क्रिकेट के नियमों और भावना के संरक्षक मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के क्रिकेट प्रमुख फ्रेजर स्टीवर्ट ने कहा कि फ्रेंचाइजी आधारित टी20 लीग खेलने के लिए क्रिकेटरों का टेस्ट से जल्दी संन्यास लेना चिंता का विषय है लेकिन उन्हें कम खेलकर अधिक पैसा कमाने की चाह के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
स्टीवर्ट ने दिन के टेस्ट में गुलाबी गेंद के इस्तेमाल को प्रयोग के लिए अनुमति देने के आईसीसी के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे पारंपरिक प्रारूप में रुचि फिर पैदा होगी। स्टीवर्ट ने कहा, ”आईसीसी और मेरा मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज में दोनों देशों को तय करने का अधिकार होना चाहिए कि क्या वे गुलाबी गेंद का इस्तेमाल करना चाहते हैं।”
‘खिलाड़ियों को कम खेलकर अधिक…’
स्टीवर्ट कर्नाटक क्रिकेट अंपायर संघ के साथ साझेदारी में एमसीसी के ‘लॉ आफ क्रिकेट’ ऐप के कन्नड़ संस्करण के लांच के लिए बेंगलुरु में मौजूद थे। उन्होंने कहा, ”अगर दोनों टीमों को लगता है कि गुलाबी गेंद से खेलने पर खराब मौसम में भी समय का नुकसान नहीं होगा तो यह ठीक है। अधिक समय तक खेलने और अधिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए लिया गया फैसला तर्कसंगत होगा।” उन्होंने यह भी कहा, ”अब क्रिकेटर टेस्ट से जल्दी संन्यास लेने लगे हैं क्योंकि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में अधिक पैसा है। लेकिन इसके लिए खिलाड़ियों को दोष नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें कम खेलकर अधिक पैसा मिल रहा है।” स्टीवर्ट ने कहा, ”यह एमसीसी का नहीं बल्कि आईसीसी का मसला है। हम चाहते हैं कि सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर टेस्ट खेलें।”
‘बल्ले और गेंद के बीच संतुलन अहम’
स्टीवर्ट ने पिछले हफ्ते कहा था कि क्रिकेट में बल्ले और गेंद में संतुलन अहम है और नियमों में ताजा बदलाव का जिक्र किया जिनका मकसद फील्डिंग टीम को भी फायदा पहुंचाना है। दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) द्वारा अंपायरों और क्रिकेट अधिकारियों के लिए विशेष कार्यशाला से इतर उन्होंने कहा कि एमसीसी खेल में संतुलन पर नजर रखे रहेगी क्योंकि खेल का झुकाव बल्लेबाजों की ओर अधिक हो गया है। उन्होंने ‘भाषा’ से कहा था, ”बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे को सीमित करने के उद्देश्य से एमसीसी ने 2017 में बल्ले के लिए निर्धारित अधिकतम आकार में कमी की थी। आधुनिक बल्लेबाजों की बढ़ती ताकत और आक्रामक शैली को देखते हुए बल्ले और गेंद के बीच संतुलित मुकाबला सुनिश्चित करना अब भी महत्वपूर्ण है।”