अगरकर का भारतीय टीम से क्यों छूटा साथ: रोहित के भविष्य को लेकर ड्रामा, लक्ष्मण के साथ मतभेद

भारत के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रहा ड्रामा और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ बढ़ते मतभेद के कारण 2027 वनडे वर्ल्ड कप से पहले मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की राहें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से अलग हो गईं।

यही कारण था कि वह मुंबई में इंग्लैंड सीरीज की हार और आगे की राह पर चर्चा के लिए हुई जरूरी रिव्यू मीटिंग में शामिल भी नहीं हुए।

पीटीआई के अनुसार बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने उनका बचाव किया, लेकिन एक लेवल पर बोर्ड में कई लोगों को लगा कि अगरकर को इतनी जरूरी मीटिंग में आना चाहिए था। हालांकि, वह साउथ अफ्रीका में वनडे वर्ल्ड कप के आखिर तक बने रहना चाहते थे, लेकिन पिछले महीने बीसीसीआई ने बदलाव के संकेत दिए।

अगरकर का रिश्ता हुआ खराब

आमतौर पर बीसीसीआई ऐसे किसी व्यक्ति को जाने नहीं देना चाहेगा जिसके पैनल ने पिछले तीन सालों में चार आईसीसी व्हाइट बॉल टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली टीमों को चुना हो। तीन ट्रॉफी (दो टी20 वर्ल्ड टाइटल और एक चैंपियंस ट्रॉफी) जीती हों, लेकिन फिर अगरकर और मौजूदा बीसीसीआई हुक्मरानों के रिश्ते कुछ वजहों से खराब हो गए।

रोहित के भविष्य पर बीसीसीआई का बयान

इंग्लैंड के खिलाफ व्हाइट बॉल सीरीज से ठीक पहले की बात है जब अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति ने भारतीय टीम प्रबंधन और बीसीसीआई में मुख्य फैसले लेने वालों के साथ मिलकर लॉर्ड्स वनडे के बाद अनुभवी ओपनर रोहित शर्मा को बाहर करने का फैसला किया। इसके अनुसार एक सामूहिक फैसला लिया गया और रोहित के करीबी दोस्त साउथ जोन से चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा से दो बार के आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाले पूर्व कप्तान को यह फैसला बताने” के लिए कहा गया।

रोहित ने किया बड़े पदाधिकारी से संपर्क

रोहित 2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं। उन्हें यह संदेश दिया गया तो वे बिल्कुल खुश नहीं थे। उन्होंने एक बहुत ताकतवर पदाधिकारी से बात की और मुख्य चयनकर्ता के साथ किए जा रहे बर्ताव पर अपनी शंकाएं जाहिर कीं। अगरकर के करीबियों के अनुसार जब बीसीसीआई ने रोहित का समर्थन करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया और लॉर्ड्स के बाद उनके संन्यास की बातों को खारिज कर दिया तो वह और नाराज हो गए।

बड़े नामों पर फैसला

मामले की जानकारी रखने वाले बीसीसीआई के एक सीनियर पदाधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘शायद यही वो दिन था जब अजीत को पता चल गया था कि उनके लिए आगे पद पर बने रहना बहुत मुश्किल होगा। असल में उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि बीसीसीआई ने मीडिया में कोई बयान जारी किया है। वह समझ गए थे कि आगे चलकर बड़े नामों पर फैसला लेना उनका अधिकार नहीं होगा।’

बीसीसीआई चाहता था रोहित के भविष्य को लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़ें

अगरकर को करीब से जानने वाले लोग कहते हैं कि जब क्रिकेट के फैसलों की बात आती है तो हेड कोच गौतम गंभीर की तरह वे ईमानदारी से फैसले लेते हैं। कई बार वह फैसले काम करते हैं और कई बार नहीं करते। बीसीसीआई चाहता था कि वह रोहित के भविष्य को लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़ें, जबकि उन्हें लगा कि अगर यशस्वी जायसवाल को वनडे वर्ल्ड कप खेलना है तो उन्हें माहौल में ढलने के लिए लगभग 20 वनडे मैच देने होंगे।

