अंडर-19 एशिया कप की शुरुआत से डेढ़ महीने ही सूर्यवंशी के खिलाफ योजना बना रहे थे उद्दीश सूरी, इस तरह मिला था विकेट

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। पिछले साल दुबई स्थित आईसीसी एकेडमी में भारत के खिलाफ अंडर-19 एशिया कप मुकाबले में अपनी दूसरी ही गेंद पर यूएई के बाएं हाथ के चाइनामैन स्पिनर उद्दीश सूरी को लगा था कि उन्होंने किशोर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को आउट कर दिया है लेकिन उनकी निराशा तब बढ़ गई, जब उनकी गेंद पर मिले कैच का मौका छोड़ दिया गया और सूर्यवंशी को जीवनदान मिल गया।

इसके बाद जो हुआ, वह तबाही जैसा था- सूर्यवंशी ने यूएई के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 95 गेंदों पर 171 रन बनाए, जिसमें 14 छक्के शामिल थे। भारत ने कुल 433/6 का स्कोर खड़ा किया। छह गेंदबाजों को उनके आक्रामक खेल का सामना करना पड़ा। हालांकि, सूरी किसी तरह उनके हमले से बच गए। उन्होंने सूर्यवंशी को 23 गेंदें फेंकीं और कुल 23 रन दिए, जिसमें एक चौका और एक छक्का शामिल था। अपने आखिरी से पहले ओवर में, उन्होंने खतरनाक सूर्यवंशी को बोल्ड भी कर दिया, जो अब भारत की सीनियर टी20 टीम का हिस्सा हैं।

सूरी ने अपने 10 ओवरों में 77 रन देकर 2 विकेट लिए लेकिन सूर्यवंशी के उस तेवर को रोक पाना आज भी क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय है। सूरी के लिए यह कोई इत्तेफाक नहीं था बल्कि इसकी तैयारी काफी समय से चल रही थी।

उद्दीश ने सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के जरिए आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में बताया। यह बातचीत इस साल होने वाले अंडर-19 एशिया कप से पहले हुई, जो गुरुवार से ओमान में शुरू हो रहा है।

उद्दीश ने कहा, “टूर्नामेंट शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले से ही, मैं आगे की योजना बना रहा था। मैं ‘मेनिफेस्टेशन’ (सोची हुई बात को सच करने की प्रक्रिया) में बहुत विश्वास रखता हूं। इसलिए पहले ही सोच लिया था कि मैं ही उनका विकेट लूंगा। पिछले एक-दो महीनों से मैं अपने कोचों – नवीद सर, जहूर सर, नाएल सर और उस समय हमारे एनालिस्ट रहे मनप्रीत सर के साथ काम कर रहा था। मैं उनके वीडियो भी देख रहा था, यह समझने के लिए कि उनकी ताकत क्या है, और मैं उन्हें कहां गेंदबाजी कर सकता हूं ताकि रन न पड़ें, खुद को बचा सकूं और उनका विकेट ले सकूं। इससे मुझे काफी मदद मिली, खासकर एक-दो दिन पहले जब मैं हमारे हेड कोच नवीद सर के साथ बैठा था।”

“मैं उनसे चर्चा कर रहा था कि उनके खिलाफ कैसी गेंदबाजी कर सकता हूं और कैसे उन्हें मेरे खिलाफ रन बनाने के लिए संघर्ष करने पर मजबूर कर सकता हूं। आखिरकार यह काम कर गया और उनका विकेट लेकर मुझे बहुत खुशी हुई। दिन के अंत में यह एक बहुत अच्छा अहसास था।”

उद्दीश को फिर से इसी तरह की तैयारी की जरूरत होगी, और शायद इससे भी ज्यादा। इस साल के अंडर-19 एशिया कप में यूएई को भारत, पाकिस्तान और नेपाल के साथ रखा गया है। सूर्यवंशी के बाद, इस बार भारतीय पुरुष आयु-वर्ग क्रिकेट में अब सभी की निगाहें राहुल द्रविड़ के बेटे अन्वय द्रविड़ और वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर सहवाग पर हैं।

ये दोनों खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ भारत अंडर-19 की हालिया सीरीज जीत का हिस्सा थे और उन्होंने वीनू मांकड़ ट्रॉफी में भी तेज शतक लगाए थे। 10 नवंबर को जब भारत और यूएई का मुकाबला होगा, तो उन्हें कप्तान लक्ष्य रायचंदानी और यशवर्धन सिंह चौहान के खिलाफ भी रणनीति बनानी होगी।

मुकाबला करने और उसमें जीत हासिल करने की यह चाहत उदीश में काफी पहले से है। उन्होंने चार साल की उम्र में अपने पहले कोच शहजाद और प्रशांत के मार्गदर्शन में खेलना शुरू किया था। इसकी शुरुआत ‘कब्स क्रिकेट’ से हुई, जो स्कूलों का एक अंडर-7 टूर्नामेंट है। उनके बड़े भाई तनिष्क ने भी साढ़े पांच साल की उम्र में इसी टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था।

