टीम इंडिया में लौटने के लिए मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) को क्या करना होगा? 2025 के बाद से सिलेक्टर्स जब भी कोई टीम चुनते हैं. ये सवाल लगभग हर बार उठता है. उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद इसका कोई साफ जवाब नहीं मिला है.
शमी आखिरी बार 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी में खेले थे. वो तब टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर्स में से एक थे. फिर भी, इंटरनेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनकी वापसी नहीं हुई है. शमी ने रणजी ट्रॉफी में बंगाल के लिए 7 मैचों में 16.72 के औसत से 37 विकेट चटकाए हैं. उन्होंने 3 बार फाइफर भी लिए हैं. ये दर्शाता है कि रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता कम नहीं हुई है.
सिलेक्शन कमिटी में चेंज भी काम नहीं आया
इन आंकड़ों के बावजूद, अजीत आगरकर की अगुवाई वाली सिलेक्शन कमिटी पूरी तरह कन्विंस्ड नहीं हुई. उन्हें शमी की फिटनेस और मैच के लिए तैयार होने को लेकर संदेह था. हालांकि, शमी ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि वे फिट हैं और खेलने के लिए तैयार हैं.
सिलेक्शन कमिटी के टॉप लीडरशिप में चेंज भी उनके काम नहीं आया. न्यूजीलैंड टूर पर एक बार फिर उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. हालांकि, इस बार एक और अनुभवी खिलाड़ी की वापसी ने सबका ध्यान खींचा. भुवनेश्वर कुमार के सिलेक्शन ने शमी की वापसी के सवाल को और प्रबल कर दिया है. अब आए दिन यही सवाल उठ रहा है कि टीम इंडिया में वापसी के लिए शमी को और क्या करने की जरूरत है?
बॉलिंग कोच ने शमी को लेकर क्या कहा?
भारत के पूर्व बॉलिंग कोच भरत अरुण का मानना है कि इसका जवाब बहुत आसान है. कुछ भी नहीं. इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में, अरुण ने शमी की काबिलियत का समर्थन किया. उनके मुताबिक, शमी का इंटरनेशनल रिकॉर्ड ही उनकी क्षमता का सबूत है. उन्होंने कहा,
शमी को क्या करना चाहिए? इस सवाल के जवाब में मैं यही कहूंगा कि मुझे नहीं लगता कि शमी को खुद को साबित करने की जरूरत है. आप उन्हें या तो उनकी फॉर्म के आधार पर चुनते हैं या नहीं चुनते हैं. मोहम्मद शमी के मामले में भी यही बात लागू होती है. भारतीय टीम में चुने जाने के लिए शमी को यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि वह क्या कर सकते हैं. उन्होंने सभी फॉर्मेट में खुद को काफी साबित किया है.
अरुण ने आगे कहा,
शमी ने नए डोमेस्टिक सीजन में भी अपनी दावेदारी पेश करने में कोई समय बर्बाद नहीं किया. उन्होंने दिल्ली के खिलाफ चार विकेट लेकर रणजी ट्रॉफी कैंपेन की शुरुआत की. उन्होंने अपने इस परफॉर्मेंस से एक बार फिर यह याद दिलाया कि वह टीम के लिए क्या कर सकते हैं.
भुवी की फिटनेस बड़ा सवाल
शमी एक तरफ मौके का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, भुवनेश्वर की वापसी ने एक और बहस छेड़ दी है. क्या भुवी 2027 ODI वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया की प्लानिंग का हिस्सा बन सकते हैं?
अश्विन ने हाल ही में कहा था कि भुवनेश्वर ODI वर्ल्ड कप स्क्वॉड में जगह बना सकते हैं. उनका हालिया IPL रिकॉर्ड उनकी दावेदारी मजबूत करता है. 36 साल के पेसर ने 2025 में RCB के लिए 17 विकेट लिए थे. वहीं, इस सीजन उन्होंने 28 और विकेट अपने नाम किए. दोनों सीजन मिलाकर उन्होंने कुल 45 विकेट चटकाए. यानी RCB की लगातार दो IPL ट्रॉफी जीत में उनका बहुत अहम योगदान था. इससे यह भी साबित होता है कि वह T20 क्रिकेट में अभी भी एक दमदार खिलाड़ी हैं.
हालांकि, अरुण का मानना है कि बहुत आगे की सोचना जल्दबाजी होगी. उनके लिए, भुवनेश्वर का हालिया प्रदर्शन और लंबे समय तक अपनी फिटनेस बनाए रखने की क्षमता ही यह तय करेगी कि क्या वह ODI वर्ल्ड कप के लिए दावेदारी में बने रह सकते हैं या नहीं. उन्होंने कहा,
जहां तक भुवनेश्वर कुमार की बात है, तो मैं बहुत आगे की नहीं सोचूंगा. हां, उन्हें उनकी फॉर्म के आधार पर चुना गया है. वह एक शानदार बॉलर हैं. हर कोई जानता है कि वह क्या कर सकते हैं? अभी वह कैसा प्रदर्शन करते हैं? यही असल में मायने रखेगा.
अरुण ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे बड़ी चुनौती यह पक्का करना होगा कि भुवनेश्वर 2027 ODI वर्ल्ड कप तक फिट और उपलब्ध रहें. उनका मानना है कि टीम इंडिया को लंबी प्लानिंग पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उससे बेहतर यही होगा कि वो न्यूजीलैंड दौरे पर फोकस करें. अरुण ने आगे कहा कि सबसे जरूरी ये समझना है कि अभी वर्ल्ड कप में एक साल है. ऐसे में ये देखना होगा कि वो कितने फिट रहते हैं. अभी उनका फोकस वर्तमान पर होगा. न्यूजीलैंड का दौरा सबसे बड़ी परीक्षा है. उसके बाद ही तय होगा कि आगे क्या होगा.
न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की 5 मैचों की T20I सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू हो रही है. इसके बाद 5 ODI और 2 टेस्ट मुकाबले होने हैं. ODI सीरीज 4 नवंबर से और टेस्ट सीरीज 19 नवंबर को शुरू होगी.