नई दिल्ली। भारतीय टीम के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह दिलीप ट्रॉफी में हिस्सा ले रहे हैं। नॉर्थ जोन की टीम को वेस्ट जोन के खिलाफ जीत दिलाने में अर्शदीप ने गेंद से अहम भूमिका निभाई और 4 विकेट चटकाए।
अर्शदीप का कहना है कि वह इस तरह के टूर्नामेंट में शामिल होकर यह साबित करना चाहते हैं कि उनमें टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी हुनर और स्टैमिना मौजूद है। भारत के लिए 18 वनडे और 91 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके अर्शदीप अभी भी अपने टेस्ट डेब्यू का इंतजार कर रहे हैं।
व्हाइट-बॉल क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान देने की वजह से लाल-गेंद के मैचों में उन्हें कम मौके मिले हैं, जिसके कारण उन्हें अपने 22वें और 23वें फर्स्ट-क्लास मैच के बीच लगभग एक साल का इंतजार करना पड़ा। बेंगलुरु में वेस्ट जोन के खिलाफ दिलीप ट्रॉफी का क्वार्टर-फाइनल अर्शदीप के लिए एक अहम परीक्षा साबित हुआ। उन्होंने दोनों पारियों में लगातार अच्छी गेंदबाजी की और 3/53 व 1/40 के आंकड़े हासिल किए, जिससे नॉर्थ जोन को 52 रनों से जीत मिली। मैच के बाद ‘क्रिकइन्फो’ के अनुसार अर्शदीप ने कहा, “मुझे लाल-गेंद की क्रिकेट खेलने का मौका बहुत कम मिलता है, और यह एक ऐसा ही मौका था। मैं अपनी काबिलियत दिखाना चाहता था और यह देखना चाहता था कि मैं कितने ओवर फेंक सकता हूं।
लय अच्छी लग रही है। लंबे समय बाद मैं रेड-बॉल गेम खेल रहा था। मैंने प्रैक्टिस में बहुत समय दिया और अच्छा लगा। शरीर में दर्द है, लेकिन यह अच्छा दर्द है क्योंकि हमें जीत मिली है।” 27 वर्षीय खिलाड़ी ने यह भी बताया कि टूर्नामेंट से पहले उन्होंने अपने ट्रेनिंग के तरीके में बदलाव किया था और हाल ही में ज्यादातर व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलने के बाद रेड-बॉल बॉलिंग पर ध्यान देना शुरू किया था। उन्होंने आगे कहा, “इस बार मुझे पता था कि दिलीप ट्रॉफी आने वाली है, इसलिए मैं रेड बॉल से प्रैक्टिस कर रहा था।
जब व्हाइट-बॉल सीजन आने वाला होता है, तो आप व्हाइट बॉल से प्रैक्टिस करते हैं। यह इस बात पर आधारित बहुत खास ट्रेनिंग होती है कि आपके सामने किस तरह का सीजन आने वाला है।” अर्शदीप को रेड-बॉल क्रिकेट की सबसे अच्छी बात यह लगती है कि इसमें बल्लेबाजों को लगातार चुनौती देने का मौका मिलता है। मैच से पहले उनके हेड कोच अजय शर्मा ने उन्हें यह बात बताई थी। उन्होंने कहा, “हमारे हेड कोच अजय शर्मा ने मुझसे कहा कि अगर आपको नई गेंद से विकेट नहीं भी मिलते हैं, तो भी आपके पास दूसरे स्पेल में वापसी करने का मौका होता है। रेड-बॉल क्रिकेट की यही खासियत है कि यह आपको दोबारा मौका देता है।”
अर्शदीप पहले भी काउंटी क्रिकेट खेल चुके हैं। 2023 में उन्होंने केंट के लिए पांच मैच खेले थे। उनका मानना है कि इंग्लैंड में रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का अनुभव बहुत काम का हो सकता है, लेकिन भारत के व्यस्त शेड्यूल की वजह से दोबारा काउंटी क्रिकेट खेलना मुश्किल है। उन्होंने कहा, “जब भी मौका मिले या समय हो, तो इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट खेलना वाकई बहुत अच्छा अनुभव होता है। लेकिन अभी आईपीएल, घरेलू व्हाइट-बॉल सीजन और घरेलू क्रिकेट के चलते काउंटी खेलने जाना मुमकिन नहीं है। यहां भी अहम मैच खेले जा रहे हैं। हम अपने घरेलू क्रिकेट को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उसका स्तर न गिरे। हम सभी यहीं खेलना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना पसंद करते हैं।” अर्शदीप ने बताया कि बेंगलुरु की पिच एक अलग तरह की चुनौती पेश कर रही थी। हालांकि, आसमान में बादल छाए हुए थे, लेकिन पिच स्पिनरों के लिए मददगार थी। इसी वजह से उन्हें पारंपरिक सीम मूवमेंट के बजाय अपनी रणनीति और फील्ड प्लेसमेंट में बदलाव करने पर ध्यान देना पड़ा। उन्होंने कहा, “ऐसी पिचों पर आपको दिमाग का इस्तेमाल करके खेलना होता है।
कभी-कभी आपको सफलता मिलती है, तो कभी-कभी ‘अक्रॉस-द-लाइन’ शॉट पर छक्का भी लग जाता है। इसी कारण आपको दोनों स्थितियों को स्वीकार करना होता है और बस कोशिश करते रहना होता है।” उन्होंने आगे कहा कि मददगार पिच पर गेंदबाजी करने के लिए धैर्य की जरूरत होती है, जबकि सपाट पिचों पर बेहतर रणनीतिक सोच की आवश्यकता होती है। अर्शदीप ने कहा, “जब पिच से मदद मिलती है, गेंद सीम या स्विंग होती है, तब आप धैर्य रखते हैं और सही लेंथ पर गेंदबाजी करते रहते हैं। हालांकि, जब पिच अलग तरह की हो, जहां पिच से कोई खास मदद न मिले और केवल ‘वेरिएबल बाउंस’ (उछाल में उतार-चढ़ाव) हो, तो आपको फील्ड के हिसाब से खेलना होता है और अलग-अलग चीजें आजमानी पड़ती हैं।”