“जैसे-जैसे वह ज्यादा क्रिकेट खेलने लगा, उसे देखकर मुझमें भी इस खेल के प्रति जुनून पैदा होने लगा। जब भी मैं खाली होता, मैं उसके क्रिकेट गियर पहन लेता था। मेरे माता-पिता ने मुझमें यह दिलचस्पी देख ली थी। उन्होंने सोचा, ‘ठीक है, शायद हम इसे किसी एकेडमी में भेजकर देख सकते हैं कि यह कहां तक पहुंचता है।’ फिर आखिरकार चार साल की उम्र में, मेरा चयन उसी टूर्नामेंट के लिए हो गया, जिसमें मेरे भाई ने भी स्कूल की तरफ से हिस्सा लिया था। इसके बाद नियमित रूप से ट्रेनिंग सेशन होते रहे, और फिर मैं पूरी तरह से इस खेल में रम गया। आज मैं जहां हूं, वहीं हूं।”

लेफ्ट-आर्म रिस्ट-स्पिन तक पहुंचने का सफर परिवार के साथ हुई बातचीत का नतीजा था। उद्दीश ने बताया, “मेरे स्कूल के कोच प्रशांत सर मुझे विकेटकीपर बनाना चाहते थे, लेकिन मेरा भाई भी एक विकेटकीपर है। मेरे माता-पिता ने कहा, ‘सर, जरा सोचिए, मेरे दोनों बेटे विकेटकीपर होंगे, तो फिर तो मुकाबला इन्हीं दोनों के बीच हो जाएगा।’ जबकि मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं तेज गेंदबाज (फास्ट बॉलर) या स्पिनर बनूं। इसलिए शुरुआत तेज गेंदबाजी से हुई। फिर मेरे कोच ने कहा, ‘ठीक है, अगर इसे विकेटकीपर नहीं बनाना है, तो तेज गेंदबाज भी मत बनाइए-खासकर यूएई के मौसम को देखते हुए। इसके बजाय, इसकी स्पिन गेंदबाजी पर काम करते हैं।’ यहीं से मेरी स्पिन की यात्रा शुरू हुई। फिर मैं ‘लेफ्ट-आर्म चाइनामैन’ (लेफ्ट-आर्म रिस्ट-स्पिन) में माहिर हो गया।”

आज वह इस कला के दो बेहतरीन खिलाड़ियों को अपना आदर्श मानते हैं। टी20 के लिए, वह नूर अहमद को देखते हैं, जिनकी गति और विविधताओं का इस्तेमाल उन्हें बहुत पसंद है। 50 ओवरों के खेल के लिए, वह कुलदीप यादव को देखते हैं।

उद्दीश ने बताया, “वनडे की बात करें, तो मैं कुलदीप यादव को ज्यादा ध्यान से देखता हूं, क्योंकि नूर अहमद के मुकाबले उनकी गेंद की ‘ट्रैजेक्टरी’ (गेंद का रास्ता) बिल्कुल अलग होती है। इसलिए 50 ओवर के खेल में मैं कुलदीप यादव से सीखता हूं। इससे बल्लेबाज के दिमाग में उलझन पैदा हो सकती है-वह सोचने पर मजबूर हो सकता है कि उसे इस गेंद पर आगे बढ़कर शॉट खेलना चाहिए या नहीं। अगर वह शॉट खेलने में एक मिलीसेकंड की भी देरी करता है, तो मुझे लगता है कि मुझे विकेट मिल सकता है। इसलिए, फॉर्मेट के हिसाब से, मैं अपनी गेंदबाजी पर ध्यान देता हूं। लेफ्ट-आर्म चाइनामैन गेंदबाजों में कुलदीप यादव और नूर अहमद मेरी पहली पसंद हैं।”

विकेटकीपर और उद्दीश के बड़े भाई तनिष ने यूएई के लिए 13 वनडे और 14 टी20 मैच खेले हैं। वह अपने छोटे भाई के लिए एक अच्छे सलाहकार की भूमिका निभाते हैं। दोनों लगभग हर दिन बात करते हैं। यहां ट्रेनिंग सेशन से पहले, तनिष ने उद्दीश को वहां के हालात के बारे में बताया कि उसे किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

