इमाम उल हक के फर्जी चोट के ड्रामे समेत पाकिस्तान क्रिकेट इतिहास ऐसे कई विवादों से भरा पड़ा है जहां खिलाड़ियों ने बॉल टेंपरिंग, उम्र की धोखाधड़ी, डोपिंग और फिक्सिंग जैसी हरकतों से देश की भारी फजीहत कराई है।
पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास जितना मैदान पर उनके प्रदर्शन के लिए जाना जाता है उतना ही मैदान के बाहर उनके खिलाड़ियों के अजीबोगरीब और विवादित कारनामों के लिए भी चर्चा में रहा है। पाकिस्तानी क्रिकेटर अक्सर अपनी हरकतों, गैर जिम्मेदाराना रवैये और फर्जी दावों के चलते अपनी ही हंसी उड़वाते रहे हैं। ऐसी ही एक घटना हाल ही में तब सामने आई जब ओपनिंग बल्लेबाज इमाम उल हक ने इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज से हटने के लिए फेक इंजरी का बहाना बनाया जिसका बाद में खुलासा हो गया। यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी ने ऐसी बेतुकी हरकत से देश की नाक कटाई हो, इतिहास ऐसे फर्जीवाड़ों और शर्मनाक हरकतों से भरा पड़ा है।शाहिद अफरीदी ने चबाई गेंद
शाहिद अफरीदी का बॉल टेंपरिंग और बॉल ईटिंग कांड भी पाकिस्तान क्रिकेट के लिए ऐसा ही एक बेहद शर्मनाक पल था। 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक मैच के दौरान अफरीदी ने मैच का रुख बदलने के लिए गेंद की सीम को अपने दांतों से चबाना शुरू कर दिया था। टीवी कैमरों में उनकी यह बचकानी और अनैतिक हरकत साफ रिकॉर्ड हो गई। इस घटना के बाद पूरी दुनिया में अफरीदी का मजाक उड़ा और आईसीसी ने उन पर बैन लगा दिया।
इमाम उल हक की फर्जी चोट
इमाम उल हक की इस फर्जी चोट के ड्रामे ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की साख पर गहरा बट्टा लगाया है। टीम में जगह न मिलने के डर या निजी कारणों से ब्रेक लेने के लिए इमाम ने हैमस्ट्रिंग इंजरी का झूठा दावा किया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और जांच में उनकी पोल खुल गई। इंग्लैंड दौरे के दौरान हुए इस वाकये ने साफ कर दिया कि पाकिस्तानी खिलाड़ी अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए किस हद तक गिर सकते हैं।
पाकिस्तानी टीम की फिक्सिंग
मैदान पर स्पॉट फिक्सिंग और नो बॉल के नाम पर फर्जीवाड़ा करके देश की इज्जत नीलाम करने का सबसे बड़ा उदाहरण 2010 का लॉर्ड्स टेस्ट था। सलमान बट्ट की कप्तानी में मोहम्मद आमिर और मोहम्मद आसिफ ने पैसों के लालच में जानबूझकर पहले से तय समय पर बड़ी नो-बॉल फेंकी। जांच में जब इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ तो खिलाड़ियों को इंग्लैंड में जेल की हवा खानी पड़ी।
डोपिंग में फंसे शोएब अख्तर
पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज तेज गेंदबाज शोएब अख्तर का डोपिंग स्कैंडल और बैन से बचने के लिए दिए गए बहानों का दौर भी क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में ताजा है। 2006 चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ प्रतिबंधित पदार्थ नैंड्रोलोन के सेवन के दोषी पाए गए थे। इस फर्जीवाड़े से बचने के लिए खिलाड़ियों और बोर्ड ने अजीबोगरीब तर्क और झूठे बहाने गढ़े लेकिन अंतरराष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी के सख्त रवैये के सामने उनकी एक न चली और पाकिस्तान को अपनी पूरी दुनिया में फजीहत करवानी पड़ी।
फेक एज के चलते भी फंसा है पाकिस्तान
पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा फर्जी उम्र का सहारा लेकर दुनिया को धोखा देना भी एक आम बात रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद शाहिद अफरीदी रहे जिन्होंने अपनी आत्मकथा में स्वीकार किया कि 1996 में जब उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 37 गेंदों में सबसे तेज शतक बनाया था तब उनकी उम्र 16 साल नहीं बल्कि 19 साल थी। इसके अलावा भी कई मौकों पर अंडर-19 टीमों में ज्यादा उम्र के खिलाड़ियों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे खिलाने के आरोप साबित हुए हैं जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की खूब बेइज्जती कराई।