आखिरी ODI मैच में शतक जड़कर भी निराश हुए KL राहुल, किस बात का रह गया मलाल?

भारतीय मध्यक्रम के बल्लेबाज केएल राहुल ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे में हारने और सीरीज में क्लीन स्वीप ना कर पाने पर निराशा जताई लेकिन साथ ही कहा कि वह मैदान पर समय बिताना चाहते थे।

केएल राहुल इस बात को लेकर हुए निराश

राहुल ने जियो स्टार के ‘हायर क्रिकेट लाइव’ पर बात करते हुए अपनी पारी और इस बारे में खुलकर बात की कि वह मैदान पर कुछ समय क्यों बिताना चाहते थे। उन्होंने कहा, “129 रन बनाकर खुश हूं, लेकिन इस बात से निराश हूं कि हम सीरीज में क्लीन स्वीप नहीं कर पाए। अगर ऐसा कर पाते, तो खुशी का लेवल बहुत ज्यादा होता। फिर भी मैं मैदान पर बल्ले के साथ ज्यादा समय बिताना चाहता था। पिछली बार जब मुझे वनडे क्रिकेट में मिडिल-ऑर्डर में लंबे समय तक बल्लेबाजी करने का मौका मिला था, तो वह इस साल जनवरी की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ था और तब से मुझे लंबी पारी खेलने का ज्यादा मौका नहीं मिला है। और अगला साल बहुत अहम है, क्योंकि अक्टूबर में वर्ल्ड कप शुरू हो रहा है, इसलिए मेरे लिए बल्लेबाजी में कीमती समय बिताना जरूरी है क्योंकि मैदान के बाहर मैं कुछ चीजें आजमा रहा हूं और उन्हें खेल में परखना चाहता हूं। और तभी पता चलेगा कि पर्दे के पीछे जो मेहनत कर रहा हूं, वह काम आ रही है या नहीं, या मुझे क्या अलग करने की जरूरत है। तो हां, मेरे लिए कुछ समय तक बल्लेबाजी करना जरूरी था, इसलिए मैं इसे लेकर खुश हूं।”

मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करने पर क्या चुनौती है?

मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करने की चुनौती पर राहुल ने कहा, “यह बहुत अलग है, लेकिन मैं पिछले 6-7 सालों से यह रोल निभा रहा हूं। पिछले डेढ़ साल में जब से बॉल बदलने का नियम आया है, तब से हालात बहुत बदल गए हैं। आखिरी 10 ओवरों में 80-90 रन बनाना आसान नहीं रहा है। बॉल रिवर्स स्विंग हो रही है और इस मैच में भी, जब बॉल पुरानी और नरम हो गई और रिवर्स स्विंग होने लगी, तो एक बैटर के तौर पर आपको लॉन्ग-ऑन और डीप मिड-विकेट फील्डर के ऊपर से शॉट खेलने का कॉन्फिडेंस नहीं होता, खासकर तब जब उस तरफ बाउंड्री बड़ी हो। मैंने हमेशा टॉप ऑर्डर में बैटिंग की है और मुझे हार्ड बॉल पसंद है जो तेजी से मेरे पास आए, ताकि मैं उसकी पेस का इस्तेमाल कर सकूं। इसलिए मैं इसी पर काम कर रहा हूं – नरम और पुरानी बॉल के साथ खेलने और उनसे छक्के मारने की कोशिश कर रहा हूं। तो, यह एक ऐसी चीज है जिस पर मैंने काम किया है। मैं लगातार अपने गेम को बेहतर बनाने, अपने रोल को समझने और यह समझने की कोशिश करता हूं कि टीम के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए नंबर पांच और नंबर छह के बैटर को क्या करना होता है।”

2027 वर्ल्ड कप के लिए क्या है टीम इंडिया का माइंडसेट?

इस बारे में कि टीम क्रिकेट वर्ल्ड कप 2027 की तैयारी और अलग-अलग खिलाड़ियों को आजमाने के लिए बाइलेटरल सीरीज का इस्तेमाल कैसे कर रही है, इस पर राहुल ने कहा, “वर्ल्ड कप से पहले होने वाली ये सभी सीरीज मैदान पर खेलने का अच्छा मौका देती हैं। हम अपनी योजना से बहुत दूर नहीं जाना चाहते, लेकिन बैटिंग यूनिट के तौर पर थोड़ा एक्सपेरिमेंट भी करना चाहते हैं। अब तक हमारा लक्ष्य पहले बैटिंग करते हुए 330-340 रन बनाने का रहा है, लेकिन हम देख रहे हैं कि वनडे क्रिकेट में 340 और 350 रन आसानी से चेज हो जाते हैं। इसलिए, जब बैटर सेट हो जाएं, तो वे कैसे आक्रामक खेल जारी रख सकते हैं और 370-380 रन बना सकते हैं, या किसी दिन 400 रन तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। मिडिल-ऑर्डर बैटर के तौर पर क्रीज पर आते ही हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि हम सेट होने में ज्यादा समय न लें, स्ट्राइक रोटेट करना शुरू करें और हर छह या सात गेंदों पर बाउंड्री लगाते रहें। साथ ही, बुमराह और अक्षर जैसे अहम खिलाड़ी टीम में नहीं थे, इसलिए हमें दूसरे खिलाड़ियों को आजमाने का मौका मिला। कोच और कप्तान उन खिलाड़ियों को लेकर बहुत साफ हैं जिन्हें वे टीम में लाना चाहते हैं। वे कुछ ऐसे खिलाड़ियों को ज्यादा मौके देना चाहते हैं जो हमें लगता है कि वर्ल्ड कप के लिए अहम हो सकते हैं।”

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