उनकी बातचीत में यह भी शामिल होता है कि उस दिन क्या गलत हुआ और क्रिकेट के अलावा जिंदगी के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा होती है। लेकिन नेट्स में तनिष, उद्दीश के साथ सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। उद्दीश ने बताया, “जब हम एक साथ ट्रेनिंग करते हैं, तो चाहे मैं उसे गेंदबाजी करूं या वह मुझे थ्रोडाउन दे, वह हमेशा मुझे बताता है कि मैं अपनी किस स्किल पर काम कर सकता हूं, या अपनी गुगली को थोड़ा और तेज फेंकने की कोशिश कर सकता हूं। इससे मुझे अपनी गति बढ़ाने, ज्यादा ड्रिफ्ट और टर्न पाने में मदद मिलती है, जो मेरे करियर के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसलिए, मुझे लगता है कि मेरे करियर पर मेरे भाई का बहुत बड़ा प्रभाव है।”

इन दोनों भाइयों के पीछे उनके माता-पिता का अटूट समर्थन है। “मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसे माता-पिता मिले हैं। बचपन से ही, उन्होंने मुझे और तनिष को हमेशा बहुत सपोर्ट किया है। उनके बिना, हम आज जहां हैं, वहां नहीं पहुंच पाते। ऐसे माता-पिता पाकर मैं ईश्वर का बहुत आभारी हूं। उन्होंने हमारे लिए अपनी सोशल लाइफ, सामाजिक कार्यक्रमों और पार्टियों का त्याग कर दिया। वे बस हमारे मैचों के पीछे-पीछे भागते रहते थे, चाहे मौसम कैसा भी हो। खासकर यूएई में, गर्मियों के दौरान हालात बहुत मुश्किल होते हैं। तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है लेकिन अंडर-16 और अंडर-19 के दिनों में, मेरे माता-पिता हमेशा बाउंड्री रोप के पास बैठे रहते थे, चाहे कितनी भी गर्मी क्यों न हो।”

बाउंड्री के पास से वे उन्हें गलत शॉट न खेलने की सलाह देते थे और सिर्फ उनकी मौजूदगी से ही सूरी भाइयों का आत्मविश्वास बढ़ जाता था। उदीश का अपना शेड्यूल भी उनके शेड्यूल से कम व्यस्त नहीं है। पारिवारिक व्यवसाय को ध्यान में रखते हुए, सूरी ने स्कूल में विज्ञान विषय चुना था और अब वे यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

उनका दिन पांच से छह घंटे की पढ़ाई और इतने ही घंटे की ट्रेनिंग में बंट जाता है। यूनिवर्सिटी में चीजें थोड़ी आसान हो गई हैं, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि आगे चलकर कोर्स और कठिन हो जाएगा। वे बताते हैं कि प्रतिस्पर्धी खेलों की एक समय-सीमा होती है।

“जाहिर है, खेल खत्म होने के बाद भी आपकी योग्यता और पढ़ाई आपको जीवन में बेहतर मुकाम तक पहुंचने में मदद करेगी। इसलिए पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। मैं इसे बहुत अच्छे से कर रहा हूं और आगे भी ऐसा ही करता रहूंगा।”

एशिया कप के बाद, सूरी सीधे अबू धाबी टी10 लीग में हिस्सा लेंगे। हालांकि, उससे पहले भारत, नेपाल और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले हैं। अमीरात डी50 और डी10 टूर्नामेंट खेलकर आ रहे सूरी बिल्कुल भी घबराए हुए नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, हम एक अच्छी चुनौती की तलाश में हैं। पूरी टीम इसी तरह की चुनौती के लिए तैयार है। हम एक ऐसे ग्रुप में हैं जिसमें भारत और पाकिस्तान जैसी टीमें शामिल हैं, जो युवा क्रिकेट में एशिया की सबसे बेहतरीन टीमों में गिनी जाती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हमने पिछले साढ़े तीन महीनों से यूएई में फिर से ट्रेनिंग शुरू कर दी है। एक उभरते हुए खिलाड़ी के तौर पर यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवा क्रिकेट के जरिए आप अपना आधार तैयार कर सकते हैं और राष्ट्रीय टीम में जगह बना सकते हैं। यहां अच्छा प्रदर्शन करें, रन बनाएं और देश के लिए योगदान दें। मेरे और मेरी टीम के साथियों के लिए यह बहुत रोमांचक है कि हमें इस एशिया कप में खेलने और अपनी टीम तथा देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करने का मौका मिला है।”

उन्होंने सुविधाओं के लिए अमीरात क्रिकेट बोर्ड को और तैयारी में मदद के लिए हेड कोच नवीद अहमद, असिस्टेंट कोच जहूर खान और टीम मैनेजर नाएल तनवीर को धन्यवाद दिया। “उन्होंने बहुत मेहनत और लगन से काम किया है। यूएई में हालात काफी मुश्किल हैं। वहां बहुत गर्मी थी लेकिन हमने इसके लिए जमकर ट्रेनिंग की है। एक टीम के तौर पर हम काफी मजबूत हैं। उम्मीद है कि हम दोनों टीमों को हराकर या कम से कम एक को हराकर सभी को चौंका देंगे, सेमीफाइनल में पहुंचेंगे और आगे तक जाएंगे।”

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