सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह और गौतम गंभीर को क्यों छोड़नी पड़ी टीम इंडिया, पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने बताई वजह

नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के दिग्गज खिलाड़ियों सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar), युवराज सिंह (Yuvraj Singh), गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) और जहीर खान (Zaheer Khan) को राष्ट्रीय टीम से बाहर होना पड़ा या संन्यास (Retirement) लेना पड़ा, इसके पीछे की वजहों पर पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल (Sandeep Patil) ने अपनी बात रखी है।

उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों का उद्देश्य भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखना था। पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने या उनके संन्यास से जुड़े फैसले उन्होंने अकेले नहीं लिए थे, बल्कि पांच सदस्यीय चयन समिति (Selection Committee) ने सामूहिक रूप से निर्णय किए थे।

संदीप पाटिल ने 2012 से 2016 तक भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की वरिष्ठ चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया था। उनका कार्यकाल भारतीय क्रिकेट में बदलाव के दौर से जुड़ा रहा, जब कई अनुभवी खिलाड़ियों की जगह युवा प्रतिभाओं को अवसर देने पर जोर दिया जा रहा था। हाल ही में एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान उन्होंने उस समय के फैसलों और चयनकर्ताओं की जिम्मेदारियों पर चर्चा की।

पाटिल ने कहा कि सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, युवराज सिंह और जहीर खान जैसे बड़े खिलाड़ियों को टीम छोड़नी पड़ी या संन्यास लेना पड़ा, इस बारे में बात करना आज भी उनके लिए आसान नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों को खुद पता है कि उनके करियर के उस पड़ाव पर ऐसे फैसले क्यों लिए गए थे। उनके मुताबिक, चयन समिति का दायित्व देश, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और भारतीय क्रिकेट के हितों को प्राथमिकता देना था।

पूर्व मुख्य चयनकर्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि टीम चयन में व्यक्तिगत रिश्तों को फैसलों पर हावी नहीं होने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं के खिलाड़ियों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध हो सकते हैं, लेकिन पेशेवर जिम्मेदारी निभाते समय एक सीमा बनाए रखना जरूरी है। किसी खिलाड़ी से दोस्ती होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे केवल इसी आधार पर टीम में जगह दी जाए।

पाटिल के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति को चयनकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उसे अपने व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर भारतीय टीम के हित में फैसले लेने होते हैं। उन्होंने कहा कि चयन के दौरान यह नहीं सोचना चाहिए कि किसी खिलाड़ी के साथ अपने संबंध कैसे हैं, बल्कि यह देखना चाहिए कि टीम और उसके भविष्य के लिए क्या उचित है। कई बार ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जिनसे फैसला करने वाला व्यक्ति खुद भी सहज नहीं होता, लेकिन टीम की भलाई के लिए उन्हें लेना जरूरी होता है।

उन्होंने दोहराया कि खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने जैसे फैसले किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं लिए जाते। पांच सदस्यों वाली समिति में विचार-विमर्श के बाद सामूहिक निर्णय किए जाते हैं। पाटिल ने अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों को इसी जिम्मेदारी का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, चयनकर्ताओं को भारतीय क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर काम करना होता है, भले ही इसके लिए स्थापित और लोकप्रिय खिलाड़ियों के बारे में कठिन निर्णय क्यों न लेने पड़ें।

सचिन, युवराज, गंभीर और जहीर जैसे खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने या संन्यास लेने को लेकर प्रशंसकों के बीच लंबे समय से सवाल रहे हैं। पाटिल के ताजा बयान में किसी एक खिलाड़ी के मामले की विस्तृत वजह अलग-अलग नहीं बताई गई, बल्कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के व्यापक सिद्धांतों पर जोर दिया। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि राष्ट्रीय टीम के चयन में व्यक्तिगत दोस्ती से अधिक महत्व टीम की जरूरतों और भारतीय क्रिकेट के भविष्य को दिया जाना चाहिए।

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