अजीत अगरकर का चयन समिति से जाने का समय नजदीक, क्या बदलेगी टीम इंडिया की रणनीति

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चयन समिति के वर्तमान मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का कार्यकाल भारतीय क्रिकेट में कई बड़े और कड़े फैसलों के लिए जाना जाता है। उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने जहां एक तरफ आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया, वहीं दूसरी तरफ कई सीनियर और अनुभवी खिलाड़ियों को लगातार नजरअंदाज करके टीम में युवा खिलाड़ियों की फौज खड़ी करने पर जोर दिया गया।

चयन समिति की इस ‘यंग इंडिया’ पॉलिसी के कारण कई ऐसे शानदार और स्थापित खिलाड़ी टीम से बाहर हो गए जो आज भी घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें चयनकर्ताओं की बेरुखी का सामना करना पड़ रहा है। खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि जैसे ही अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होगा और नए चयनकर्ताओं की नियुक्ति होगी, वैसे ही भारतीय क्रिकेट के चयन समीकरणों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जब भी क्रिकेट बोर्ड में चयन समिति के मुखिया बदलते हैं, तो खेल की दिशा, दशा और अनुभवी खिलाड़ियों के प्रति नजरिया भी पूरी तरह से बदल जाता है, जिसका सीधा फायदा उन खिलाड़ियों को मिल सकता है जो लंबे समय से भारतीय जर्सी पहनने के लिए तरस रहे हैं।

भुवनेश्वर कुमार: स्विंग के सुल्तान की क्या एक बार फिर होगी टीम इंडिया में शाही वापसी?

इस संभावित बदलाव की सूची में सबसे पहला और सबसे बड़ा नाम भारत के अनुभवी स्विंग गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार का आता है, जिन्हें आधुनिक क्रिकेट के सबसे घातक सीम गेंदबाजों में गिना जाता है। नई गेंद से बल्लेबाजों के होश उड़ाने वाले भुवी को पिछले कुछ सालों से टीम इंडिया की योजनाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया था, क्योंकि चयनकर्ताओं का पूरा फोकस पूरी तरह से युवा और तेज गति वाले गेंदबाजों पर था। हालांकि, भुवनेश्वर कुमार ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल (IPL) में अपनी अचूक लाइन-लेंथ और स्विंग के दम पर यह साबित कर दिया है कि उनमें आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमाल दिखाने की पूरी क्षमता बाकी है। यदि नए मुख्य चयनकर्ता सीनियर खिलाड़ियों को उनके अनुभव और मौजूदा फॉर्म के आधार पर तवज्जो देने की नीति अपनाते हैं, तो भुवनेश्वर कुमार की लॉटरी लगना तय माना जा रहा है और वे एक बार फिर नीली जर्सी में अपनी स्विंग का जादू बिखेरते नजर आ सकते हैं।

अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और शिखर धवन जैसे दिग्गजों को मिल सकती है नई उम्मीद

भुवनेश्वर कुमार के अलावा टेस्ट क्रिकेट के दो सबसे बड़े स्तंभ माने जाने वाले अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा का नाम भी उन खिलाड़ियों की सूची में शामिल है जिन्हें चयन समिति के मौजूदा रुख के कारण लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने के बावजूद इन खिलाड़ियों को टेस्ट टीम में वापस न बुलाया जाना इस बात का संकेत था कि चयनकर्ता भविष्य की टीम तैयार करने में जुटे हैं। इसी तरह, वनडे क्रिकेट के सबसे बेहतरीन ओपनर्स में शुमार किए जाने वाले शिखर धवन भी अपनी शानदार फॉर्म और अनुभव के बावजूद चयनकर्ताओं के रडार से बाहर हो चुके थे। नए चयन समिति के आने से इन अनुभवी खिलाड़ियों की तकनीकी दक्षता और मुश्किल परिस्थितियों में टिककर खेलने की क्षमता का मूल्यांकन नए सिरे से हो सकता है, जिससे इनकी वापसी के रास्ते खुल सकते हैं। जब विदेशी दौरों पर भारतीय बल्लेबाजों को पिच की मुश्किल परिस्थितियों में संघर्ष करना पड़ता है, तब इन अनुभवी खिलाड़ियों की कमी सबसे ज्यादा खलती है, और यही वजह है कि क्रिकेट पंडित मानते हैं कि बदलाव के बाद इन दिग्गजों की फिर से पूछपरख शुरू हो सकती है।

युजवेंद्र चहल और वरुण चक्रवर्ती जैसे स्पिनर्स की किस्मत भी ले सकती है बड़ा यू-टर्न

सफेद गेंद के क्रिकेट यानी टी20 और वनडे फॉर्मेट में भारत के सबसे सफल लेग स्पिनर्स में से एक युजवेंद्र चहल को भी पिछले कुछ समय से लगातार भारतीय टीम से नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि वे दुनिया भर की लीग्स में लगातार शानदार गेंदबाजी कर रहे हैं। चयनकर्ताओं की नई प्राथमिकताओं के चलते कई ऐसे प्रतिभाशाली स्पिनर्स थे जिन्हें लगातार मौके नहीं मिल पाए, जिसके कारण उनकी अंतरराष्ट्रीय करियर की गाड़ी बीच में ही थम सी गई। जैसे ही अजीत अगरकर का कार्यकाल पूरा होगा और नए चयनकर्ता टीम की कमान संभालेंगे, वैसे ही इन खिलाड़ियों के लिए घरेलू और लीग क्रिकेट में किया गया प्रदर्शन एक बार फिर से चयन का मुख्य आधार बन सकता है। क्रिकेट प्रेमियों और इन खिलाड़ियों के फैंस को पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में टीम इंडिया के दरवाजे एक बार फिर से उन अनुभवी खिलाड़ियों के लिए खुलेंगे जिन्होंने देश को कई ऐतिहासिक मुकाबले जिताए हैं, और यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि नया चयन पैनल भारतीय क्रिकेट को किस नई दिशा में लेकर जाता है।

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