चौथे टी20 मैच से टीम मैनेजमेंट ने पावरप्ले में 118 रन ठोककर इतिहास रचने वाली जोड़ी को किया आउट, रिजल्ट न्यूजीलैंड ने 87 रनों से हारा मुकाबला

नई दिल्ली। ऑकलैंड में खेले चौथे टी20 के दौरान टीम इंडिया (Team India) के मैनेजमेंट के फैसले ने बड़े सवाल खड़े कर दिए, जिस वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) के साथ मिलकर पिछले मैच में पावरप्ले में 118 रन ठोककर इतिहास रचा, उसे ही प्लेइंग-11 से बाहर कर दिया गया।

उसके बाद न्यूजीलैंड टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 260 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। उसके सामने टीम इंडिया (Team India) की बल्लेबाजी का ऐसा बंटाधार हुआ कि पहले ही ओवर में 2 विकेट गिर गए और जीत की उम्मीदों का दम निकल गया। अब सवाल उठता है कि आखिर यह कैसी आक्रामक सोच है, जिसमें अपने सबसे विस्फोटक हथियार को ही बाहर बैठा दिया जाए?

न्यूजीलैंड ने 260 रनों का पहाड़-सा लक्ष्य खड़ा किया तो भारतीय बल्लेबाजों के हाथ-पांव फूल गए। मेजबान टीम ने 87 रनों से ऐसी धुलाई की कि टीम इंडिया लक्ष्य के आसपास भी नहीं फटक सकी। 4-0 का सपना देखने निकली भारतीय टीम (Team India) को हार का कड़वा घूंट पीना पड़ा। गौतम गंभीर को आक्रामक क्रिकेट पसंद है। उनकी टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करने से पीछे नहीं हटती। बल्लेबाजों को खुलकर खेलने की छूट है। गेंदबाजों से भी विकेट लेने की उम्मीद की जाती है, लेकिन आक्रामकता और अंधाधुंध प्रयोग के बीच एक बारीक अंतर होता है. ऑकलैंड में टीम मैनेजमेंट शायद यही अंतर भूल गया।

भारत पहले ही सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त ले चुका था। चौथा मुकाबला जीतकर 4-0 की बढ़त बनाने का मौका था। ऐसे में टीम के पास अपने सफल संयोजन को आजमाने का अच्छा अवसर था, लेकिन गंभीर और उनके सहयोगियों ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सबसे ज्यादा हैरान किया।

जिसने इतिहास रचा, उसी को किया बाहर !

पिछले मुकाबले में अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) और वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की जमकर खबर ली थी। दोनों ने पावरप्ले के 6 ओवरों में 118 रन बना दिए। टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में किसी भी टीम का यह सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर था। यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था।यह उस बल्लेबाजी संयोजन की ताकत का प्रमाण था, जिसने विपक्षी टीम को शुरुआती ओवरों में ही मुकाबले से बाहर धकेल दिया था। वैभव और अभिषेक एक-दूसरे के खेल को समझते हुए गेंदबाजों पर टूट रहे थे। लेकिन अगले ही मुकाबले में इस जोड़ी को तोड़ दिया गया। वैभव बाहर और ईशान किशन अंदर। सवाल ईशान की काबिलियत का नहीं है। वह भी मैच जिताने की क्षमता रखते हैं। सवाल यह है कि आखिर वैभव को ही बाहर करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पिछले मैच का रिकॉर्ड प्रदर्शन टीम मैनेजमेंट के लिए इतना भी मायने नहीं रखता? क्या टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ी को हर मैच में खुद को साबित करना होगा, लेकिन जगह बचाने के लिए एक ऐतिहासिक प्रदर्शन भी काफी नहीं होगा? गंभीर से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि जब कोई बल्लेबाजी जोड़ी रिकॉर्ड बना रही हो, तो उसे तोड़ने का आधार क्या था?

कप्तान अय्यर की कहां गई ‘निर्दयी’ क्रिकेट वाली बात ?

टॉस के समय कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा, कि हम कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते। सीरीज जीत चुके हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमारा आधा काम ही पूरा हुआ है। निर्दयी बने रहना जरूरी है। कप्तान की बात सुनने में शानदार थी, लेकिन निर्दयी क्रिकेट सिर्फ बयान देने से नहीं खेला जाता। इसके लिए फैसलों में भी स्पष्टता चाहिए। अगर टीम का लक्ष्य विपक्ष को कोई मौका नहीं देना है तो फिर पिछले मैच में विपक्ष को ध्वस्त करने वाली ओपनिंग जोड़ी को क्यों तोड़ा गया? अय्यर कप्तान हैं। प्लेइंग-11 के फैसले में कोच और कप्तान की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। इसलिए इस बदलाव पर कप्तान भी सवालों से बच नहीं सकते। क्या उन्होंने वैभव को बाहर करने के फैसले का समर्थन किया? क्या उन्हें नहीं लगा कि 118 रनों की साझेदारी करने वाली जोड़ी को बरकरार रखना चाहिए? कप्तान का काम सिर्फ टॉस जीतकर गेंदबाजी या बल्लेबाजी चुनना नहीं है। मैदान पर टीम की रणनीति और खिलाड़ियों के भरोसे की जिम्मेदारी भी उसी की होती है। जब आप निर्दयी क्रिकेट की बात करते हैं तो फिर अपने सफल खिलाड़ियों के प्रति भी उतनी ही स्पष्टता दिखानी होगी।

260 रन पड़े तो याद आई आक्रामक बल्लेबाजी?

न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 7 विकेट पर 259 रन बनाए। ग्लेन फिलिप्स ने 49 गेंदों पर 107 रन ठोक दिए। माइकल ब्रेसवेल ने 25 गेंदों पर 65 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

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