वैभव सूर्यवंशी जैसे प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी को अगर प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिलता है, तो क्या वह बेंच पर बैठकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार हो सकते हैं? भारतीय टीम में वैभव को लगातार मौका नहीं मिलने पर उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने यह सवाल उठाते हुए टीम मैनेजमेंट पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने गौतम गंभीर की अगुआई वाले भारतीय टीम मैनेजमेंट के रवैये को ‘तानाशाही’ जैसा बताया और कहा कि युवा खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाने के बजाय मैदान पर उतरने का मौका मिलना चाहिए। टाइम्स नाउ से बातचीत में ओझा ने कहा कि मौजूदा टीम मैनेजमेंट को शायद लगता है कि खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर तैयार किया जा सकता है।
उनका मानना है कि किसी भी युवा क्रिकेटर को बेहतर बनाने के लिए मैच खेलने का अनुभव जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की चुनौतियों को समझने और अपने खेल में सुधार करने के लिए युवा खिलाड़ियों को लगातार मौके मिलने चाहिए।
‘बेंच पर बैठकर कोई खिलाड़ी तैयार नहीं होता’
मनीष ओझा ने कहा कि क्रिकेट के कई दिग्गज भी इस बात से सहमत होंगे कि अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए उन्हें मैदान पर उतारना जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि बेंच पर बैठे रहने से न तो कोई खिलाड़ी पहले तैयार हुआ है और न ही भविष्य में ऐसा हो सकेगा।
ओझा ने वैभव को मौका नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए यह भी सवाल किया कि क्या टीम मैनेजमेंट ने पहले ही तय कर लिया है कि इस युवा खिलाड़ी को खेलने का अवसर नहीं देना है। लगातार बाहर बैठने से किसी भी खिलाड़ी को यह महसूस हो सकता है कि टीम में उसकी उपयोगिता नहीं है। इससे युवा खिलाड़ी निराश भी हो सकता है।
‘वैभव एक तूफान की तरह है’
टीम चयन पर नाराजगी के बावजूद ओझा को वैभव की प्रतिभा पर पूरा भरोसा है। उन्होंने युवा बल्लेबाज की तुलना तूफान से करते हुए कहा कि उसे रोकने की कोशिश करने वाले आखिरकार टूट जाएंगे। उनके मुताबिक, वैभव का भविष्य केवल छह महीने, एक साल या एक-दो IPL सीजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लंबे समय तक क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ सकता है।
ओझा के इस बयान ने वैभव को मौका देने की बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि अंतिम प्लेइंग इलेवन का फैसला टीम मैनेजमेंट करता है लेकिन कोच की नाराजगी ने युवा प्रतिभाओं को तैयार करने के तरीके पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि वैभव को भारतीय टीम में खेलने का मौका कब मिलता है।