वैभव सूर्यवंशी को नंबर 3 पर खिलाना सही या गलत? क्या है टीम इंडिया की सबसे बड़ी उलझन?

Vaibhav Sooryavanshi: भारत को जीत मिल जाए, तो क्या टीम का हर फैसला सही हो जाता है? क्रिकेट में इसका जवाब हमेशा हां नहीं होता। कभी-कभी जीत के बीच भी ऐसा सवाल छिपा होता है, जिसका जवाब आने वाले मैचों में टीम का भविष्य तय कर सकता है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 इंटरनेशनल में भारतीय टीम के सामने भी ऐसा ही सवाल आया। ईशान किशन की गैरमौजूदगी में टीम के पास एक युवा बल्लेबाज को मौका देने का विकल्प था लेकिन उसके साथ एक पेंच भी था। क्या उसे उसी भूमिका में खिलाया जाए, जहां वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाना जाता है या टीम के मौजूदा कॉम्बिनेशन के हिसाब से नई जिम्मेदारी दी जाए?

यह सवाल वैभव सूर्यवंशी से जुड़ा है। उन्हें नंबर 3 पर उतारने के फैसले ने बहस छेड़ दी है। इस फैसले को समझने के लिए सिर्फ उनकी पिछली पारी नहीं, बल्कि उनके खेल की प्रकृति और टीम की जरूरतों को भी देखना होगा। अगर ईशान किशन तीसरे मैच में बाहर रहते हैं, तब भी वैभव की जगह नंबर तीन पर ही बनती दिखाई दे रही है।

नंबर 3 पर वैभव का रिकॉर्ड क्या कहता है?

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 में वैभव ने तीसरे नंबर पर उतरकर 8 गेंदों में रन बनाए। यह उनके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ओपनिंग से बाहर बल्लेबाजी करने का पहला मौका था। इससे पहले नंबर 3 पर उनका अनुभव भी बेहद सीमित था।

अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया अंडर 19 के खिलाफ यूथ टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने इस नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 14 गेंदों में 20 रन बनाए थे। यानी अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में इस भूमिका को लेकर उनके पास पहले से बना हुआ कोई रिकॉर्ड नहीं था।

ओपनिंग में क्यों खतरनाक हो जाते हैं वैभव?

वैभव की सबसे बड़ी ताकत शुरुआत से गेंदबाजों पर दबाव बनाना है। नई गेंद के साथ पावरप्ले में केवल दो फील्डर 30 गज के घेरे के बाहर रह सकते हैं। इस नियम का फायदा उठाकर आक्रामक बल्लेबाज शुरुआत में ही रन गति बढ़ा सकते हैं।

आईपीएल 2026 में वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के लिए ओपनिंग करते हुए 16 मैचों में 776 रन बनाए। उनका स्ट्राइक रेट 237.30 रहा और उन्होंने 72 छक्के लगाए। ये आंकड़े बताते हैं कि टॉप क्रम में उन्हें तेजी से रन बनाने की आजादी मिली और उन्होंने इसका भरपूर इस्तेमाल किया। इंटरनेशनल क्रिकेट में ओपन आर उन्होंने 8 मैचों में 246 रन बनाए। खास बात यह है कि इसी दौरान ज़िम्बाब्वे में वह प्लेयर ऑफ़ द मैच भी बने थे।

आईपीएल के आंकड़े अपने आप यह साबित नहीं करते कि वह तीसरे नंबर पर सफल नहीं हो सकते। वे इतना जरूर दिखाते हैं कि ओपनिंग में वैभव का प्रदर्शन असाधारण रहा है। ऐसे में उनकी भूमिका बदलने से पहले टीम मैनेजमेंट को यह देखना होगा कि उससे मिलने वाला फायदा क्या है।

संजू सैमसन को नीचे भेजना बेहतर विकल्प था?

पूर्व भारतीय स्पिनर मुरली कार्तिक ने यही सवाल उठाया। उनका मानना था कि वैभव को ओपनिंग करनी चाहिए थी और अनुभवी संजू सैमसन नंबर 3 पर बल्लेबाजी कर सकते थे। रविचंद्रन अश्विन ने भी वैभव को इस भूमिका में उतारने के फैसले पर सवाल उठाए। संजू नीचे आकर पर कई बार खेल चुके हैं।

इस तर्क में दम है। अनुभवी खिलाड़ी से अलग क्रम पर खेलने की जिम्मेदारी लेने की उम्मीद की जा सकती है, जबकि युवा बल्लेबाज को उसकी मजबूत भूमिका में मौका देना उसके आत्मविश्वास के लिए उपयोगी हो सकता है। वैभव सूर्यवंशी के कोच मनीष ओझा ने भी वनइंडिया से बातचीत में कहा कि वैभव की जगह ओपनर के तौर पर ही है और वह हर फ़ॉर्मेट में उनको वहीं खेलते हुए देखना चाहते हैं।

क्या वैभव को नंबर 3 पर खिलाना गलत फैसला था?

फिलहाल इसे पूरी तरह गलत कहना जल्दबाजी होगी। नंबर 3 पर बल्लेबाजी सीखना वैभव के खेल में नई क्षमता जोड़ सकता है। इस नंबर पर बल्लेबाज को कभी शुरुआती विकेट गिरने के बाद पारी संभालनी होती है, तो कभी अच्छी शुरुआत को और तेज करना होता है। ये परिस्थितियां ओपनिंग से अलग हो सकती हैं। इन सबके बीच यह देखना होगा कि वह एक युवा खिलाड़ी हैं और ओपन से ही स्टार्ट किया है, तो फ़िलहाल तो ओपनर के तौर पर रखना ही सही होगा। एक बार वह उम्र और मैचों के साथ अनुभव हासिल करते हैं, तो कभी बैटिंग क्रम में बदलाव की बात आए, तो ऐसा किया जा सकता है।

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