कभी क्रिकेट छोड़कर कनाडा में बसने का बना लिया था मन, पिता के समझाने पर बदला फैसला; अब टीम इंडिया का हिस्सा हैं नमन धीर

भारतीय टीम में ऐसे क्रिकेटर्स की कोई कमी नहीं रही है जिन्होंने तमाम असफलताओं से पार पाकर टीम में जगह बनाई और अपने प्रदर्शन के दम पर सफलता पाई। इन क्रिकेटर्स में एक नाम नमन धीर का भी है जो पंजाब के छोटे से शहर फरीदकोट से हैं।

फरीदकोट से भारतीय क्रिकेट टीम की नीली जर्सी पहनने तक का नमन धीर का सफर प्रेरित करने वाला है। नमन धीर ने असफलता के कई साल देखे, लेकिन उन्होंने धैर्य का साथ नहीं छोड़ा और आखिरकार भारतीय टीम में जगह बनाने में सफल रहे।

मेडिकल दुकान पर काम करते थे नमनधीर के पिता

नमन धीर का जन्म 31 दिसंबर 1999 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था, लेकिन उनका परिवार पंजाब के फरीदकोट में आ गया और नमन के पिता नरेश धीर फरीदकोट में एक छोटी सी मेडिकल दुकान पर काम करते थे जहां उनकी महीने की कमाई करीब दस हजार रुपये थी। इतने कम पैसों में परिवार चलाना नमन के पिता के लिए काफी चुनौतीपूर्ण था और बेटे की क्रिकेट कोचिंग का खर्चा उठाना किसी पहाड़ से कम नहीं थे, लेकिन नमन के भीतर क्रिकेट के प्रति जुनून को देखकर उनके पिता और नाना (धर्मपाल सेठी) ने हर संभव प्रयास किया कि उनके बेटे के सपने पैसों की वजह से ना टूटे।

ताने मारते थे नमन के परिचित

नमन धीर जब छोटे थे तब अपने पिता के साथ प्रैक्टिस के लिए जाते थे। उस वक्त नमन धीर के घर के आस-पास रहने वाले लोग साथ ही जो परिचित थे वो अक्सर उन्हें ताने मारते थे। लोग कहते थे कि फरीदकोट जैसे छोटे शहर से तुम्हारा बेटा कौन सा भारतीय टीम में चला जाएगा और तुम अपने बेटे के भविष्य को बर्बाद कर रहे हो, लेकिन नमन के पिता ने इन तानों का जवाब कभी बहस से नहीं दिया। वो शांत रहकर अपने बेटे से कहते थे कि आज जो ताने दे रहे हैं वो तब तालियां बजाएंगे जब तुम्हें टीवी पर लंबे-लबे छक्के लगाते हुए देखेंगे।

नमन ने कनाडा जाने का बना लिया था मन

नमन ने पंजाब के लिए अंडर-16 क्रिकेट खेला और अपनी प्रतिभा भी दिखाई, लेकिन इसके बाद उनके जीवन में एक लंबा और कठिन समय आया। अगले 6 से 7 वर्षों तक उन्हें चयनकर्ताओं द्वारा लगातार नजरअंदाज किया गया साथ ही कोई बड़ा मंच न मिलने साथ ही घरेलू सर्किट में मौका न मिल पाने के कारण नमन पूरी तरह टूट चुके थे। साल 2022 की शुरुआत में उन्होंने क्रिकेट से संन्यास लेने और खेल को हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना लिया। उनकी बहन कनाडा के एडमंटन शहर में रहती थीं और नमन ने भी क्रिकेट का बल्ला छोड़कर कनाडा शिफ्ट होने का मन बना लिया था।

पिता की सलाह ने नमन ने बदला फैसला

नमन धीर जब कनाडा जाने के लिए तैयार हो रहे थे तब उनके पिता ने उनका हाथ पकड़ा और उनसे केवल एक साल और मांगा। उन्होंने नमन से कहा कि तुम सिर्फ एक साल और दे दो, पूरी ताकत लगा दो, अगर इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ तो जो तुम कहोगे वही होगा। पिता से इस सलाह के बाद नमन ने दिन-रात मेहनत करनी शुरू कर दी और दिसंबर2022 में नमन धीर को पंजाब की तरफ से रणजी में डेब्यू करने का मौका मिला। उन्होंने रणजी के इस सीजन और फिर सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर सबको प्रभावित किया।

मुंबई की टीम ने पहली बार खरीदा

नमन की आक्रामक बल्लेबाजी और ऑलराउंडर क्षमता पर मुंबई इंडियंस की नजर पड़ी। 2024 की आइपीएल नीलामी में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 20 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा और उन्होंने अपने डेब्यू मैच में ही नंबर 3 पर आकर बड़े शॉट लगाए और अपनी पहचान बनाई। आगे चलकर आइपीएल में उनका प्रदर्शन इतना शानदार रहा कि 2025 की मेगा नीलामी में मुंबई इंडियंस ने आरटीएम कार्ड का इस्तेमाल करते हुए उन्हें 5.25 करोड़ की बड़ी रकम में वापस खरीदा।

वेस्टइंडीज के खिलाफ किया डेब्यू

नमन धीर की मेहनत रंग लाई और आखिकरकार सितंबर 2026 में वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए उन्हें भारतीय वनडे टीम और टी20 सीरीज के लिए टी20 टीम में शामिल किया गया। जब नमन धीर का चयन भारतीय टीम में हुआ तब उन्होंने अपने पिता को फोन किया जो इस खबर को सुनने के बाद रो पड़े। 6 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने डेब्यू टी20 मैच में नमन धीर ने 3 विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। नमन धीर का सफर यह साबित करता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों अगर ईमानदारी से मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।

आर्यवीर सहवाग का अर्धशतक, अर्णव बग्गा की सेंचुरी; दिल्ली ने 341 रन बनाकर गुजरात को 3 विकेट से हराया; वेद की 163 रन की पारी बेकार

दिल्ली अंडर 19 टीम के कप्तान आर्यवीर सहवाग ने गुजरात के खिलाफ अर्धशतक लगाया जबकि अर्णव बग्गा ने शतकीय पारी खेली और अपनी टीम को 3 विकेट से जीत दिलाई।

Leave a Comment