डबलिन गार्डियंस के हेड कोच विक्रम राठौड़ का मानना है कि नई शुरू हुई यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग (ईटीपीएल) के पास दुनिया की कड़ी फ्रेंचाइजी क्रिकेट टूर्नामेंट में टिकने का अच्छा मौका है.
राठौड़ के मुताबिक, इस लीग की सबसे बड़ी ताकत यूरोप के लोकल खिलाड़ी हैं. उनका मानना है कि जो लीग लगभग पूरी तरह विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भर रहती हैं, उनके लिए लंबे समय तक खुद को बनाए रखना ज्यादा मुश्किल हो सकता है.
ईटीपीएल यूरोप में इस स्तर पर शुरू होने वाली पहली मल्टी-कंट्री टी20 टूर्नामेंट है. इसमें महाद्वीप के कई उभरते क्रिकेट देशों के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं. यह लीग सीधे तौर पर आईपीएल से मुकाबला करने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि साउथ अफ्रीका अफ्रीका की एसए20, ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग, इंग्लैंड की द हंड्रेड और यूएई की आईएलटी20 जैसी टूर्नामेंटओं के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है.
लोकल खिलाड़ियों से मिलेगी लीग को मजबूती
भारत के पूर्व बल्लेबाजी कोच रहे राठौड़ ने कहा कि किसी भी क्रिकेट लीग को सफल बनाने में घरेलू टैलेंट की बड़ी भूमिका होती है. उन्होंने यूरोप के खिलाड़ियों में इस टूर्नामेंट को लेकर उत्साह की भी तारीफ की. उनके अनुसार, लोकल क्रिकेटर इस लीग के जरिए अपनी टैलेंट दुनिया के सामने दिखाना चाहते हैं और लगातार सीखने व बेहतर होने की कोशिश कर रहे हैं. यही उत्साह ईटीपीएल को दूसरी लीग से अलग पहचान दे सकता है.
आईपीएल तक पहुंचने का बन सकता है रास्ता
राठौड़ के मुताबिक, ईटीपीएल का असली उद्देश्य सिर्फ एक नई लीग शुरू करना नहीं, बल्कि यूरोप में क्रिकेट और खिलाड़ियों को विकसित करना है. अगर यहां के खिलाड़ी आगे चलकर दुनिया की दूसरी फ्रेंचाइजी लीग में खेलने के मौके हासिल करते हैं, तो यह टूर्नामेंट की बड़ी सफलता होगी. उन्होंने कहा कि अगर कोई यूरोपीय खिलाड़ी भविष्य में आईपीएल में भी जगह बना लेता है, तो यह और बड़ी उपलब्धि होगी. राठौड़ ने माना कि यूरोप में क्रिकेट की लोकप्रियता भारत जैसी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों में इस खेल को लेकर जुनून और सीखने की इच्छा काफी मजबूत है.