नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए विराट कोहली के बल्ले से वनडे शतक निकलना हमेशा से एक अलग अहसास कराता है। करियर के इस मोड़ पर उनके शतकों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हर फैंस को अहसास है कि शायद 2027 वनडे वर्ल्ड कप के बाद यह सिलसिला थम सकता है।
हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई 139 रनों की धुआंधार पारी के बाद विराट कोहली के इंटरनेशनल शतकों की संख्या 86 तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि के बाद क्रिकेट जगत में एक बार फिर सचिन तेंदुलकर के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड की चर्चा तेज हो गई है।
15 शतकों की जरूरत
गणित और आंकड़ों के लिहाज से देखें तो सचिन का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए कोहली को अभी 15 और शतकों की दरकार है। अपने करियर में खेले गए 630 अंतरराष्ट्रीय पारियों में 86 शतक जमाने वाले कोहली का ओवरऑल औसत हर 7.33 पारियों में एक शतक का रहा है। इस रफ्तार से उन्हें 15 शतक बनाने के लिए करीब 110 और पारियों की जरूरत होगी। हालांकि, टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट के घटते मौकों के बीच अब उनका पूरा ध्यान वनडे फॉर्मेट पर केंद्रित है जहां उनका प्रदर्शन सबसे खतरनाक रहा है।
हर 5 पारी में ठोकते हैं शतक
वनडे क्रिकेट में कोहली के नाम 305 पारियों में 55 शतक दर्ज हैं, यानी हर 5.55 पारियों में एक शतक। अगर वह केवल वनडे फॉर्मेट के करियर औसत से भी आगे बढ़ते हैं, तो 15 शतक पूरे करने के लिए उन्हें लगभग 83 वनडे पारियां खेलनी होंगी। वहीं, अगर उनके हालिया फॉर्म पर नजर डालें जहां उन्होंने पिछली 10 वनडे पारियों में 4 शतक जड़े हैं, तो इस तूफानी रफ्तार से वह महज 38 पारियों में यह मुकाम हासिल कर सकते हैं। हालांकि, इतनी लंबी अवधि तक हर दूसरी या तीसरी पारी में शतक बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है।
विराट कोहली के लिए बहुत मुश्किल
असल चुनौती पारियों की संख्या से ज्यादा मुकाबलों की उपलब्धता को लेकर है। 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक भारतीय टीम के कैलेंडर में लगभग 30 वनडे मैच ही तय दिख रहे हैं (जिसमें एशिया कप और वर्ल्ड कप के संभावित मैच शामिल हैं)। इसका सीधा अर्थ यह है कि कोहली को सचिन तेंदुलकर का सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ने के लिए आने वाले लगभग हर दूसरे मैच में शतक जमाना होगा। भले ही यह राह बेहद कठिन नजर आती हो लेकिन विराट कोहली जैसे नामुमकिन को मुमकिन बनाने वाले खिलाड़ी के लिए कुछ भी असंभव नहीं कहा जा सकता।