी तरीके से जुल्म सह रही हैं. रोया करीमी ने अपनी मुश्किल जिंदगी को बदलने के लिए एक बड़ा फैसला लिया और आज वो एक नहीं, दो नहीं, बल्कि पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन हैं. रोया करीमी की शादी सिर्फ 14 साल की उम्र में हो गई थी और 15 साल की उम्र में उनका बेटा हो गया था. 17 साल की उम्र में इस खिलाड़ी ने अफगानिस्तान से भागने का फैसला किया और फिर हजारों किमी. दूर नॉर्वे में अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की.
रोया करीमी का संघर्ष
रोया करीमी ने DW हिंदी को दिए इंटरव्यू में अपने ऊपर हुए सितम और फिर उस दर्द को झेलते हुए जिंदगी को बदलने का किस्सा बयां किया. रोया करीमी ने कहा, ‘जब मैं 14 साल की थी तो मेरी शादी हो गई और 15 साल की उम्र में मेरा बच्चा हो गया. मेरे पूर्व पति ने मेरी नाक तोड़ी. वो परिवार, वो माहौल जेल जैसा था. वहां मेरे पास कोई अधिकार नहीं था. मैं अपने फैसले नहीं ले सकती थी. सालों तक मैंने वो झेला और परिवार में मुझे कोई प्यार नहीं मिला. वो आपस में बहुत हिंसा करते थे. मेरे साथ भी मारपीट होती थी.’
17 साल की उम्र में देश छोड़ा
17 साल की उम्र में रोया के फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी. उन्होंने अपने बच्चे को गोद में उठाया और अपना देश छोड़ दिया.रोया ने बताया, ‘नॉर्वे आने के बाद मुझे शांति मिली. मैं चैन से रह सकती थी. नॉर्वे में आकर मैंने खुशी महसूस की. मैंने नॉर्वे में काफी मेहनत की. पढ़ाई लिखाई के अलावा उन्होंने मन की शांति के लिए जिम शुरू की. 2011-12 में मैंने मानसिक और शारीरिक समस्याओं से निपटने के लिए मैंने जिम का सहारा लिया.’ नॉर्वे में रोया ने नर्सिंग स्कूल में दाखिला लिया और नए सिरे से शुरुआत की.
रोया का सफर
कमाल से हुई रोया की दूसरी शादी
नॉर्वे में रोया की मुलाकात कमाल से हुई जो खुद अफगानी रिफ्यूजी थे. दोनों कॉलेज में मिले, प्यार हुआ और दोनों ने शादी कर ली. कमाल ने ही रोया को बॉडीबॉल्डिंग के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग की और अब वो 5 बार वर्ल्ड चैंपियन IFBB World Champion हैं. रोया के बेटे इरफान करीमी को भी अपनी मां पर गर्व है. उन्होंने अपनी मां को हर हालात में लड़ते देखा है. आज रोया करीमी सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर हैं. वो सोशल मीडिया के जरिए दूसरी लड़कियों को हौंसला देती हैं. रोया का महिलाओं को मैसेज है कि उन्हें जिंदगी बदलने के लिए अनुशासन बनाए रखना चाहिए. रोया का कहना है कि उनकी हर जीत अफगानी औरतों के हक के लिए है.