नई दिल्ली: वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी वनडे और टी20 सीरीज से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने जियोस्टार को दिए एक इंटरव्यू में कई बड़े खुलासे किए हैं। गंभीर ने टी20 फॉर्मेट में टीम चयन के बेहद मुश्किल फैसलों, टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर की कप्तानी और सोशल मीडिया के दबाव पर खुलकर अपनी बात रखी है।
उनकी ये बाते सोशल मीडिया पर भी ड्रेंड कर रही हैं।
संजू सैमसन को बाहर करना कोच के रूप में सबसे दर्दनाक फैसला
गंभीर ने खुलासा किया कि इंग्लैंड के खिलाफ जुलाई में हुई टी20 सीरीज के दौरान संजू सैमसन को प्लेइंग-11 से बाहर करके 14 साल के वैभव सूर्यवंशी को मौका देना उनके कार्यकाल का सबसे कठिन निर्णय था। सैमसन को लेकर गंभीर ने कहा, ‘मेरी दो साल की इस कोचिंग यात्रा में वह अकेली ऐसी रात थी जब मैं सो नहीं पाया था। मैंने यह बात संजू को भी बताई, क्योंकि टी20 फॉर्मेट में एक कोच के तौर पर यह मेरा सबसे कठिन फैसला था। जो खिलाड़ी टी20 वर्ल्ड कप में ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहा हो, उसे तीन-चार मैचों के बाद बाहर बैठाना बेहद मुश्किल था। हालांकि, वैभव उस समय ज़बरदस्त फॉर्म में थे और हमें सीरीज जीतनी थी। मैंने संजू से बेहद ईमानदारी से बात की और उन्होंने मेरी बात को बहुत ही खेल भावना के साथ लिया।’
सोशल मीडिया या बाहरी शोर से नहीं बनती प्लेइंग-11
युवा खिलाड़ियों को मौका देने और सीनियरों को बैक करने के सवाल पर गंभीर ने स्पष्ट किया कि बाहरी दबाव में आकर फैसले नहीं लिए जाते। गंभीर ने कहा, ‘सोशल मीडिया या बाहर का शोर यह तय नहीं करता कि प्लेइंग-11 क्या होगी। प्लेइंग-11 इस बात से तय होती है कि ड्रेसिंग रूम में कोच और कप्तान को कौन मैच जिताने वाला खिलाड़ी लगता है। आप तीन-चार विफलताएं मिलने पर अचानक उस कॉम्बिनेशन को नजरअंदाज नहीं कर सकते जिसने पिछले डेढ़-दो सालों में इतना बड़ा इम्पैक्ट डाला हो। वैभव जैसे प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी बारी का इंतजार करना होगा। मेरे लिए लोकप्रिय फैसले लेना आसान है, लेकिन सही फैसले लेना सबसे कठिन है, और हमने संजू और अभिषेक शर्मा के साथ बने रहने का सही फैसला लिया है।’
श्रेयस अय्यर की कप्तानी की तारीफ
टी20 इंटरनेशनल कप्तान श्रेयस अय्यर की तारीफ करते हुए गंभीर ने आईपीएल 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ बिताए समय को याद किया। गंभीर ने कहा, ‘श्रेयस के बारे में मुझे जो सबसे अच्छी बात लगी, वह यह थी कि वे टीम के मुख्य बल्लेबाज होकर भी नंबर-4 पर अपना बल्लेबाजी स्थान छोड़ने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। एक अच्छे लीडर की सबसे पहली खूबी उसका निःस्वार्थ होना है। आप कितने भी अनुशासित, फिट या नंबर-1 बल्लेबाज क्यों न हों, अगर आप सेल्फलेस नहीं हैं तो सब बेकार है। श्रेयस के पास यह खूबी कूट-कूट कर भरी है।”
एक-दो खराब मैचों से टीम या खिलाड़ी बुरे नहीं बन जाते
हालिया प्रदर्शन पर बात करते हुए गंभीर ने कहा कि एक-दो सीरीज में मिली हार से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने याद दिलाया, ‘हमने वर्ल्ड कप जीता है। इस टीम को दूसरा वर्ल्ड कप जीतने में 17 साल लग गए थे, लेकिन तीसरा वर्ल्ड कप जीतने में सिर्फ 17 महीने लगे। अचानक एक बुरी सीरीज या 3 खराब मैच किसी खिलाड़ी या टीम को बुरा नहीं बना देते, इसलिए निरंतरता बनाए रखना बहुत जरूरी है।’