भुवनेश्वर कुमार की चार साल बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी ने मोहम्मद शमी के लिए भी उम्मीद की एक छोटी-सी खिड़की खोल दी है। एक समय टीम इंडिया के भरोसेमंद तेज गेंदबाज रहे मोहम्मद शमी भले ही पिछले दो आईपीएल सत्र में अपेक्षित असर नहीं छोड़ पाए हों, लेकिन घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बताता है कि उन्होंने राष्ट्रीय टीम में लौटने की उम्मीद अभी छोड़ी नहीं है।
रणजी ट्रॉफी से लेकर दलीप ट्रॉफी तक शमी लगातार विकेट लेकर अपनी धार साबित कर रहे हैं। अब सवाल यही है कि क्या भुवनेश्वर की तरह मोहम्मद शमी भी घरेलू क्रिकेट के रास्ते टीम इंडिया में वापसी की कहानी लिख पाएंगे?
पहले भुवनेश्वर कुमार की बात करते हैं। भुवनेश्वर की वापसी के पीछे 2025 और 2026 के आईपीएल में उनका प्रदर्शन अहम रहा। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए इन दो सत्रों में उन्होंने 30 मैच में 45 विकेट लिए। नतीजा यह रहा कि चार साल के अंतराल के बाद उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में जगह मिली।
भुवनेश्वर ने बदली गेंदबाजी की भूमिका
भुवनेश्वर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कम गति के बावजूद उन्होंने टी20 क्रिकेट की जरूरत के मुताबिक अपनी गेंदबाजी को ढाला। पावरप्ले में नई गेंद को स्विंग कराने से लेकर डेथ ओवरों में यॉर्कर और धीमी गेंदों के इस्तेमाल तक उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट रखी।
आरसीबी के सहायक कोच आविष्कार सालवी ने भी उनकी सफलता के पीछे इसी स्पष्टता को अहम बताया। उनके मुताबिक, भुवनेश्वर जानते हैं कि उनके लिए क्या काम करता है। वह उसी पर भरोसा करते हैं। नई गेंद से मौके बनाने और पारी के आखिरी चरण में विविधता का इस्तेमाल करने की उनकी क्षमता उन्हें अब भी प्रभावी बनाती है।
आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। 2025 और 2026 के आईपीएल में भुवनेश्वर ने मुख्य रूप से पावरप्ले और पारी के आखिरी पांच ओवरों में गेंदबाजी की। इन दो सत्रों में उन्होंने पावरप्ले में 25 और आखिरी पांच ओवरों में 18 विकेट लिए। यह प्रदर्शन जोश हेजलवुड, जोफ्रा आर्चर और मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाजों के मुकाबले भी प्रभावशाली रहा।
भुवनेश्वर का योगदान सिर्फ गेंद से नहीं रहा। आरसीबी में वह रासिख सलाम, सुयश शर्मा, मंगेश यादव और अभिनंदन सिंह जैसे युवा तेज गेंदबाजों के साथ अपना अनुभव साझा करते हैं। यहां तक कि जोश हेजलवुड ने भी भारतीय परिस्थितियों को समझने में उनकी सलाह का फायदा उठाया है।
आविष्कार सालवी के मुताबिक, भुवनेश्वर कुमार युवा गेंदबाजों को परिस्थितियां पढ़ने, बल्लेबाजों के खिलाफ योजना बनाने और दबाव संभालने में मदद करते हैं। उनका जोर इस बात पर भी रहता है कि युवा खिलाड़ी अपनी ताकत को समझें और उस पर भरोसा करें। यही अनुभव न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय टीम के लिए उपयोगी हो सकता है, जहां जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है।
शमी के आंकड़े IPL में कमजोर, घरेलू क्रिकेट में मजबूत
मोहम्मद शमी के लिए तस्वीर फिलहाल इतनी आसान नहीं है। 2025 और 2026 के आईपीएल में उन्होंने 22 मैचों में सिर्फ 18 विकेट लिए और उनकी इकॉनमी करीब 10 रन प्रति ओवर रही। टी20 क्रिकेट में यह आंकड़ा उनकी वापसी की दावेदारी को मजबूत नहीं करता, लेकिन उनका पूरा आकलन सिर्फ IPL से करना सही नहीं होगा। लंबी चोट के बाद 2024 के अंत में घरेलू क्रिकेट में लौटे बंगाल के इस तेज गेंदबाज ने 2025-26 सत्र में तीनों प्रारूपों में लगातार असर छोड़ा।
रणजी ट्रॉफी में मोहम्मद शमी ने सात मैचों में 37 विकेट लिए और बंगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। विजय हजारे ट्रॉफी में उनके नाम सात मैचों में 15 विकेट रहे, जबकि सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने सात मैचों में 16 विकेट लिए।