भारतीय क्रिकेट में मेगास्टार्स पर चयन समिति नहीं लेती फैसला

रोहित के पक्ष में तर्क यह था कि वह हर तीसरे वनडे में रन बना रहे थे, जिसे बुरा नहीं माना जा सकता, जबकि अगरकर को शायद लगा कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उम्रदराज रोहित अफ्रीकी परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे। इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी था कि भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार खिलाड़ियों के संन्यास या भविष्य पर अंतिम फैसला वास्तव में किसका होना चाहिए? अगरकर के लिए यह चयन समिति के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा था, जबकि भारतीय क्रिकेट की परंपरा में बड़े सितारों से जुड़े ऐसे फैसलों में बोर्ड प्रशासन की भूमिका हमेशा प्रभावी रही है।

अगरकर और लक्ष्मण में मतभेद

अगरकर और लक्ष्मण लंबे समय तक भारतीय टीम में साथ खेल चुके थे, लेकिन बाद में नीतिगत मामलों पर दोनों के बीच मतभेद गहराते गए। खासकर चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए टीम के कार्यक्रम को लेकर दोनों की राय अलग-अलग थी। सीओई से जुड़े राज्य टीम के एक पूर्व कोच के अनुसार, ‘लक्ष्मण हमेशा सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम को मैदान पर उतारने के पक्षधर रहे हैं। हालांकि, अगरकर को यह समझना मुश्किल लगा कि एशियाई खेलों जैसे आयोजन में भारत को अपनी पहली पसंद के खिलाड़ियों के साथ खेलने की जरूरत क्यों है।’

भारत ए के कार्यक्रम ने भी दोनों के बीच मतभेद बढ़ाए

हांग्झोउ एशियाई खेलों के दौरान भारत की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ ने की थी, क्योंकि मुख्य टीम वनडे विश्व कप में व्यस्त थी, लेकिन इस बार भारत की वनडे टीम में श्रेयस अय्यर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, इशान किशन और वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। इनमें से कई खिलाड़ी पहली पसंद की टीम का हिस्सा रहे हैं। भारत ए के कार्यक्रम ने भी दोनों के बीच मतभेद बढ़ाए।

भारत ए का कार्यक्रम में टकराव

पुडुचेरी में 22 सितंबर से दो अक्टूबर तक होने वाले दो भारत ए टेस्ट का कार्यक्रम श्रीनगर में होने वाले ईरानी कप से टकरा रहा था। इसके अलावा 24 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच न्यूजीलैंड ए के खिलाफ भारत ए के तीन मैचों का कार्यक्रम भारत की टी20 और वनडे शृंखला से भी टकरा रहा था। भारत ए के कार्यक्रम की जिम्मेदारी सीओई के प्रमुख और क्रिकेट संचालन टीम के पास होती है।

समीक्षा बैठक से पहले रिश्ते काफी बिगड़ गए थे

पहले राहुल द्रविड़ भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं। चोटिल केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों की वापसी को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं होना भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा और असहमति का कारण बना। दूसरी ओर, लक्ष्मण इस बात से भी नाराज बताए गए कि सीओई को उन मामलों के लिए आलोचना झेलनी पड़ रही थी जो पूरी तरह उसके नियंत्रण में नहीं थे। शीर्ष खिलाड़ियों की चोटों की विस्तृत सूची मीडिया में आने के बाद दोनों पक्षों के बीच आपसी भरोसा और कमजोर हुआ। अगरकर ने ऐसे में जब महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया, तब तक रिश्तों में आई दरार काफी गहरी हो चुकी थी। इसके बाद उनका बीसीसीआई से अलग होना महज औपचारिकता भर रह गया।

BCCI की जूनियर चयन समिति के अध्यक्ष हो सकते हैं रमेश पवार

ऑफ स्पिनर रमेश पवार ने भारत के लिए दो टेस्ट और 31 वनडे खेले। उनके पास अलग-अलग लेवल पर कोचिंग का अनुभव है। वह दो बार भारतीय महिला टीम के कोच के तौर पर काम कर चुके हैं। 

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