IPL 2027: आईपीएल का ऑक्शन सिर्फ खिलाड़ियों पर लगने वाली बोली नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के क्रिकेटरों के लिए करोड़पति बनने अपनी किस्मत चमकाने का सबसे बड़ा मंच है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कोई भी खिलाड़ी इस ऑक्शन का हिस्सा कैसे बनता है?
क्या कोई भी खिलाड़ी उठकर सीधे ऑक्शन में शामिल हो सकता है? तो इसका जवाब है कि ऐसा नहीं हो सकता है. इसके पीछे बीसीसीआई की एक बेहद व्यवस्थित सख्त रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया होती है. आईपीएल 2027 के मिनी-ऑक्शन का आयोजन 16 दिसंबर को गोवा में होगा. तो चलिए जानते हैं कि ऑक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया क्या होती है इसके पीछे क्या-क्या नियम काम करते हैं.
IPL ऑक्शनके लिए कितने दिन पहले तक खिलाड़ी दे सकते हैं अपना नाम?
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की शुरुआत ऑक्शन से कई दिन पहले होती है, जिसमें देश विदेश के खिलाड़ी बीसीसीआई के पास अपना नाम भेजते हैं. ऑक्शन में नाम देने के लिए बीसीसीआई खिलाड़ियों को लगभग 3 सप्ताह (21 दिन) का समय देती है. अगर हम आईपीएल 2027 ऑक्शन की बात करें, तो इसके लिए प्लेयर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 2 नवंबर 2026 से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है. खिलाड़ियों के पास अपना नाम दर्ज कराने के लिए 23 नवंबर 2026 तक का समय है.
यानी नियमों के मुताबिक, ऑक्शन से ठीक 23 दिन पहले रजिस्ट्रेशन की खिड़की पूरी तरह बंद हो जाती है. इस समय-सीमा के खत्म होने के बाद किसी भी नए खिलाड़ी के आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाता है. खिलाड़ियों को मिलने वाला यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि उन्हें अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से जरूरी अनुमति पत्र भी लेना होता है.
कैसा होता है आईपीएल ऑक्शन रजिस्ट्रेशन का पूरा प्रोसेस?
1. BCCI द्वारा आवेदन की शुरुआत- सबसे पहले बीसीसीआई दुनिया भर के सभी क्रिकेट बोर्ड्स भारत के घरेलू क्रिकेट संघों को एक आधिकारिक सूचना पत्र भेजती है. इस पत्र के जरिए यह बताया जाता है कि जो भी खिलाड़ी आगामी ऑक्शन में हिस्सा लेना चाहते हैं, वे अपना रजिस्ट्रेशन पंजीकरण करवा सकते हैं.
2. राज्य संघों विदेशी बोर्ड्स की भूमिका – कोई भी खिलाड़ी सीधे BCCI को ईमेल या लेटर भेजकर अपना नाम ऑक्शन में नहीं दे सकता है. भारतीय अनकैप्ड या डोमेस्टिक खिलाड़ियों को अपने राज्य के क्रिकेट एसोसिएशन के जरिए ही आवेदन करना होता है. वहीं विदेशी खिलाड़ियों को अपने देश के क्रिकेट बोर्ड के जरिए अपना नाम बीसीसीआई के पास भेजना पड़ता है.
3. NOC की जरूरत – विदेशी खिलाड़ियों के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) होता है. विदेशी बोर्ड इस बात की गारंटी देते हैं कि आईपीएल के दौरान उनका खिलाड़ी नेशनल ड्यूटी से मुक्त रहेगा या फिर वह आईपीएल में खेलने के लिए पूरी तरह उपलब्ध है. बिना NOC के किसी भी विदेशी खिलाड़ी का रजिस्ट्रेशन मान्य नहीं होता.
4. बेस प्राइस का चुनाव – रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरते समय खिलाड़ी को खुद अपना ‘बेस प्राइस’ यानी न्यूनतम कीमत तय करनी होती है. इसी कीमत से ऑक्शन के दिन उस खिलाड़ी पर बोली लगनी शुरू होती है. कैप्ड खिलाड़ियों के लिए अधिकतम बेस प्राइस 2 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जबकि अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए यह सीमा 20 लाख, 30 लाख या 40 लाख रुपये होती है.
रजिस्ट्रेशन के बाद कैसे तैयार होती है फाइनल लिस्ट?
जब 23 नवंबर को रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा, तो बीसीसीआई के पास हजारों खिलाड़ियों की एक लंबी लिस्ट जमा हो जाएगी. इसके बाद असली छंटनी का काम शुरू होता है, जिसे शॉर्टलिस्टिंग कहा जाता है.
