धर्म और संस्कृति की नगरी काशी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आधुनिक खेल और प्राचीन परंपरा के अद्भुत संगम को दर्शाती है. मंगलवार को रामापुरा स्थित जयनारायण इंटर कॉलेज के मैदान पर ‘संस्कृत बटुक क्रिकेट प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया. यहां खिलाड़ियों का पहनावा जर्सी नहीं, बल्कि पारंपरिक धोती और कुर्ता था, और कमेंट्री अंग्रेजी के बजाय शुद्ध संस्कृत में गूंज रही थी.
शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 82वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण इसकी कमेंट्री रही. जब कमेंटेटर ने कहा- एकः तेजस्वी पुलशॉट्, कन्दुकं आकाश मार्गेन गच्छन, सीमारेखात: बहिर्गमन. षड धावनांका: लब्धा:” (एक शानदार पुल शॉट और गेंद हवा में सीमा रेखा के बाहर, छह रन), तो पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा. इस अनूठी संस्कृत कमेंट्री की सराहना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी कर चुके हैं.
टीका-त्रिपुंड लगाकर मैदान में उतरे खिलाड़ी
इस टूर्नामेंट में चार प्रमुख टीमों ने हिस्सा लिया. जिनमें, शास्त्रार्थ महाविद्यालय, इंटरनेशनल चन्द्रमौली चेरिटेबल ट्रस्ट, स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ और चिदानन्द संस्कृत विद्यालय शामिल रहे.
मैदान पर व्याकरण शास्त्र के विद्वान डॉ. शेषनारायण मिश्र और वेद आचार्य विकास दीक्षित ने अपनी संस्कृत कमेंट्री से समां बांध दिया. खिलाड़ियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में जिस चपलता के साथ डाइव लगाई और रन चुराए, उसे देखकर दर्शक दंग रह गए.
वेदांती वेद विद्यापीठ ने जीता खिताब
प्रतियोगिता का रोमांचक फाइनल मुकाबला शास्त्रार्थ महाविद्यालय और स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ के बीच खेला गया. फाइनल मैच में स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंटरनेशनल चंद्रमौली ट्रस्ट को आठ विकेट से करारी शिकस्त दी और चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम की. यह आयोजन न केवल खेल के प्रति उत्साह जगाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि संस्कृत केवल कर्मकांड की भाषा नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में जीवंत और प्रासंगिक है.