सिराज की रफ्तार के सामने 15 साल के वैभव का तूफान, 37 गेंदों में 44 रन ठोककर मचाई सनसनी

लीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल में क्रिकेट फैंस की नजरें एक बार फिर युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी पर टिक गईं। महज 15 साल की उम्र में इस बल्लेबाज ने बड़े मुकाबले और बड़े गेंदबाज के सामने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने मैदान पर मौजूद दर्शकों का ध्यान खींच लिया।

ईस्ट जोन की ओर से ओपनिंग करने उतरे वैभव ने मोहम्मद सिराज जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज के खिलाफ बेखौफ शॉट लगाए और अपनी टीम को तेज शुरुआत दिलाई।

सिराज के खिलाफ वैभव ने दिखाया आक्रामक अंदाज

फाइनल मुकाबले के शुरुआती ओवरों में वैभव ने कुछ समय लेकर पिच और गेंदबाजी को समझा, लेकिन इसके बाद उनका बल्ला खुलकर बोलने लगा। मोहम्मद सिराज की गेंदों के सामने उन्होंने आक्रामक रवैया अपनाया और मौके मिलते ही गेंद को बाउंड्री के पार भेज दिया।

सिराज के एक ओवर में वैभव ने शानदार तरीके से 14 रन बटोरे। पहले उन्होंने चौथे स्टंप की गेंद को पॉइंट क्षेत्र की ओर खेलकर चौका हासिल किया। इसके बाद आगे पड़ी गेंद पर उन्होंने लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से जोरदार छक्का जड़ दिया। ओवर की आखिरी गेंद पर भी वैभव ने आक्रामक शॉट खेला और चौका हासिल किया। इस पूरे ओवर ने उनकी बल्लेबाजी के आत्मविश्वास की झलक दिखा दी।

सिर्फ 37 गेंदों में बनाए 44 रन

वैभव सूर्यवंशी ने फाइनल में 37 गेंदों का सामना करते हुए 44 रन की तेजतर्रार पारी खेली। उनकी इस पारी में पांच चौके और एक छक्का शामिल रहा। वह अपने अर्धशतक से महज छह रन दूर रह गए, लेकिन आउट होने से पहले वह ईस्ट जोन को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके थे।

वैभव की बल्लेबाजी में सबसे खास बात उनका निडर अंदाज रहा। सामने अनुभवी अंतरराष्ट्रीय तेज गेंदबाज होने के बावजूद उन्होंने दबाव में आने के बजाय अपने शॉट्स पर भरोसा किया। उनकी पारी छोटी जरूर रही, लेकिन इसमें तेजी और आक्रामकता दोनों देखने को मिली।

अभिमन्यु ईश्वरन के साथ शतकीय ओपनिंग साझेदारी

वैभव ने कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन के साथ मिलकर ईस्ट जोन को शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों के बीच महज 14.4 ओवर में 100 रनों की ओपनिंग साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने ईस्ट जोन को शुरुआती दबाव से बाहर निकालते हुए स्कोरिंग रफ्तार को काफी तेज कर दिया।

इस दौरान वैभव ने जहां आक्रामक बल्लेबाजी की, वहीं अभिमन्यु ईश्वरन ने पारी को संभालने की भूमिका निभाई। दोनों की साझेदारी ने दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और ईस्ट जोन को फाइनल में अच्छी शुरुआत मिली।

छह रन से चूके अर्धशतक

वैभव जिस तरह से बल्लेबाजी कर रहे थे, उससे लग रहा था कि वह दलीप ट्रॉफी फाइनल में एक और अर्धशतक अपने नाम कर सकते हैं। लेकिन 44 के निजी स्कोर पर उनकी पारी का अंत हो गया। चामा मिलिंद की गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की कोशिश में गेंद बल्ले का ऊपरी किनारा लेकर हवा में चली गई। मिड-विकेट क्षेत्र में तनय त्यागराजन ने कैच पकड़कर वैभव की पारी खत्म कर दी।

इस तरह वैभव दलीप ट्रॉफी में अपना दूसरा अर्धशतक पूरा करने से सिर्फ छह रन दूर रह गए। इसके बावजूद उनकी 44 रन की पारी फाइनल के शुरुआती हिस्से की सबसे चर्चित पारियों में शामिल हो गई।

सेमीफाइनल में भी मचाया था धमाल

फाइनल से पहले वैभव सूर्यवंशी का बल्ला सेमीफाइनल में भी खूब चला था। उन्होंने सेमीफाइनल में 92 और 40 रनों की पारियां खेलकर अपनी शानदार फॉर्म का संकेत दिया था। इसी प्रदर्शन के बाद फाइनल में भी उनसे बड़ी पारी की उम्मीद की जा रही थी।

फाइनल में वह अर्धशतक तो नहीं बना सके, लेकिन सिराज जैसे गेंदबाज के सामने उनके बेखौफ अंदाज ने एक बार फिर यह दिखाया कि छोटी उम्र के बावजूद वह बड़े मंच पर दबाव झेलने की क्षमता रखते हैं।

साउथ जोन की टीम में दिखे बड़े नाम

फाइनल मुकाबले के लिए साउथ जोन की टीम में भी महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। श्रीलंका दौरे से लौटे मोहम्मद सिराज और देवदत्त पडिक्कल की टीम में वापसी हुई। पडिक्कल ने श्रीलंका में लगातार तीन शतक लगाकर शानदार फॉर्म दिखाई थी, ऐसे में फाइनल में उनके प्रदर्शन पर भी नजरें टिकी थीं।

साउथ जोन की प्लेइंग इलेवन में सिराज और पडिक्कल के अलावा सीवी मिलिंद और त्रिपुराना विजय को भी शामिल किया गया। दूसरी ओर ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने अपनी टीम की प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया।

वैभव की पारी ने फिर खींचा सबका ध्यान

दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में 15 साल की उम्र में लगातार प्रभाव छोड़ना वैभव सूर्यवंशी के लिए बड़ी उपलब्धि है। फाइनल में उनका 44 रन का स्कोर भले ही अर्धशतक में नहीं बदल पाया, लेकिन जिस तरह उन्होंने मोहम्मद सिराज की गेंदों पर आक्रामक शॉट लगाए, उसने एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी क्षमता और आत्मविश्वास की झलक दिखा दी।

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