ध्रुव जुरेल ने शतक के बाद दिखाया ‘जय जवान जय किसान’ टैटू, पिता और दादा किसान को समर्पित किया यादगार पल

कोलंबो। भारतीय क्रिकेट के युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ध्रुव जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन न सिर्फ अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक पूरा किया, बल्कि अपने जश्न के जरिए अपनी पारिवारिक जड़ों और उन मूल्यों को भी दुनिया के सामने रखा, जिनसे उनका जीवन जुड़ा है।

जुरेल ने शतक पूरा करने के बाद बांह पर बना ‘जय जवान जय किसान’ का टैटू दिखाया और अपने इस खास जश्न को अपने पिता और दादा को समर्पित किया। जुरेल के इस अंदाज ने मैदान पर मौजूद दर्शकों और क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा।

श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट की पहली पारी में जुरेल ने बेहद धैर्य और जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी की। भारत एक समय 307 रन पर छह विकेट गंवा चुका था और टीम को निचले क्रम से मजबूत साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में जुरेल ने ऋषभ पंत के साथ मिलकर पारी को संभाला। दोनों के बीच सातवें विकेट के लिए 112 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई, जिसने भारत को मुश्किल स्थिति से निकालकर बड़े स्कोर की ओर बढ़ाया। जुरेल ने अपनी पारी के दौरान परिस्थितियों को समझते हुए जोखिम कम लेने की रणनीति अपनाई और धीरे-धीरे अपनी पारी को मजबूत किया।

जुरेल के लिए यह शतक कई मायनों में खास रहा। यह उनके टेस्ट करियर का दूसरा शतक और विदेश में पहला टेस्ट शतक है। उन्होंने 177 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 115 रन बनाए, जिसमें नौ चौके शामिल रहे। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने हेलमेट उतारा, बल्ला उठाया और अपनी बांह पर बना ‘जय जवान जय किसान’ टैटू दिखाया। उनका यह जश्न कुछ ही देर में चर्चा का विषय बन गया।

दिन का खेल समाप्त होने के बाद जब जुरेल से उनके इस खास जश्न के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसके पीछे की कहानी बताई। उन्होंने कहा कि उनके दादा किसान थे और उनके पिता सैनिक रहे हैं। उनके अनुसार, यही उनकी जड़ें हैं और वह इन्हें कभी भूलना नहीं चाहते। इसलिए शतक के बाद किया गया जश्न उनके पिता और दादा के लिए था। जुरेल की यह बात इस उपलब्धि को महज एक क्रिकेट रिकॉर्ड से आगे ले गई और इसमें परिवार, संघर्ष और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भाव भी दिखाई दिया।

जुरेल की पारी में धैर्य के साथ आक्रामकता का भी संतुलन देखने को मिला। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने अपना स्वाभाविक आक्रामक खेल दिखाया और कुछ बड़े शॉट लगाए। इससे पहले वह 99 रन पर पहुंचने के बाद लंबे समय तक शतक का इंतजार करते रहे। एक रन लेने के प्रयास में रन आउट होने का खतरा भी पैदा हुआ, लेकिन वह सुरक्षित रहे। इसके बाद उन्होंने अपना शतक पूरा किया। शतक तक पहुंचने के बाद जुरेल ने राहत और उत्साह के साथ जश्न मनाया।

जुरेल ने बाद में अपनी बल्लेबाजी की रणनीति के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि श्रीलंका की परिस्थितियों से वह पहले से परिचित थे, क्योंकि भारत ए के साथ वह श्रीलंका में दो प्रथम श्रेणी मुकाबले खेल चुके थे। इस अनुभव ने उन्हें मौजूदा परिस्थितियों को समझने में मदद की। बल्लेबाजी के दौरान उनका प्रयास यही था कि वह साझेदारियों पर ध्यान दें, परिस्थितियों का आकलन करें और उसी के अनुसार सकारात्मक क्रिकेट खेलें। उन्होंने बताया कि टीम के कोच और कप्तान की सलाह भी यही रहती है कि बल्लेबाज को परिस्थिति के अनुसार खेलना चाहिए और अपने मौके तलाशने चाहिए।

