पदक के लिए परिवार और दोस्तों का दबाव खत्म, अब खुलकर खेलूंगा: भाला फेंक एथलीट रोहित

एशियाई खेलों में भाला फेंक का कांस्य पदक जीतकर रोहित यादव ने वर्षों से झेल रहे दबाव से राहत महसूस करते हुए कहा कि वह अब बिना किसी दबाव के खुलकर खेल सकेंगे।

पच्चीस वर्षीय रोहित ने सोमवार को बारिश से प्रभावित मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में 84.35 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता।

श्रीलंका के स्टार रुमेश पाथिरागे ने 88.55 मीटर के प्रयास से स्वर्ण, जबकि भारत के ही यशवीर सिंह ने 85.72 मीटर के साथ रजत पदक हासिल किया।

रोहित ने पदक जीतने के बाद कहा, ”मैंने इससे पहले किसी बड़ी चैंपियनशिप में पदक नहीं जीता था। किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में यह मेरा पहला पदक है। मैं बहुत खुश हूं। आखिरकार मेरा खाता खुल गया।”

रोहित ने कहा, ”मैं ऐसे परिवार से आता हूं, जहां खेलों का माहौल नहीं है। इसलिए घर में लोग कहते थे, ‘तुम इतने साल से इतनी मेहनत कर रहे हो, लेकिन कोई पदक नहीं जीत पाए। आखिर तुम्हारे पास है क्या।”

उन्होंने कहा, ”परिवार और दोस्तों की ओर से मुझ पर जो दबाव था, वह इस पदक के बाद अब खत्म हो गया है। मैं कई वर्षों से बहुत दबाव में था। मुझे नहीं पता कि बड़े पदक जीतने से मैं बार-बार क्यों चूक जाता था। लेकिन एशियाई खेलों के इस पदक के बाद अब मैं बिना किसी दबाव के खेलूंगा। मैं खुलकर प्रतिस्पर्धा करूंगा।”

रोहित का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 87.68 मीटर है। जून में भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में 87.05 मीटर के शानदार प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीतने के बाद भी लगातार बड़े प्रयास नहीं कर पाने पर उन्होंने निराशा जताई थी। यही कमी उन्हें बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक से दूर करती रही थी।

Leave a Comment