भारतीय टीम मैनेजमेंट ने इंदौर में हुए तीसरे मुकाबले में दो बदलाव तो किए, लेकिन वैभव को खेलने का मौका नहीं मिला। बाकी बचे दो मैच में उन्हें खेलने का मौका मिलेगा या यूं ही बेंच पर बैठकर पूरी सीरीज निकल जाएगी, कुछ निश्चित नहीं है।
वैभव को मौका ना दिए जाने पर उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने स्पोर्ट्स नाउ से खास बातचीत की है। उन्होंने टीम मैनेजमेंट पर तानाशाह होने का आरोप लगाया है।
लंबी रेस का घोड़ा है वैभव
मनीष ओझा ने वैभव सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए कहा ‘मेरे हिसाब से वैभव एक ऐसी आंधी है ना, उससे जो टकराएगा वो आज नहीं तो कल टूट जाएगा। ये आंधी 6 महीना, एक साल, दो साल, एक आईपीएल या दो आईपीएल नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने वाला है। आने वाले सालों तक आप उसके प्रदर्शन को उसी सितारे की तरह चमकता देखेंगे। हमारे बच्चे में इतनी क्षमता है कि वह डंके की चोट पर अपनी जगह बनाएगा।
बेंच पर बिठाकर प्लेयर नहीं बनते
मनीष ओझा ने आगे कहा ‘वर्तमान टीम मैनेजमेंट को लगता है कि खिलाड़ियों को बेंच पर बिठाकर तैयार किया जाता है। वे यही कर रहे हैं। क्रिकेट के कई दिग्गज खिलाड़ियों से पूछिए, सब यही कहेंगे कि अगर हमें अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करना है, तो उन्हें खेलने का मौका देना पड़ता है। बेंच पर बैठने से न तो कोई खिलाड़ी तैयार हुआ है और न ही होगा। खासकर तब जब इतनी प्रतिभा वाले खिलाड़ी को बेंच पर बिठाए रखा जाए।”
टीम मैनेजमेंट पर लगाया अनदेखी का आरोप
मनीष ओझा ने मौजूदा टीम मैनेजमेंट पर वैभव की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ‘लगता है, उन्होंने मन बना लिया है कि इस बच्चे को मौका नहीं दिया जाएगा। उसे बाहर बिठाकर इतना निराश कर रहे हैं। इस उम्र में ज्यादा से ज्यादा मौके मिलने चाहिए, लेकिन वह बाहर बैठा पानी पिला रहा है। मुझे लगता है कि मौजूदा टीम मैनेजमेंट एक तरह की तानाशाही कर रहे हैं। उनके मन में जो आता है, वे वही करते हैं। मनीष ओझा की यह नाराजगी कुछ हद तक जायज भी है, क्योंकि जब से वैभव सूर्यवंशी ने अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया है तब से हुए 19 मैच में से 11 में उन्हें बेंच पर बैठना पड़ा है।
इंग्लैंड के खिलाफ मिला था मौका
वैभव सूर्यवंशी को इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में दूसरे टी20 मुकाबले में खेलने का मौका मिला था। टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन को टीम से बाहर किए जाने के बाद उन्हें मौका दिया था। टीम मैनेजमेंट ने सिर्फ तीन मैचों के बाद ही सूर्यवंशी को टीम से बाहर कर दिया और उनकी जगह सैमसन को वापस टीम में शामिल कर लिया। सैमसन की अनुपस्थिति में सूर्यवंशी को जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैच खेलने का मौका मिला। उस सीरीज में वीवीएस लक्ष्मण भारत के मुख्य कोच थे। 151 रन बनाने वाले वैभव को प्लेयर ऑफ द सीरीज से नवाजा गया था।
क्या उसे गेंदबाजी करनी होगी
निराश मनीष ओझा ने कहा ‘क्या उसने ऑलराउंडर के तौर पर प्रदर्शन किया या बल्लेबाज के तौर पर? उसने बल्लेबाज के तौर पर प्रदर्शन किया। क्या वह अब गेंदबाजी शुरू करेगा, अगले पांच साल तक इस पर कड़ी मेहनत करेगा, और फिर टीम इंडिया में वापस आकर कहेगा कि ‘मैं ऑलराउंडर बन गया हूं’? टी20 में गेंदबाजी करना कोई आसान काम नहीं है। इसमें बहुत दबाव होता है। वह इसके लिए तैयारी क्यों करेगा? वह एक बल्लेबाज है और खुद को साबित कर चुका है।”
वैभव को संभालकर रखना होगा
मनीष ओझा ने कहा ‘वैभव देश की संपत्ति हैं और अगले 20-25 सालों तक भारत की सेवा करेंगे। गौतम गंभीर को इससे क्या फर्क पड़ता है? दो…तीन साल…उनका कार्यकाल चाहे जितना भी हो, वह इसे पूरा करेंगे और घर चले जाएंगे। उन्हें किसी के भविष्य की परवाह नहीं है।
रणजी में खेले वैभव
मनीष ओझा ने वैभव को ज्यादा से ज्यादा मैच खेलने की सलाह दी। उन्होंने कहा ‘इस उम्र में उसे जहां भी मौका मिले, खेलना चाहिए, चाहे वह रणजी ट्रॉफी हो या दिलीप ट्रॉफी… इससे उसका मैच का अनुभव बढ़ेगा। अब तक उसने सिर्फ छोटे फॉर्मेट में ही अच्छा प्रदर्शन किया है। मैं चाहूंगा कि वह रणजी ट्रॉफी खेले।