नई दिल्ली: महिला टीम के बाद पुरुष भारतीय हॉकी टीम भी विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाई। टीम के पूर्व गोलकीपर और दो बार के ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट पीआर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है और टीम मैनेजमेंट और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।
भारतीय पुरुष टीम का अभियान सोमवार को अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार के साथ खत्म हो गया। नीदरलैंड्स के एम्सटेलवीन स्थित वैगेनर हॉकी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत को सेमीफाइनल की उम्मीद बनाए रखने के लिए जीत जरूरी थी, लेकिन टीम ऐसा नहीं कर सकी। अब भारत सातवें स्थान के मुकाबले में बेल्जियम से भिड़ेगा।
श्रीजेश ने एक्स पर लिखी बात
भारत की सबसे बड़ी कमजोरी पेनल्टी कॉर्नर रहे। टीम को मिले सातों पेनल्टी कॉर्नर बेकार गए। पूरे मैच में गेंद पर नियंत्रण रखने के बावजूद भारतीय खिलाड़ी गोल में मौके नहीं बदल सके। पेरिस ओलंपिक के बाद संन्यास लेने वाले श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखकर भारतीय हॉकी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, ‘चिंता मत कीजिए, वर्ल्ड कप से कोई फर्क नहीं पड़ता। एशियन गेम्स आने वाले हैं। वहां मेडल जीतिए, और फिर हम ओलंपिक के सपने देख सकते हैं। जाहिर है वर्ल्ड कप में जो कुछ भी गलत हुआ, उसकी भरपाई के लिए इतना काफी है।’
कोच टूर्नामेंट से पहले छुट्टी मना रहे थे
श्रीजेश ने महिला टीम के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ल्ड कप से पहले तैयारी के अंतिम चरण में महिला टीम के मुख्य कोच छुट्टी पर कैसे जा सकते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा कि टीम ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन जवाबदेही तय होनी चाहिए। पूर्व भारतीय गोलकीपर ने कहा कि जब टीम किसी बड़ी टीम से हारती है तो उसे ‘सीखने का अनुभव’ बताया जाता है, जबकि एशियाई टीमों के खिलाफ जीत को बड़ी सफलता के रूप में पेश किया जाता है।
उन्होंने पूछा, ‘क्या हम ऐसी टीम बना रहे हैं जो सिर्फ अच्छा हॉकी खेले या ऐसी टीम जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों को हराने में सक्षम हो?’
श्रीजेश ने लिखा- सीखने, अच्छी हॉकी और भविष्य के टूर्नामेंट्स की आड़ लेना बंद करें। वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है। यह वर्ल्ड कप है। तो मुश्किल सवाल कौन पूछेगा? जवाबदेही की मांग कौन करेगा? और सबसे जरूरी बात, क्या किसी को सच में इसकी परवाह है?