श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत की ऐतिहासिक हार, 249 रन बनाकर भी वेस्टइंडीज से हारी टीम

भारत और वेस्टइंडीज के बीच रांची में खेले गए दूसरे टी20 मुकाबले में ऐसा नतीजा सामने आया, जिसने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को हैरान कर दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 249 रन बनाए थे।

इतने बड़े स्कोर के बाद भारत की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मेहमान टीम ने 18.3 ओवर में 252 रन बनाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह भारत को अपने ही मैदान पर बड़ी हार झेलनी पड़ी। इस नतीजे के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर के नाम एक ऐसा अनचाहा रिकॉर्ड दर्ज होने का दावा किया गया है, जिसने उनकी कप्तानी को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

240 से ज्यादा रन बनाने के बाद भी तीन बार हार

रिपोर्ट के मुताबिक, श्रेयस अय्यर ऐसे पहले कप्तान बन गए हैं, जिनकी अगुवाई में टीम 240 से अधिक रन बनाने के बावजूद तीन अलग-अलग मौकों पर मुकाबला गंवा चुकी है। इनमें दो घटनाएं आईपीएल से जुड़ी हैं, जबकि तीसरी हार भारतीय टीम के साथ टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आई। साल 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स की कप्तानी करते हुए अय्यर की टीम 261 रन के लक्ष्य का बचाव नहीं कर सकी थी। इसके बाद 2025 में पंजाब की टीम भी 245 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बावजूद जीत हासिल नहीं कर पाई। अब भारत की ओर से 249 रन बनाने के बाद मिली हार ने इस सूची में एक और नाम जोड़ दिया है।

भारत के घरेलू टी20 रिकॉर्ड पर भी असर

रांची में मिली हार केवल कप्तान के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली बार 225 से अधिक रन बनाने के बाद भी मुकाबला हार गई। इसके साथ ही घरेलू मैदान पर किसी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 250 से ज्यादा रन खर्च करने का अनचाहा रिकॉर्ड भी भारत के नाम दर्ज हुआ। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने जिस गति से रन बनाए, उससे भारतीय गेंदबाजी की प्रभावशीलता पर सवाल उठे। फील्डिंग में हुई चूक और गेंदबाजों की रणनीति की समीक्षा भी टीम प्रबंधन के लिए अहम होगी।

अय्यर की कप्तानी से जुड़े पुराने नतीजे भी चर्चा में

रिपोर्ट में अय्यर की कप्तानी के दौरान भारतीय टी20 टीम के कई खराब नतीजों का भी जिक्र किया गया है। इनमें आयरलैंड के खिलाफ हार, लगातार कई मैचों में जीत नहीं मिलना और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बड़े अंतर से शिकस्त शामिल हैं। इसी अवधि में भारतीय टीम को 125 रन से अपनी सबसे बड़ी टी20 अंतरराष्ट्रीय हार झेलने और 76 रन पर ऑलआउट होने जैसी निराशाओं का सामना करने की बात भी कही गई है।

इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज गंवाने और लगातार दो टी20 सीरीज में हार के आंकड़े भी आलोचना का हिस्सा बने हैं। हालांकि, इन सभी नतीजों को केवल कप्तान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानने के बजाय टीम के समग्र प्रदर्शन, खिलाड़ियों की उपलब्धता और मैच परिस्थितियों के संदर्भ में देखना जरूरी है।

हालिया हार ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से मई 2026 के बीच भारत ने 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में केवल सात हार का सामना किया था। इसके विपरीत, पिछले चार महीनों में 18 मुकाबलों के दौरान सात हार का दावा किया गया है। यह तुलना टीम के हालिया प्रदर्शन में गिरावट की ओर इशारा करती है। रांची का मुकाबला इस लिहाज से भी अहम रहा कि भारत ने बड़ा स्कोर खड़ा करने के बावजूद गेंद से लक्ष्य का बचाव नहीं किया। अब सवाल यह है कि भारतीय टीम अगले मुकाबलों में अपनी गेंदबाजी, फील्डिंग और दबाव में फैसले लेने की क्षमता में कितना सुधार कर पाती है।

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