रणजी ट्रॉफी में रेलवे के खिलाफ 128 रन का पीछा करते हुए तमिलनाडु को आसानी से जीत मिलनी चाहिए थी, लेकिन घूमती हुई और अनियमित उछाल वाली पिच पर उनके बल्लेबाजों ने खुद को मुश्किल में डाल दिया.
एक समय टीम 91 रन पर पांच विकेट खो चुकी थी और जीत दूर लग रही थी. हालांकि, नंबर पांच पर बल्लेबाजी करने आए आंद्रे सिद्धार्थ ने नाबाद 56 रन बनाकर टीम को जीत की दहलीज तक पहुंचाया. यह इस सीजन में तमिलनाडु की लगातार दूसरी घरेलू जीत है.
शुरुआती झटके और कोच की सलाह
मैच के तीसरे दिन की शुरुआत में तमिलनाडु ने रेलवे को 108 रन पर ऑल आउट कर दिया था. रेलवे ने अपने रात के स्कोर में सिर्फ एक रन जोड़ा. तमिलनाडु ने बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया था, जिसमें लगातार दो बार शून्य पर आउट होने वाले विमल कुमार को नीचे भेजा गया और अथिश एसआर ने एन जगदीशन के साथ पारी की शुरुआत की. पिच पर जबरदस्त टर्न था, ऐसे में तमिलनाडु को अच्छी शुरुआत और कुछ मजबूत साझेदारियों की जरूरत थी. 31 रन की शुरुआती साझेदारी अहम रही, लेकिन रेलवे ने जल्द ही तीन विकेट झटक लिए.
तमिलनाडु के मुख्य कोच यो महेश को डगआउट से लगातार ‘नंबुंगा दा, नंबुंगा दा’ (खुद पर भरोसा रखो) चिल्लाते हुए सुना जा सकता था. वो बल्लेबाजों से अपनी रक्षात्मक तकनीक पर भरोसा करने और इस मुश्किल लक्ष्य को पूरा करने के लिए कह रहे थे.
सिद्धार्थ की पारी का टर्निंग पॉइंट
बाबा इंद्रजीत की मौजूदगी से बीच में कुछ शांति आई, लेकिन सिद्धार्थ की शुरुआत घबराहट भरी थी. योजना आक्रामक खेलने की थी, लेकिन इंद्रजीत को छोड़कर तमिलनाडु के टॉप ऑर्डर ने लापरवाही से खेला. स्पिनरों के खिलाफ सिद्धार्थ ने वाइड स्वीप शॉट खेले. जब वो 5 रन पर थे, तब उन्होंने लेग स्पिनर प्रद्युम्न पारिख की गेंद पर स्लॉग स्वीप किया, जो ऑफ स्टंप के बाहर फेंकी गई थी. किस्मत से, कवर पर खड़े भार्गव मेराई ने कैच छोड़ दिया.
बल्लेबाजी का अंदाज और आगे की राह
50 रन की साझेदारी ने तमिलनाडु की घबराहट शांत की, लेकिन इंद्रजीत का आउट होना एक झटका था. लक्ष्य सिर्फ 40 रन दूर था, लेकिन तमिलनाडु की बल्लेबाजी इतनी नाजुक है कि यह अब भी एक चुनौती लग रही थी. जल्द ही, प्रदोष रंजन पॉल ने एक रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की और एलबीडब्ल्यू आउट हो गए, जिससे रेलवे को अप्रत्याशित जीत की उम्मीद दिखने लगी. लेकिन तमिलनाडु के लिए सिद्धार्थ और विमल ने वो भरोसा दिलाया जिसकी उन्हें सख्त जरूरत थी. उन्होंने ऊंचे शॉट खेलना बंद कर दिया. उन्होंने बचाव और हल्के हाथ से खेलना शुरू किया, जिसमें सिंगल और डबल लेना सुरक्षित रास्ता था.
ये पारी एक बार फिर दिखाती है कि फर्स्ट डिवीजन क्रिकेट के बाद रणजी में आने वाले तमिलनाडु के बल्लेबाजों को ऐसी पिचों पर खेलने में क्या दिक्कत होती है. चेन्नई सर्किट में ऐसी या इससे भी खराब पिचें आम हैं, इसलिए ये बल्लेबाजों के लिए अनजान नहीं हैं. लेकिन उन मैचों में भी बल्लेबाज शायद ही कभी बड़े स्कोर बनाते हैं. ऐसी पिचों पर उनकी पारियां अक्सर लॉटरी जैसी होती हैं, इसलिए वे आक्रामक रास्ता चुनते हैं, जिसका मतलब है कि वे शायद ही कभी ठोस पारियां खेलने के लिए अपनी रक्षात्मक तकनीक पर भरोसा करते हैं. एलीट ग्रुप डी में लगातार दो घरेलू जीत तमिलनाडु को एक राहत देती हैं. मुंबई ने मजबूत शुरुआत की है और लगातार तीसरी पारी की जीत की तलाश में है, जिससे वे क्वालीफाई करने के लिए पसंदीदा बन जाएंगे. तमिलनाडु ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहने की उम्मीद कर सकता है.