अफगानिस्तान की टेस्ट टीम के नए कप्तान रहमत शाह अपनी टीम के खिलाड़ियों की तारीफ की, जिन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ मंगलवार 13 अक्टूबर को समाप्त हुए एकमात्र टेस्ट मैच को ड्रॉ कराया।
इतना ही नहीं, इस ड्रॉ को रहमत शाह ने जीत के बराबर बताया है, क्योंकि बांग्लादेश की टीम ने कुछ ही समय पहले ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को उन्हीं के घर में हराया था। अफगानी कप्तान ने कहा है कि अबूधाबी की गर्मी में टेस्ट खेलना आसान नहीं था, लेकिन जिस तरह का प्रदर्शन टीम ने किया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि यह लंबे फॉर्मेट में टीम की प्रगति की निशानी है।
अफगानिस्तान की टीम ने दूसरी पारी में 142 ओवर बल्लेबाजी की। 92 ओवर तो अकेले आखिरी दिन अफगानी खिलाड़ियों ने खेले। गर्मी और उमस ने बल्लेबाजों की हालत खराब की हुई थी, लेकिन फिर भी वे अड़े रहे और मैच को ड्रॉ करा दिया। इसमें सेदिकुल्लाह अटल की शतकीय पारी और खुद कप्तान रहमत शाह का अर्धशतक शामिल था। आखिरी दिन बांग्लादेश को जीत के लिए 7 विकेट चाहिए थे और उन्हें इस मैच को जीतने का दावेदार बताया जा रहा था, लेकिन अफगानी लड़ाकों ने पूरी जान लगा दी और मैच ड्रॉ करा लिया।
जीत के बराबर है ड्रॉ मैच- कप्तान रहमत शाह
रहमत शाह ने मैच के बाद कहा, “असल में यह ड्रॉ जीत के बराबर है। हमारे लड़कों की बहुत अच्छी कोशिश रही। अगर आप देखें, तो हमने पहले से प्लान बनाया था। चाहे बॉलिंग डिपार्टमेंट हो या बैटिंग डिपार्टमेंट, हम उसी प्लान के हिसाब से चले। अगर रन चाहिए थे, तो हमने रन बनाए और अगर हमें समय बिताना था, तो हमने समय बिताया। इसीलिए हमारा नतीजा ड्रॉ की तरफ गया।”
रहमत ने T20 क्रिकेट से सबसे लंबे फॉर्मेट में जरूरी बदलाव का क्रेडिट सेदिकुल्लाह अटल को दिया। उन्होंने कहा, “सेदिकुल्लाह अटल T20 से फ्रेश होकर आए थे और जिस तरह से उन्होंने यहां अपना टेम्परामेंट बनाए रखा, टीम की जरूरतों को पूरा किया और उसे निभाया, उसी वजह से यह रिजल्ट मिला।” वहीं, अफगानिस्तान के बैटिंग कोच टोबी रेडफोर्ड ने क्रिकबज को बताया कि वह बैटिंग ऑर्डर के सभी खिलाड़ियों के योगदान से खुश हैं।
क्या था टीम का प्लान?
उन्होंने कहा, “एक टीम के तौर पर, मुझे खुशी हुई कि मैच में दो खिलाड़ियों ने सेंचुरी बनाईं और दूसरों ने हाफ-सेंचुरी और जरूरी पार्टनरशिप में योगदान दिया। आज टेल ने अच्छी और समझदारी से बैटिंग की। आज का प्लान लंबे समय तक बैटिंग करना और सब्र रखना था। अगर वे डॉट बॉल या मेडन फेंकते हैं तो परेशान नहीं होना था। कम समय में खेलना था जो मैनेजेबल हो और हमें पूरे दिन बैटिंग करने के हमारे गोल तक पहुंचा सके।”