इस प्रदर्शन से साफ हुआ कि सफेद गेंद के क्रिकेट में भी उनकी धार पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इसके बाद 2026-27 सत्र की शुरुआत दलीप ट्रॉफी में भी उन्होंने शानदार अंदाज में की। ईस्ट जोन ने 14 साल बाद खिताब जीता और शमी ने इस अभियान में सात विकेट हासिल किए।
‘अगले स्तर’ पर मोहम्मद शमी की नजर
दलीप ट्रॉफी फाइनल के बाद शमी का बयान भी उनकी मानसिकता की झलक देता है। उन्होंने कहा था कि इस स्तर पर प्रेरित रहने के लिए कई कारण होते हैं और खिलाड़ी की नजर हमेशा अगले स्तर पर होनी चाहिए। शमी के लिए वह अगला स्तर भारतीय टीम है।
बंगाल के कोच लक्ष्मी रतन शुक्ला भी उनकी वापसी की संभावना को लेकर आशावादी हैं। लक्ष्मी रतन शुक्ला का शमी से रिश्ता उम्र-समूह के क्रिकेट के दिनों से है। उन्होंने बताया कि इस सीजन शमी बंगाल के लिए ऐसे गेंदबाजी कर रहे हैं जैसे कोई युवा खिलाड़ी करता है।
लक्ष्मी रतन शुक्ला ने कहा कि वह चाहते हैं कि मोहम्मद शमी फिर भारत के लिए खेलें और अपने करियर को विराम भी भारतीय टीम के साथ करें। उन्होंने मोहम्मद शमी को विश्व क्रिकेट के महान तेज गेंदबाजों में शामिल बताते हुए कहा कि वह इस सम्मान के हकदार हैं।
बंगाल के लिए खेलने की प्रतिबद्धता भी खास
मोहम्मद शमी की कोशिश सिर्फ व्यक्तिगत वापसी तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय टीम से दूर होने के बावजूद वह बंगाल के लिए घरेलू क्रिकेट में पूरी प्रतिबद्धता के साथ खेल रहे हैं। लक्ष्मी रतन शुक्ला के मुताबिक, मोहम्मद शमी भारत के लिए खेलने की इच्छा जरूर रखते हैं, लेकिन राज्य की टीम के लिए उनकी प्रतिबद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
लक्ष्मी रतन शुक्ला ने मोहम्मद शमी को उस दौर से देखा है जब वह सिर्फ नेट गेंदबाज हुआ करते थे और बाद में उनकी कप्तानी में बंगाल के लिए पदार्पण किया। लक्ष्मी रतन शुक्ला का मानना है कि शमी ने एक खिलाड़ी के रूप में ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी काफी विकास किया है। वह ड्रेसिंग रूम में दूसरे खिलाड़ियों को प्रेरित करते हैं और टीम के लिए उनका अनुभव महत्वपूर्ण है।
भुवनेश्वर से कितनी समान है शमी की कहानी?
भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। भुवनेश्वर ने अपनी वापसी से पहले आईपीएल में लगातार प्रभाव छोड़ा, जबकि मोहम्मद शमी को इस मोर्चे पर अभी खुद को साबित करना बाकी है। भारतीय टीम में तेज गेंदबाजों के बीच प्रतिस्पर्धा भी पहले से ज्यादा कठिन है।
फिर भी भुवनेश्वर की वापसी ने एक बात साफ कर दी है कि राष्ट्रीय टीम से लंबे समय तक बाहर रहने के बाद भी वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता। प्रदर्शन, फिटनेस और सही समय पर मौके का इस्तेमाल किसी भी खिलाड़ी की कहानी बदल सकता है।
मोहम्मद शमी के पास फिलहाल घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन का मजबूत आधार है। रणजी ट्रॉफी के 37 विकेट से लेकर सफेद गेंद के टूर्नामेंटों और दलीप ट्रॉफी तक उनका रिकॉर्ड बताता है कि वह अभी प्रतिस्पर्धा में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं।
अब अगली परीक्षा आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में इसी निरंतरता को बनाए रखने की होगी। शमी अगर अपनी लय बरकरार रखते हैं और टी20 में फिर से प्रभाव छोड़ते हैं तो भुवनेश्वर की वापसी उनके लिए सिर्फ एक प्रेरक कहानी नहीं रहेगी। वह यह उदाहरण भी बन सकती है कि टीम इंडिया का दरवाजा अनुभवी खिलाड़ियों के लिए पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
मोहम्मद शमी का घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन
- 2025-26 रणजी ट्रॉफी में शमी ने 7 मैचों में 37 विकेट लिए।
- बंगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
- विजय हजारे ट्रॉफी में सात मुकाबलों में 15 विकेट चटकाए।
- सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 7 मैच में 16 विकेट हासिल किए।
- 2026-27 दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की 14 साल बाद खिताबी जीत में 7 विकेट लिए।