जुरेल की पारी के दौरान उनके साथी मोहम्मद सिराज का उत्साह भी देखने लायक रहा। शतक पूरा होने के बाद सिराज ने जिस तरह जश्न मनाया, उसका भी जुरेल ने जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सिराज अक्सर शतक बनाने वाले बल्लेबाज से भी ज्यादा उत्साह के साथ जश्न मनाते हैं। जुरेल के मुताबिक, सिराज का यही अंदाज टीम के माहौल को सकारात्मक बनाए रखता है।

भारत ने जुरेल की नाबाद 115 रन की पारी, देवदत्त पडिक्कल के शतक और अन्य बल्लेबाजों के योगदान के दम पर पहली पारी में 503 रन बनाए और नौ विकेट पर पारी घोषित कर दी। भारत की ओर से पडिक्कल ने भी शानदार शतक लगाया, जबकि ऋषभ पंत ने महत्वपूर्ण अर्धशतकीय पारी खेली। भारत ने 500 रन का आंकड़ा पार करके श्रीलंका के सामने बड़ा स्कोर खड़ा किया। जुरेल के निचले क्रम में बनाए गए रनों ने भारत को खास बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारत के 503 रन पर पारी घोषित करने के बाद श्रीलंका की शुरुआत बेहद खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने नई गेंद से दबाव बनाया और मेजबान टीम को शुरुआती झटके दिए। दिन का खेल समाप्त होने तक श्रीलंका ने दो विकेट गंवाकर आठ रन बनाए थे। इस तरह श्रीलंका भारत के पहली पारी के स्कोर से 495 रन पीछे था। भारतीय टीम ने दूसरे दिन के अंत तक मैच पर मजबूत पकड़ बना ली थी।

जुरेल के शतक का एक और महत्वपूर्ण पहलू उनका बल्लेबाजी क्रम रहा। वह सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे थे और श्रीलंका में इस क्रम पर शतक बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों की सूची में उन्होंने खास जगह बनाई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका में टेस्ट मैच के दौरान सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक बनाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज बने हैं। इससे पहले हार्दिक पांड्या ने श्रीलंका में आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए शतक लगाया था।

जुरेल के लिए यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के मुकाबलों में उन पर प्रदर्शन को लेकर दबाव रहा है। इसके बावजूद उन्होंने विदेशी परिस्थितियों में खुद को साबित किया। उन्होंने गाले में अर्धशतक के बाद कोलंबो में शतक लगाया। इससे उनकी बल्लेबाजी में बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत मिला है। खास बात यह रही कि जुरेल ने शतक के बावजूद अपनी सफलता को लेकर किसी तरह की आत्मसंतुष्टि नहीं दिखाई।

मैच के बाद उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी भारत का प्रतिनिधित्व करता है तो दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होता। देश के लिए खेलने के साथ हमेशा जिम्मेदारी और उम्मीदें जुड़ी रहती हैं। उनके अनुसार, शतक बनाना निश्चित रूप से खुशी की बात है, लेकिन अगले दिन बल्लेबाज फिर शून्य से शुरुआत करता है। यही सोच उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है।

ध्रुव जुरेल का ‘जय जवान जय किसान’ वाला जश्न इसलिए भी खास बन गया क्योंकि यह किसी सामान्य क्रिकेट सेलिब्रेशन से अलग था। शतक के बाद उन्होंने अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि को परिवार की विरासत से जोड़ा। एक ओर उनके दादा की किसान पृष्ठभूमि और दूसरी ओर उनके पिता की सैनिक के रूप में सेवा-इन दोनों को उन्होंने अपने टैटू के माध्यम से सम्मान दिया। मैदान पर कुछ सेकंड का यह जश्न उनके लिए अपनी पहचान और जड़ों को याद करने का माध्यम बन गया।

कोलंबो टेस्ट के दूसरे दिन भारत ने जहां 503 रन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की, वहीं श्रीलंका को आठ रन पर दो विकेट गंवाने के बाद मुश्किल स्थिति में छोड़ दिया। इस पूरे दिन की सबसे यादगार तस्वीरों में जुरेल का शतक और उसके बाद बांह पर बना ‘जय जवान जय किसान’ टैटू दिखाते हुए उनका जश्न रहा। क्रिकेट के मैदान पर बल्ले से हासिल की गई उपलब्धि को परिवार की जड़ों और देश के जवान-किसान को समर्पित कर जुरेल ने इस शतक को अपने करियर की यादगार पारियों में शामिल कर लिया।

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