नई दिल्लीः हार्दिक पंड्या के लिए यह केवल एक और सीरीज से बाहर होने का मामला नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में उनकी फिटनेस लगातार सवालों के घेरे में रही है. वह कुछ मैच या सीरीज खेलने के बाद फिर चोटिल होते हैं और उन्हें रिहैबिलिटेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जाना पड़ता है.
बुमराह के साथ पंड्या भी अहम कड़ी
मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब 2027 वनडे विश्व कप के लिए सही संयोजन तैयार करने की है. जसप्रीत बुमराह का वर्कलोड मैनेजमेंट पहले ही महत्वपूर्ण मुद्दा है और अब पंड्या की फिटनेस ने दूसरी बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है. बुमराह और पंड्या केवल एक तेज गेंदबाज और एक ऑलराउंडर नहीं हैं.
दोनों की मौजूदगी विपक्षी टीम की रणनीति और बल्लेबाजों के रवैये पर भी असर डालती है. पंड्या की खासियत यह है कि वह बल्लेबाजी के साथ तेज गेंदबाजी का विकल्प देते हैं. अक्षर पटेल, रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर जैसे स्पिन ऑलराउंडर विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पंड्या जैसा तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर भारतीय टीम के संयोजन में अलग संतुलन पैदा करता है.
विकल्प हैं, लेकिन सवाल भी कम नहीं
पंड्या की अनुपस्थिति में नीतीश कुमार रेड्डी, शिवम दुबे, वेंकटेश अय्यर और शार्दूल ठाकुर जैसे नामों पर विचार किया जा सकता है. मगर सवाल यह है कि इनमें से कौन वनडे में लगातार पर्याप्त ओवर गेंदबाजी करने के साथ बल्लेबाजी का भी संतुलन दे सकता है. यही वह सवाल है जिसका जवाब चयनकर्ताओं को जल्द तलाशना होगा.
संयोजन को चाहिए पर्याप्त मैच टाइम
विश्व कप के लिए जिस संभावित प्लेइंग इलेवन पर टीम प्रबंधन भरोसा करना चाहता है, उसे पर्याप्त मैच खेलने का मौका मिलना जरूरी है. यदि पंड्या और बुमराह लगातार उपलब्ध नहीं रहते, तो संयोजन को बार-बार बदलना पड़ेगा और टीम को स्थिरता हासिल करने में मुश्किल होगी. ऐसे में चयनकर्ताओं, मुख्य कोच और कप्तान के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है.