श्रीलंका क्रिकेट के लिए एक बार फिर मुश्किल दौर शुरू होता दिख रहा है। जिस देश को पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी का मौका मिलने वाला था, अब वही टूर्नामेंट उसके हाथ से निकल गया है।
श्रीलंका क्रिकेट के लिए इसे एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
मेजबानी को लेकर यह बदलाव अचानक सामने आया है लेकिन इसके पीछे श्रीलंका क्रिकेट के प्रशासन से जुड़ा विवाद काफी समय से चल रहा है। ICC की चिंता इस बात को लेकर है कि श्रीलंका क्रिकेट फिलहाल किस तरह संचालित हो रहा है और उसमें सरकार की भूमिका कितनी है।
आखिर श्रीलंका से क्यों छीनी गई मेजबानी?
श्रीलंका क्रिकेट इस समय सरकार द्वारा बनाई ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के अधीन चल रहा है। ICC लंबे समय से अपने सदस्य क्रिकेट बोर्ड में स्वतंत्र और निर्वाचित प्रशासन की मांग करता रहा है। मौजूदा व्यवस्था इस नीति से मेल नहीं खाती इसलिए श्रीलंका और ICC के बीच प्रशासन को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
इसी विवाद के बीच ICC ने अब फैसला किया है कि मौजूदा प्रशासनिक स्थिति में श्रीलंका में महिला चैंपियंस ट्रॉफी आयोजित नहीं की जाएगी। श्रीलंका के ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शाफ्टर ने भी पुष्टि की है कि ICC ने टूर्नामेंट को श्रीलंका से बाहर ले जाने की जानकारी दी है।
अब कहां होगा टूर्नामेंट?
फिलहाल इस सवाल का जवाब नहीं मिला है। ICC को अब टूर्नामेंट के लिए नया मेजबान चुनना होगा और यह फैसला आईसीसी बोर्ड की अगली बैठक में होने की उम्मीद है। यानी अभी किसी दूसरे देश का नाम आधिकारिक रूप से तय नहीं हुआ है।
महिला चैंपियंस ट्रॉफी का पहला संस्करण 14 से 28 फरवरी 2027 के बीच खेला जाना है। इसमें छह टीमें हिस्सा लेने वाली हैं और यह टूर्नामेंट T20 फॉर्मेट में आयोजित होना है।
श्रीलंका की टीम खेलेगी या नहीं?
अब यह मामला और दिलचस्प हो जाता है। श्रीलंका को मेजबान होने के कारण टूर्नामेंट में जगह मिलने की उम्मीद थी लेकिन अगर अब किसी दूसरे देश को आयोजन सौंपा जाता है तो क्वालिफिकेशन का समीकरण बदल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा योजना में टॉप रैंकिंग वाली टीमों के साथ मेजबान को शामिल किया जाना था। श्रीलंका इस समय रैंकिंग में छठे स्थान पर है। अगर नया मेजबान ऐसा देश होता है जो मौजूदा टॉप छह में शामिल नहीं है, तो श्रीलंका की अपनी जगह को लेकर सवाल खड़ा हो सकता है। हालांकि आईसीसी ने अभी इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।