• फ्रेंचाइजियों को लिस्ट भेजना – बीसीसीआई रजिस्ट्रेशन कराने वाले सभी खिलाड़ियों की यह लंबी लिस्ट सभी 10 आईपीएल टीमों को भेजती है.
• पसंदीदा खिलाड़ियों की मांग – सभी टीमों को 1 दिसंबर 2026 तक अपनी पसंद के खिलाड़ियों के नामों की लिस्ट वापस बीसीसीआई को सौंपनी होती है. टीमें सिर्फ उन्हीं खिलाड़ियों पर टिक करती हैं जिन्हें वे ऑक्शन में खरीदने में दिलचस्पी रखती हैं.
• फाइनल ऑक्शन लिस्ट का ऐलान – फ्रेंचाइजियों से मिले फीडबैक के आधार पर बीसीसीआई गैर-जरूरी नामों को हटा देती है. इसके बाद 3 दिसंबर 2026 को आखिरी ऑक्शन लिस्ट जारी कर दी जाएगी. उदाहरण के लिए, अगर 1500 खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, तो अंतिम लिस्ट में सिर्फ 350 से 400 खिलाड़ी ही जगह बना पाते हैं, जिन पर 16 दिसंबर को गोवा में बोली लगेगी.
आईपीएल ऑक्शन रजिस्ट्रेशन के कड़े नियम
बीसीसीआई ने आईपीएल 2025-2027 के पूरे चक्र के लिए नियमों को काफी सख्त कर दिया है ताकि कोई भी खिलाड़ी इस लीग को हल्के में न ले.
• विदेशी खिलाड़ियों के लिए मेगा ऑक्शन जरूरी – अब हर विदेशी खिलाड़ी के लिए मेगा ऑक्शन में अपना नाम रजिस्टर कराना अनिवार्य है. अगर कोई विदेशी खिलाड़ी मेगा ऑक्शन में अपना नाम नहीं देता है, तो उसे अगले साल होने वाले मिनी-ऑक्शन में भी भाग लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
• अचानक नाम वापस लिया तो 2 साल का कड़ा बैन – अगर कोई खिलाड़ी ऑक्शन में किसी टीम द्वारा खरीद लिया जाता है वह सीजन शुरू होने से पहले बिना किसी ठोस मेडिकल या चोट के कारण के अपना नाम वापस लेता है, तो बीसीसीआई उस पर 2 आईपीएल सीजन का कड़ा प्रतिबंध लगाएगी.
• कैप्ड से अनकैप्ड बनने का नियम – अगर किसी भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने पिछले 5 सालों से भारत के लिए कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है उसके पास बीसीसीआई का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं है, तो वह खिलाड़ी ऑक्शन में एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है. जैसे की धोनी अब खेलते हैं.
ऑक्शन के दिन खिलाड़ियों को कैसे बांटा जाता है?
शॉर्टलिस्ट होने के बाद भी खिलाड़ियों को सीधे ऑक्शन टेबल पर नहीं लाया जाता. ऑक्शन की प्रक्रिया को आसान पारदर्शी बनाने के लिए उनके हुनर अनुभव के आधार पर अलग-अलग ‘सेट्स’ यानी ग्रुप बनाए जाते हैं.
• कैप्ड अनकैप्ड में बंटवारा – सबसे पहले खिलाड़ियों को दो बड़े हिस्सों में बांटा जाता है. ‘कैप्ड’ (जो इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं) ‘अनकैप्ड’ (जिन्होंने अभी तक इंटरनेशनल मैच नहीं खेला है).
• विशेषज्ञता के आधार पर ग्रुप – इसके बाद उनके रोल के हिसाब से छोटे-छोटे ग्रुप तैयार किए जाते हैं, जैसे, बल्लेबाज, ऑलराउंडर, विकेटकीपर, तेज गेंदबाज स्पिनर्स. हर एक सेट में 5 से 14 खिलाड़ी होते हैं.
• ऑक्शन के दिन बोलियां – ऑक्शन वाले दिन इन्हीं सेट्स के हिसाब से एक-एक करके खिलाड़ियों का नाम पुकारा जाता है फ्रेंचाइजियां उन पर पैसों की बारिश करती हैं. सबसे पहले मार्की कैप्ड खिलाड़ियों के सेट आते हैं, आखिरी में अनकैप्ड खिलाड़ियों पर बोली लगती है.